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कहानी -
वह कमरा जो बंद नहीं हुआ --
“कहानी में प्रयुक्त सभी नाम, क़िरदार और घटनाएँ लेखक की कल्पना पर आधारित हैं।
यदि किसी वास्तविक व्यक्ति या घटना से समानता हो, तो उसे केवल संयोग समझा जाए।”
मुझे लखनऊ में नौकरी मिली तो बजट बहुत कम था। हजरतगंज के पास एक पुरानी कोठी में एक कमरा सस्ते में मिल रहा था। दो मंजिला कोठी, नीचे मकान मालिक रहते थे, ऊपर दो कमरे। एक में मैं, दूसरा बंद।
मकान मालिक चाचा ने चाबी देते हुए एक ही बात कही थी, "बेटा एक बात का ध्यान रखना, बगल वाला कमरा खोलने की कोशिश मत करना।"
मैंने पूछा, "क्यों चाचा, क्या है उसमें?"
"कुछ नहीं, बस बहुत सालों से बंद है। ताला जाम है। खुलता ही नहीं।"
मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। कमरा सस्ता था, लोकेशन अच्छी थी। मैं शिफ्ट हो गया।
पहले दिन ही मुझे अजीब लगा। बगल वाले कमरे का दरवाजा पुराना, लकड़ी का था, पर उस पर ताला नहीं था। सिर्फ एक कुंडी लगी थी। और वो कुंडी भी आधी टूटी हुई। दरवाजा न पूरा बंद था, न खुला। बस एक-दो इंच खुला हुआ, जैसे कोई झांक रहा हो।
मैंने सोचा हवा से खुला होगा, तो मैंने हाथ से धकेल कर बंद कर दिया।
रात करीब डेढ़ बजे मेरी नींद खुली। गर्मी लग रही थी। मैंने देखा, वो दरवाजा फिर से एक इंच खुल गया है। और उस खुली झिरी से हल्की पीली रोशनी आ रही थी।
मैं उठा। "चाचा ने तो कहा था उसमें लाइट ही नहीं है।"
मैंने धीरे से आवाज लगाई, "कौन है?" कोई जवाब नहीं।
मैंने हिम्मत करके दरवाजा पूरा खोलना चाहा, पर वो अटक गया। जैसे पीछे से किसी ने पकड़ रखा हो। मैंने जोर लगाया तो दरवाजा एक झटके में बंद हो गया।
मैं वापस आकर सो गया।
अगले दिन मैंने चाचा से कहा, "चाचा वो बगल वाला कमरा रात में अपने आप खुल जाता है।"
चाचा का चेहरा एकदम रंगहीन हो गया। बोले, "तुमने अंदर देखा तो नहीं?"
"नहीं, बंद था।"
"ठीक है, मत देखना।" वो जल्दी से नीचे चले गए।
उस रात मैंने तय किया, देख कर रहूंगा। मैंने अपना फोन निकाला, वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन की और दरवाजे के सामने टेबल पर रख दिया। फिर लाइट बंद करके सोने का नाटक करने लगा।
रात के 2 बजकर 14 मिनट पर, मेरे फोन में हलचल हुई। दरवाजा धीरे-धीरे अपने आप खुला। पूरा नहीं, बस आधा। और अंदर से एक लड़का निकला। मेरी ही उम्र का, 25-26 साल। दुबला-पतला, आंखों पर चश्मा, हाथ में एक किताब और एक लालटेन।
वो मेरी तरफ देखे बिना बालकनी में चला गया। लालटेन नीचे रखी, और क़िताब पढ़ने लगा।
मैं सांस रोके देख रहा था। क़रीब दस मिनट बाद, वो उठा, और वापस उसी कमरे में चला गया। दरवाज़ा फ़िर से एक इंच खुला छोड़ गया।
सुबह मैंने वीडियो देखा। उसमें साफ दिख रहा था, पर जब वो लड़का बालकनी से वापस गया, तो वीडियो में उसकी परछाई नहीं बन रही थी। लालटेन की रोशनी थी, पर परछाई नहीं।
मैं भाग कर चाचा के पास गया। वीडियो दिखाया।
चाचा फूट-फूट कर रो पड़े।
"ये मेरा बेटा अभिषेक था। तीन साल पहले। IAS की तैयारी कर रहा था। दिन-रात इसी कमरे में पढ़ता था। कहता था, पापा इस कमरे में सुकून है। एग्जाम से दो दिन पहले, रात में इसी तरह लालटेन से पढ़ रहा था, क्योंकि लाइट चली गई थी। उसी रात उसे दिल का दौरा पड़ा। जब तक हम दरवाज़ा तोड़ते, वो जा चुका था।"
"तो ये दरवाज़ा..."
"तब से ये दरवाज़ा बंद ही नहीं होता बेटा। मैंने मिस्त्री बुलाया, नया ताला लगवाया, कील ठोकवाई। हर सुबह ये एक इंच खुला मिलता है। जैसे वो अब भी पढ़ने आता हो। और हर बार बालकनी में जाकर पढ़ता है, ताकि उसकी लालटेन की रोशनी से किसी की नींद ख़राब न हो। वो बचपन से ही ऐसा था।"
मेरी आंखें भर आईं।
उस रात मैंने खुद उस कमरे का दरवाज़ा पूरा खोल दिया। अंदर धूल जमी थी, एक टूटी कुर्सी, एक मेज और मेज पर किताबों का ढेर। बीच में अभिषेक की एक फोटो रखी थी, जिस पर माला टंगी थी।
मैंने उस कमरे की सफाई की, उसकी किताबों को झाड़ा और उसकी फोटो के सामने एक नई लालटेन रख दी और जला दी।
उस रात के बाद से वो दरवाज़ा कभी अपने आप नहीं खुला। वो पूरा खुला ही रहता है। और रात में जब लाइट जाती है, तो उस कमरे से आज भी पीली रोशनी आती है, जैसे कोई अभी भी वहाँ बैठा पढ़ रहा हो।
कुछ कमरे बंद नहीं होते, क्योंकि उनमें किसी के सपने अभी भी ज़िंदा होते हैं।
#अशोक_मसरूफ़
PIC credit - Chatgpt
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Replying to @AMushroof
दीवाली हो तो दिल-वाली हो❗️ जले तो ज्ञान-दीप जले‼️
अन्तर्मन में उजियारा हो तो ; लगते हैं सब भले भले‼️❗️
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चल आ इक ऐसी नज़्म कहूँ /
चल आ इक ऐसी नज़्म कहूँ
जो लफ़्ज़ कहूँ वो हो जाए
बस अश्क कहूँ तो इक आँसू
तिरे गोरे गाल को धो जाए
मैं आ लिक्खूँ तू आ जाए
मैं बैठ लिखूँ तू आ बैठे
मिरे शाने पर सर रक्खे तू
मैं नींद कहूँ तू सो जाए
मैं काग़ज़ पर तिरे होंट लिखूँ
तिरे होंटों पर मुस्कान आए
मैं दिल लिक्खूँ तू दिल थामे
मैं गुम लिक्खूँ दिल खो जाए
तिरे हाथ बनाऊँ पेंसिल से
फिर हाथ पे तेरे हाथ रखूँ
कुछ उल्टा सीधा फ़र्ज़ करूँ
कुछ सीधा उल्टा हो जाए
मैं आह लिखूँ तू हाए करे
बेचैन लिखूँ बेचैन हो तू
फिर मैं बेचैन का बे काटूँ
तुझे चैन ज़रा सा हो जाए
अभी 'ऐन लिखूँ तू सोचे मुझे
फिर शीन लिखूँ तिरी नींद उड़े
जब क़ाफ़ लिखूँ तुझे कुछ कुछ हो
मैं 'इश्क़ लिखूँ तुझे हो जाए ....
आमिर अमीर
❤️❤️🫰
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Replying to @AMushroof
कुछ जगहें अपनी खूबसूरती से नहीं, किसी ख़ास शख़्स की मौजूदगी से यादगार बन जाती हैं। फिर वक़्त गुज़र जाता है, लोग बिछड़ जाते हैं, मगर उन गलियों के हर मोड़ पर उनकी आहट ठहरी रह जाती है। अजीब है न, कभी कोई ख़ास लम्हा भी नहीं गुज़रा होता, फिर भी पूरी उम्र वही लम्हे याद आते रहते हैं। ❤️
बहुत ख़ूबसूरत एहसास… कुछ गलियाँ दरअसल रास्ते नहीं, यादों के पते होती हैं।
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शुभ दीपावली।
ॐ सूर्याय नमः
आपका जीवन सूर्य की किरणो की तरह स्वास्थ्य, सुख, शांति और समृद्धि से प्रकाशित हो आपको हर कार्य में सफलता मिले आपका दिन मंगलमय हो, जय श्री सूर्य देवाय नमः, शुभ दीपावली दोस्तों
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शुभ दीपावली
आप और आपके परिवार को खुशियों और प्रकाश के महापर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। जय श्री सियाराम शुभ दिवाली
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तमाम लोग समझते हैं सब्ज़ पेड़ मुझे,
हवाए ज़र्द, कोई और दिन न छेड़ मुझे।
ज़रा-सा वक़्त लगा, ख़ुद को बना लिया मैंने,
कहा था इतने सलीक़े से मत उधेड़ मुझे।
🌺🔥🔥😊😊😊🌺🌺🌹🙏🙏🔥🔥
تمام لوگ سمجھتے ہیں سبز پیڑ مجھے
ہوائے زرد کوئی اور دن نہ چھیڑ مجھے
ذرا سا وقت لگا ، خود کو بن لیا میں نے
کہا تھا اتنے سلیقے سے مت ادھیڑ مجھے
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Lovely Morning all 🥰
May this beautiful festival of lights, which drives away darkness and spreads light, bring new beginnings filled with happiness, peace, prosperity, and positivity into your lives.
Wishing everyone a very Happy Diwali from the bottom of my heart! 🪔💫
#HappyDiwali #Deepavali #DiwaliVibes #FestivalOfLights #SpreadHappiness #SareeLove #DJStudio
@highlight everyone's
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दीपावली आप सभी के घर खुशियों की रोशनी हो। 🪔
जो अपने साथ हैं, उनके साथ खूबसूरत पल बिताएँ! 🫶
और जो दूर हैं, उन्हें प्यार से याद करें।🙌
आप सभी दोस्तों की ज़िंदगी में सुख, शांति और खुशियाँ बनी रहें।
आप सभी को और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ। 💐
#शुभदीपावली
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Assalam alaikum
Friends....,
मुस्कुराना ज़रुरी है..
यह वक़्त और हालात की मजबूरी है।
मुस्कुराहट,
मसाइल ख़त्म नहीं कर सकती,
लेकिन,
*मसाइल से लड़ने का
हौसला ज़रुर देती है।
*Problems
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तेरी याद दिल से ना जाय तो क्या करू
हरपल तेरी याद सताये तो क्या करू
हसरत है कि एक नजर देख ले तुम्हें
पर किस्मत मे वो लम्हा ना आये तो क्या करू
!! तेरी पनाहों का नशा !!
तेरी
साँसों की
ये मखमली सी आँच
जब मेरे लबों को छू जाती
है,सदियाँ भी ठहर जाती हैं वहीं,
और रात मेरी बाँहों में सिमट आती है..!!
तेरी
उँगलियों की ये
नर्म सिरहन,मेरे जिस्म
पे एक ग़ज़ल लिखती है,तेरी
धड़कनों की महकती धुन में,मेरी
रूह मोम सी पिघलती दिखती है..!!
मेरी हर
एक तमन्ना में बस,
तेरे ही गहरे इश्क़ की प्यास
है,मेरी झुकती हुई पलकों में छुपा,
सिर्फ़ तुझमें ही खो जाने का राज़ है..!!
मैं तेरे
सीने से लगकर
यूँ,अपनी हर एक साँस
जीना चाहती हूँ, तेरी आँखों के
इस गहरे समंदर से,मोहब्बत का जाम
पीना चाहती हूँ..!!
तेरी
बाँहों के इस
घेरे में ही,मेरी पूरी
कायनात बसती है,तेरी
एक मुस्कुराहट को पाकर ही,
मेरी सूनी ज़िंदगी हँसती है..!!
चलो
आज इस चाँद
को भी हम,अपनी
चाहत का आईना दिखाते हैं,
सितारों की इस ख़ामोश महफ़िल
में, इश्क़ के नए अफ़साने सुनाते हैं..!!
बता दें
इस रात को कि
मोहब्बत, फूलों सी नाज़ुक
और कितनी गहरी होती है,जो साँसों
को भी रोक दे पल भर में, इतनी पागल
और जुनूनी होती है..!!
#Khusboosingh #ख़ुशबू_सिंह
Ashok Mushroof retweeted
नाराज इतना हूँ की उसे देखते ही रास्ता बदल लू
प्यार इतना है की देखते ही रो दूँ...!!!
Ashok Mushroof retweeted
जब साथ नहीं देना था तो हाथ थामा ही क्यों,
जब बीच राह में छोड़ना था तो अपना बनाया ही क्यों,
हम तो आख़िरी साँस तक साथ निभाने को तैयार थे,
जब तुम्हें जाना ही था तो इतने ख़्वाब दिखाए ही क्यों.. 💔
#शब्बाबख़ैर
Ashok Mushroof retweeted
दीपावली की रोशनी हर घर में खुशियाँ लाए।
दूरियाँ चाहे जितनी हों, अपनों का प्यार हमेशा दिल के करीब रहता है।
हर आँगन में दीये जलें, हर घर में मुस्कान खिले।
आप सभी माता-पिता और बच्चों को शुभ दीपावली! 🪔💐
#शुभदीपावली #HappyDiwali #Diwali
Ashok Mushroof retweeted
दिल बन गया है हमारा अंधेरों का शहर।
इंसानियत मर गया ,बन गया है खंडहर।
पत्थरों को आज हम रौशन करने चले हैं।
जग भर जला लो दीप होता नहीं असर।

































