
DFRAC is an Independent Media Organization focusing on Fact-Checking and Hate Speech. @DFRAC_Urdu @DFRAC_Arabic @DFRAC_Bengali @Dfrac_org
India
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आपको सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से कोई ऐसी जानकारी मिलती है जिसके सच होने पर आपको शक है - तो हमारे हेल्प लाइन नंबर पर फैक्ट चेक के लिए भेजे
74288-63260
फैक्ट चेक: त्रिपुरा में BSF जवानों पर हमले के आरोपियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का भ्रामक वीडियो वायरल
त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास BSF जवानों पर हुए हमले के मामले में अब तक 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह BSF जवानों पर हमला करने वाले आरोपियों के खिलाफ त्रिपुरा पुलिस की कार्रवाई का है। (1/3)
#FACTCHECK
वायरल वीडियो की पड़ताल के लिए #DFRAC ने इसके कीफ्रेम को रिवर्स सर्च किया। इस दौरान हमें यही वीडियो 1 नवंबर 2026 को फेसबुक पर शेयर किया हुआ मिला। पोस्ट के कैप्शन में बताया गया कि एक पुलिस अधिकारी गारमेंट वर्कर को पकड़ने के दौरान गिर गया था। इसके अलावा, बांग्लादेशी अखबार The Daily Star की 3 नवंबर 2026 की रिपोर्ट में बताया गया कि ढाका के मीरपुर-11 में गारमेंट श्रमिकों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। श्रमिकों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया था। वहीं, बांग्लादेशी न्यूज पोर्टल The Business Standard की 1 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, मीरपुर में न्यूनतम 30,000 टका मासिक वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे गारमेंट श्रमिकों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग किया और कम से कम 19 लोगों को हिरासत में लिया गया था। (2/3)
निष्कर्ष:
#DFRAC के फैक्ट चेक से स्पष्ट है कि वायरल वीडियो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है। यह वीडियो त्रिपुरा में BSF जवानों पर हमला करने के आरोपियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का नहीं, बल्कि बांग्लादेश के ढाका स्थित मीरपुर में गारमेंट श्रमिकों और पुलिस के बीच हुई झड़प का है। इसलिए सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा गलत संदर्भ में वीडियो को शेयर करता है। (3/3)
फैक्ट चेक: मणिपुर में भारतीय सेना के ऑपरेशन में 28 नागरिकों की मौत के दावे का कोई सबूत नहीं, वायरल वीडियो पुराना है
दावा:
पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा अकाउंट्स ने भारतीय नागरिकों की पहचान अपनाकर एक वीडियो शेयर किया। इसके साथ दावा किया गया कि भारतीय सेना ने मणिपुर में एक ऑपरेशन चलाया, जिसमें कम से कम 28 नागरिकों की मौत हो गई और 70 से अधिक लोग घायल हो गए। साथ ही, इस कथित कार्रवाई में सेना के छह जवानों के घायल होने का भी दावा किया गया।
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फैक्ट:
DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि वायरल वीडियो पुराना है और इसके साथ किया जा रहा दावा निराधार है। ऐसी कोई विश्वसनीय जानकारी या पुष्टि सामने नहीं आई है, जिससे साबित हो कि भारतीय सेना ने मणिपुर में इस तरह का कोई ऑपरेशन चलाया, जिसमें नागरिकों की मौत हुई हो या सेना के जवान घायल हुए हों।
इसके अलावा, सोशल मीडिया पोस्ट के साथ शेयर किए जा रहे वीडियो के दृश्य भी पुराने हैं और मणिपुर की किसी हालिया घटना से संबंधित नहीं हैं।
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निष्कर्ष:
मणिपुर में भारतीय सेना के ऑपरेशन में नागरिकों और जवानों के हताहत होने का दावा मनगढ़ंत है। इसके साथ शेयर किया जा रहा वीडियो भी पुराना है और किसी हालिया घटना से संबंधित नहीं है।
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youtube.com/watch?v=yudshloK…
फैक्ट चेक: राहुल गांधी के दिसंबर 2025 के वोट चोरी और प्रदूषण वाले बयान का एडिटेड वीडियो दिल्ली की हवा पर हालिया टिप्पणी बताकर वायरल
दावा:
रिपब्लिक टीवी ने एक वायरल वीडियो शेयर किया, जिसमें दावा किया गया कि @RahulGandhi ने हाल ही में दिल्ली के वायु प्रदूषण को कथित वोट चोरी से जोड़ते हुए चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर नए आरोप लगाए हैं।
#GyaneshKumar #Protest #ElectionCommission
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आगे की जांच में यह वीडियो कांग्रेस के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर भी मिला। दरअसल, यह दिसंबर 2025 में दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली का वीडियो है। मूल वीडियो में लगभग 1 घंटे 40 मिनट 25 सेकंड के समय पर राहुल गांधी को वायरल क्लिप में दिए गए बयान देते हुए सुना जा सकता है।
अपने मूल भाषण में राहुल गांधी ने कहा था कि वोट चोरी से संविधान कमजोर होता है और इससे बेरोजगारी, GST की खामियां, नोटबंदी और वायु प्रदूषण जैसी समस्याओं को बढ़ावा मिलता है।
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youtube.com/watch?v=8nmyzzlt…
निष्कर्ष:
राहुल गांधी का वायरल वीडियो दिसंबर 2025 में रामलीला मैदान में दिए गए उनके भाषण का पुराना और एडिटेड हिस्सा है। इसे दिल्ली के प्रदूषण पर उनकी हालिया टिप्पणी बताकर शेयर किया जा रहा है, जबकि यह दावा भ्रामक है।
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youtube.com/watch?v=a_hGcbdu…
फैक्ट चेक: क्या भारत घूमने आई विदेशी महिला पर्यटक के साथ हुआ दुष्कर्म, काटे गए बाल? जानिए वायरल वीडियो की सच्चाई
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि भारत घूमने आई एक विदेशी महिला पर्यटक के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार किया गया। इतना ही नहीं, उसके बाल भी काट दिए गए। (1/5)
इसके अलावा, #DFRAC को कजाखस्तान की न्यूज वेबसाइट Ozgeris.info की 24 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट भी मिली। इसमें बताया गया कि उज्बेकिस्तान में एक महिला ने अपने पति की कथित प्रेमिका होने के शक में दूसरी महिला के साथ मारपीट की और कैंची से उसके बाल काट दिए। (4/5)
निष्कर्ष:
#DFRAC के फैक्ट चेक से स्पष्ट है कि भारत घूमने आई विदेशी महिला पर्यटक के साथ दुष्कर्म और उसके बाल काटे जाने का दावा भ्रामक है। वायरल वीडियो भारत का नहीं, बल्कि उज्बेकिस्तान की एक घटना का है। (5/5)
फैक्ट चेक: त्रिपुरा में जनजातीय ग्राम समिति चुनाव के दौरान हुई हिंसा का पुराना वीडियो BSF जवानों पर हमले से जोड़कर भ्रामक दावे के साथ वायरल
दावा:
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि 2 नवंबर 2026 को त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले में आशाबाड़ी बॉर्डर आउटपोस्ट के पास BSF के जवानों पर भीड़ ने हमला कर दिया था। इसके बाद BSF के जवानों ने हिंसक भीड़ को खदेड़ा।
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फैक्ट:
DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि वायरल वीडियो पुराना है और इसे भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। यह वीडियो कम से कम 5 अक्टूबर 2026 से इंटरनेट पर मौजूद है, यानी 2 नवंबर को आशाबाड़ी बॉर्डर आउटपोस्ट के पास BSF जवानों और स्थानीय लोगों के बीच हुई कथित झड़प से लगभग एक महीने पहले का है।
आगे की जांच में सामने आया कि यह वीडियो दरअसल 5 अक्टूबर 2026 को त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) की ग्राम समिति चुनावों की मतगणना के दौरान हुए हंगामे का है।
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निष्कर्ष:
वायरल वीडियो 5 अक्टूबर 2026 को TTAADC ग्राम समिति चुनावों की मतगणना के दौरान हुए हंगामे का पुराना फुटेज है। इसका 2 नवंबर को आशाबाड़ी बॉर्डर आउटपोस्ट के पास हुई घटना से कोई संबंध नहीं है।
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youtube.com/watch?v=U33Gsy6w…
फैक्ट चेक: क्या इजरायल की संसद में मुस्लिम सांसदों ने अदा की नमाज? जानिए वायरल वीडियो की सच्चाई
इजरायल में आम चुनाव के परिणाम आने के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि इजरायल की संसद (नेसेट) में मुस्लिम सांसदों ने नमाज अदा की। (1/4)
इसके अलावा, #DFRAC को समाचार वेबसाइट अल-मरसद की एक रिपोर्ट भी मिली। इस रिपोर्ट के मुताबिक, जॉर्डन की प्रतिनिधि सभा के कई सांसदों ने संसद भवन के अंदर सदन के स्थायी ब्यूरो के चुनाव से संबंधित सत्र शुरू होने से पहले सामूहिक रूप से जुहर की नमाज अदा की थी। रिपोर्ट में बताया गया कि सांसद अहमद अल-रक़ब ने नमाज की इमामत की थी। वहीं, जॉर्डन की सांसद दीमा तहबूब ने बताया कि सदन की उद्घाटन बैठक के दौरान दरवाजे बंद होने के कारण सांसदों ने सत्र शुरू होने से पहले नमाज अदा की थी। (3/4)
निष्कर्ष:
#DFRAC के फैक्ट चेक से स्पष्ट है कि वायरल वीडियो इजरायल की संसद (नेसेट) का नहीं, बल्कि जॉर्डन की प्रतिनिधि सभा का है। इसमें जॉर्डन के सांसदों को संसद भवन में जुहर की नमाज अदा करते हुए देखा जा सकता है। इसलिए सोशल मीडिया पर वीडियो को इजरायल की संसद का बताकर किया जा रहा दावा भ्रामक है। (4/4)















