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"तुमने हमें पूज पूज कर पत्थर कर डाला ; वे जो हमपर जुमले कसते हैं हमें ज़िंदा तो समझते हैं "~ हरिवंश राय बच्चन

Mumbai, India
Joined May 2010
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T 5905 - पूज्य बाबूजी की कविता, प्रस्तुत कर रहा हूँ . .. जो न समझे शब्द, वो सदा रहेगा स्तब्ध !!! शब्द - निशब्द "ओ मेरे शब्दों , मेरी क्वारी भावना को इतने मोटे -मोटे वस्त्रों में लपेटकर उनके सामने मत ले जाओ, वे मुझे नहीं देख सकेंगे । ओ मेरे शब्दो , क्षीण हो , सूक्ष्म हो , पारदर्शी बनो , की वो मेरी भावना को देख सकें, निरावरण, नग्न , अकलुष , दिव्य, समर्पिता , माँगती शरण ।" ~ हरिवंश राय बच्चन
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T 5904 - ..... बोलन लाग्यो काग रे
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टी 5903{आई) कृष्ण कन्हैया के लिए, प्रार्थना स्वरूप, अक्सर उचारण करते है - " हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की " और मीडिया उसका निरादर करके, अपना प्रचार करने के लिए, छापता है, 'देखिए ये अमिताभ अपने विरोधियों को चुनौती दे रहा है, की, 'ले आओ हाथी घोड़ा ' हम अपने हथियारों से लड़ेंगे, डरेंगे नहीं !' एक तो घोर निंदा एक 'जय श्री कृष्ण ' के उपलक्ष्य में , और दूसरा , शब्दों को पलट कर विरोधियों को चुनौती देने की बात कर रहे है ।। सुन लो कान फाड़ के मीडिया वालो ।। 50 million की आबादी है हमारे followers की मीडिया वालो । जिस दिन हमने इशरा किया, तो उनमें से केवल 10 प्रतिशत ही, ठोकने के लिए तैयार बैठें हैं । तुम जितनी हमारे शब्दों की उलट पलट करके निंदा करोगे, उससे १०० गुना ज़ादा करने की क्षमता हमारे Ef के पास पड़ी है । ।। बस बोलने की देरी है उन्हें ।। ये देखिए मीडिया क्या छापता है : "अमिताभ बच्चन ने विरोधियों की धमकी पर कसा तंज, क्रिप्टिक पोस्ट लिखकर निकाली भड़ास- 'जाओ, ले आओ अपने हाथी घोड़े' News18 Hindi " ये देखा आपने - धर्म का निरादर, और बेतुका (Betuka) – Absurd, nonsensical, or silly. हास्यास्पद (Hasyaspad) – Ridiculous or laughable (invoking derision). असंगत ये वो हैं जिन्हें देश का 5th Column माना जाता है - 4 column तो हमारे संस्कारों में माना जाता है, आदर सम्मान के साथ ।। एक छटा इस लिए कहा जाता है , क्यूँकि उन्हें देशवासियों की और से सम्मानित, और एक समाज में आदार रूपी दर्जा दिया जाता है !! सम्मान ??? इससे बड़ा हासपद नहीं हो सकता ... . हमसे कोई ग़लती हो जाए - ग़लतियाँ हो जाती हैं - तो हम तुरंत क्षमा माँगते हैं, और सुधार करने का प्रयत्न करते हैं .. पर यहाँ लगता है उनका ये जन्म साइ धिकार है ... मैं कहने वाला था एक पीड़ित व्यक्ति का, स्नेह प्यार, जा रहा हूँ निद्रा के लिए लेकिन पीड़ित नहीं कहूँगा - अपनी पीड़ा का अधिकार केवल मेरा है - वो आपके { मीडिया ] लायक़ नहीं है ... शुभ रात्रि मेरे प्यारे E
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T 5903 - लिखते हैं प्रार्थना, और मीडिया उसके शब्दों का दुरुपयोग करके, निरादर करता है ! इतनी लाचारी ??? अब मीडिया हमारे हाथ में भी है । सोच लो ! भारी पड़ेगा !!
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T 5902 - सोचा था बुरा होगा; हो गया ठीक, अब सोचा का क्या करें !!
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T 5901 - निकला की नहीं, तेल
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T 5900 - करना है तो करो, नहीं तेल लेने जाओ! .. SO ?
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T 5899 - सोचा अभी कर दो, बाद में ग़लतियाँ हो रही है
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T 5900 - करना है तो करो, नहीं तेल लेने जाओ!
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T 5898 - नीचे वाला ये होना चाहिए; 5818, ग़लती हो गई
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T 5798 - So !!!?
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T 5897 - सम्भाला छोड़
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T 5896((i) - नंबर देने में गलती हो गई - तो जहाँ 48 से शुरुआत की है वो होना चाहिए 58 .. इत्यादि , क्षमा चाहता हों
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T 4896 - दिया
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T 5895 - चल बंजारे, सीना ताने
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T 5894 - ok
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T 5893 - चलो
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