उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अभी हाल ही में अगले छह महीने के अन्दर एक लाख लोगों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गयी है, किन्तु यह बेहतर होता कि जिन भी सरकारी विभागों में अस्थायी तौर पर लोग वर्षों से कार्यरत हैं उन्हें भी स्थायी नौकरी की व्यवस्था में शामिल किया जाये।
वैसे भी बी.एस.पी. ख़ासकर सरकारी तंत्र में आउटसोर्सिंग एवं संविदा आदि की शोषणकारी व्यवस्था के विरुद्ध है और इसीलिये पार्टी की माँग है कि सरकारी नौकरी बहाली के क्रम में एनआरएचएम के अन्तर्गत विगत अनेक वर्षों से निरन्तर सेवा दे रहे है समस्त एनआरएचएम संविदाकार्मिकों को भी स्वास्थ्य विभाग में नियमित किया जाये तो यह उचित होगा, जो वे लोग अपने स्थायीकरण आदि की माँगों के समर्थन में पिछले कई दिनों से लखनऊ के मान्यवर श्री कांशीराम जी ईको गार्डेन के पास धरना पर हैं।
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कल झारखण्ड प्रदेश की बैठक के बाद आज पटना में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर शाम पटना से दिल्ली रवाना. रामगढ़ विधायक सतीश यादव के साथ स्टेशन पर आत्मीय मुलाकात.
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आज दिनांक 02-10-2026 को आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के निर्देशानुसार बहुजन समाज पार्टी जलालपुर का प्रभारी/प्रत्याशी डॉ.दयाराम राजभर जी को घोषित किया गया।
#बहनजी_का_संदेश
#जयभीम #BSP
#मिशन_2027 #अंबेडकरनगर #जलालपुर
1.जैसाकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों में भी ख़ासकर समाजवादी पार्टी (सपा) की तरह अपने परिवार, सगे-सम्बंधी, भाई-भतीजों, क़रीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूँजीपतियों व धन्नासेठों आदि को टिकट नहीं देती है, यानी चुनावों में उनके धनबल का सहारा नहीं लेती है, बल्कि पार्टी में कार्यरत सर्वसमाज में से केवल ग़रीब, मध्यम वर्ग व कमज़ोर तबक़ों के कर्मठ अम्बेडकरवादी लोगों को ही अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाती है, अर्थात बी.एस.पी. की राजनीति परिवारवाद व धनबल से मुक्त व पाक-साफ है, जबकि वहीं दूसरी तरफ सपा ठीक इसके विपरीत कार्य करती है, जो अपने आपको समाजवादी व कथित ’पीडीए’ (PDA) की पार्टी होने का राजनीतिक ढोंग व छलावा करती हुई ज़्यादा नज़र आती है।
2.इसका एक और ख़ास व ताज़ा उदाहरण यह है कि सपा ने यूपी से राज्यसभा के लिये द्विवार्षिक चुनाव में श्री रामगोपाल यादव को फिर से पर्चा भरवाया है जो सपा मुखिया के नज़दीकी रिश्तेदार हैं, जबकि सपा ने अपनी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार श्री धनराज परिमल नाथवानी को बनाया है, जो चर्चित उद्योग घराने से सम्बद्ध हैं। लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवतः ’फेस सेविंग’ व चुनाव हारने के लिये होगा।
3.तो इस प्रकार का है सपा, उसका ’पीडीए’ (PDA) व उस पार्टी का समाजवाद अर्थात् सपा को चुनाव में वोट तो ’पीडीए’ का चाहिये, लेकिन सांसद व विधायक आदि ज़्यादातर अपने परिवार वालों को व बड़े-बड़े पूँजीपतियों को बनाती है। अतः जनता इनके ’पीडीए’ के बहकावे में ना आये तो यह सही।
4.वास्तव में यह कोई नई बात नहीं है बल्कि सपा का इस प्रकार का दोहरा चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा से ही रहा है और इसीलिये ख़ासकर अपरकास्ट समाज के ग़रीबों तथा ’बहुजन समाज’ अर्थात दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के समस्त लोगों को अब ख़ासकर यूपी विधानसभा आमचुनाव से पहले ही ज़रूर पूरी तरह से सचेत/सतर्क हो जाना चाहिये कि उन सबका हित अम्बेडकरवादी बी.एस.पी. में ही निहित व सुरक्षित है, बाकी सब छलावा ही छलावा है।
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कल मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग कार्यकर्त्ता मीटिंग में ओबीसी के लोगों ने 27% आरक्षण और इन पर हो रहे अत्याचार को लेकर दुःख और चिंता व्यक्त की साथ ही यह भी भरोसा जताया की बिना BSP के मध्य प्रदेश में SC/ST OBC का हित सुरक्षित नहीं है. MP में ओबीसी को मात्र 14% ही आरक्षण मिलता है जबकि इनकी आबादी 55%के आस पास है.BSP का नारा है -जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी. बहनजी जिंदाबाद, bsp जिंदाबाद, जय भीम जय भारत
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आज दिनांक 20-09-2026 को जनपद सुल्तानपुर, विधानसभा कादीपुर निवासी विधानसभा उपाध्यक्ष श्री ओपी वर्मा जी के आवास पर बहुजन समाज पार्टी द्वारा आयोजित चौपाल बैठक में शामिल हुआ। इस दौरान पार्टी संगठन एवं जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
#जयभीम #BSP #सुल्तानपुर #कादीपुर
1. यूपी के आगामी विधानसभा आमचुनाव की तैयारी हेतु समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख का प्रचारित ’पीडीए रथ’ सपा के अपने लाल रंग का कम तथा आरएसएस/भाजपा के ’भगवा’ रंग का (भगवाकरण) ज़्यादा है, तो ऐसे में लोगों में चर्चा यही है कि यह सब उनका वोटों के स्वार्थ की ख़ातिर गिरगिट की तरह लगातार रंग बदलना है या फिर मुसलमानों पर से सपा प्रमुख का वोट पाने का भरोसा उठ जाना है?
2. वैसे भी यूपी के ख़ासकर मुस्लिम समाज को इस कड़वी हकीकत का पूरी तरह से अहसास है कि पिछले चुनावों में सपा को उनके द्वारा अधिकांश एकतरफा वोट देने के बावजूद भी यह पार्टी (सपा) यूपी व केन्द्र की सत्ता में भाजपा को सरकार बनाने से नहीं रोक पाती है तो इस पार्टी को बार-बार वोट देकर अपना वोट ख़राब क्यों किया जाये और इस मामले में अब वे अपरकास्ट में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज की तरह ही अपना रवैया काफी तेज़ी से बी.एस.पी. के पक्ष में बदल रहे हैं।
3. क्योंकि बी.एस.पी. यूपी में खासकर अपराध नियंत्रण व शान्ति-व्यवस्था के मामलों में क़ानून द्वारा क़ानून के राज के साथ ही व्यापक जनहित, जनकल्याण एवं विकास के मामलों में भी बेहतरीन आयरनलेडी राज यहाँ कई बार स्थापित करके दिखा चुकी है और जिसकी सर्वसमाज के हित व कल्याण में प्रदेश को सख़्त ज़रूरत भी है।
4. इसके साथ ही, सपा को यह भी जनता को ज़रूर बता देना चाहिये कि अब इनके ’पीडीए’ की असली वास्तविकता क्या है? क्योंकि चुनावी स्वार्थ में अब तक इन्होंने कभी ’पीडी’ को ’पिछड़ा, दलित’ बताया तो कभी ’पीडी’ को ’पण्डित’ बताया है और कभी अपने आपको ’अम्बेडकरवादी’ दर्शाने के चक्कर में बी.एस.पी. का ’नीला’ रंग वाला वस्त्र धारण कर तस्वीरें खिंचवाई है, किन्तु इसको लोगोें ने फौरन ही फेक अम्बेडकरवादी कहकर रिजेक्ट भी कर दिया।
5. जबकि इसके विपरीत, बी.एस.पी. सर्वसमाज हेतु ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त वाली अम्बेडकरवादी पार्टी है तथा सभी को रोटी-रोज़गार-युक्त आत्म-सम्मान व स्वाभिमान आदि का जीवन जीने की पक्षधर है। इसीलिये सर्वसमाज में बी.एस.पी. का अपना सम्मान है।
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आज मध्यप्रदेश के बालाघाट में कार्यकर्ता समीक्षा और शहीद आदिवासी राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह की साहदत दिवस पर बालाघाट में कार्यकर्ता बैठक.
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आज दिनांक 19-09-2026 को जनपद बाराबंकी, विधानसभा रामनगर के सेक्टर बिलाखिया में बहुजन समाज पार्टी द्वारा आयोजित महत्वपूर्ण सेक्टर स्तरीय कार्यकर्ता बैठक में शामिल हुआ।
बैठक में प्रमुख रूप से सेक्टर एवं बूथ स्तर के संगठन की समीक्षा की गई तथा आगामी संगठनात्मक कार्यों को लेकर आवश्यक चर्चा की गई।
#जयभीम #BSP #बाराबंकी
1. वैसे तो बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) द्वारा पूरे देश भर में व ख़ासकर उत्तर प्रदेश में युवाओं को तरजीह देने की नीति के तहत जेन-जी को लगभग पचास प्रतिशत तक पार्टी संगठन में भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया काफी लम्बे समय से जारी है, किन्तु अब यूपी, उत्तराखण्ड एवं पंजाब विधानसभा आमचुनाव आदि में भी सर्वसमाज के कर्मठ व युवा प्रतिभाओं को पार्टी उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने के निर्देश पर भी अमल जारी है, ताकि नई पीड़ी के ज़रिये देश में आपेक्षित अम्बेडकरवादी राजनीति एवं संवैधानिक मूल्यों का तेज़ी से विकास हो सके।
---और भारतीय संविधान का मानवतावादी, समतामूलक व सेक्युलर उद्देश्य ज़मीन पर लागू हो सके और सभी लोग सही से फल-फूल सकें, जैसाकि यूपी में बी.एस.पी. की चार बार रही सरकारों में क़ानून द्वारा क़ानून के आयरन लेडी राज के साथ ही जनहित, जनकल्याण एवं विकास आदि के मामलों में बेहतरीन सरकार होना साबित रहा है।
2. इस क्रम में, सड़क, बिजली पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सम्बंधी लोगों की अहम ज़रूरतों के साथ ही सरकारी नौकरी, रोज़गार, स्कूल, अस्पताल, शहरी व ग्रामीण विकास आदि के साथ ही ’जेन-जी’ व ’जेन-अल्फा’ की भी बुनियादी ज़रूरतों पर मज़बूत इच्छाशक्ति के साथ कार्य किया गया और जिस क्रम में अनेकों स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, छात्रावास, ट्रेनिंग सेन्टर व पार्क आदि की स्थापना की गयी और इन प्रयासों के कारण लोगों का मजबूरी का पलायन होना भी काफी रूका हैै, जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता है,
---किन्तु विरोधी पार्टियों के घोर जातिवादी रवैयों के कारण बी.एस.पी. की सरकार सन 2012 में पाँचवी बार यहाँ सत्ता में नहीं आ सकी, जिसका पछतावा सर्वसमाज के लोगों को अभी तक भी है, क्योंकि बी.एस.पी. सरकार के जाने के बाद से यहाँ पूरे प्रदेश में क़ानून द्वारा क़ानून का राज कायम नहीं होने से लोगों का जीवन दुखी ही नहीं बल्कि काफी त्रस्त भी बना हुआ है तथा विकास का सरकारी ढिंढोरा लोगों का पेट भी सही से नहीं भर पा रहा है।
3. ऐसे में पार्टी के लोगों को फिर से यह कहना है कि वे बी.एस.पी. का उम्मीदवार चुनते समय सर्वसमाज के अच्छे लोगों को ही चुनें तथा युवा वर्ग को भी प्राथमिकता दें जिसमें महिला व पुरुष दोनों होने चाहिये, तो यह उचित होगा।
4. इसके साथ ही, यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी. द्वारा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के जिस कारवाँ को लगातार मज़बूत करने व आगे बढ़ाकर सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करके ’अपना उद्धार स्वंय करने योग्य’ बनाने के मिशन की बात है तो इसकी सफलता हेतु किसी का भी रोड़ा बनना मुझे कतई भी स्वीकार नहीं है अर्थात मुझे केवल अपने ’बहुजन समाज परिवार’ के हित, कल्याण व उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने की ही रात-दिन चिन्ता रहती है, अपने किसी भी सगे भाई-बहन व उनके परिवार के युवा सदस्यों, तथा नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि को भी मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह मैंने भी, उन्हें पार्टी के कार्यों तक सीमित करके उन्हें सांसदी, विधायकी, मंत्री पद व अन्य किसी भी राजनैतिक लाभ आदि के पदों से हमेशा दूर रखा है।
5. इतना ही नहीं बल्कि मेरे अविवाहित होने के नाते मुझे मजबूरी में, अपने सभी सगे भाई-बहनों में से किसी एक को और अन्ततः सबसे छोटे भाई श्री आनन्द कुमार को अपने साथ रखने की भी ज़रूरत पड़ी है जो यह मेरी देखभाल करने के साथ-साथ मेरी पूरी निगरानी में पार्टी की अहम ज़िम्मेदारियों को भी काफी लम्बे समय से निभा रहे हैं, लेकिन इसका लाभ अब उनके परिवार के लोग भी उठायें तो यह पार्टी व मूवमेन्ट के हित में सही नहीं होगा।
6. इसीलिए आज मेरा अन्तिम यही फैसला व प्रतिज्ञा भी है कि इसके एवज में, अब इनके ख़ासकर किसी भी बेटे को बी.एस.पी. में किसी भी छोटे-बड़े पद पर बने रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जायेगा। यदि आगे चलकर मेरे साथ रहते हुये श्री आनन्द कुमार को मेरी मदद के लिए किसी और सदस्य की भी ज़रूरत पड़ती है तो फिर वह वर्तमान राजनैतिक हालात में केवल अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनन्द को, जो इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही है, उसे आगे चलकर उसकी मदद ले सकते हैं और फिर उसकी ईमानदारी, वफादारी व कार्य क्षमता आदि को देखकर पार्टी में उसे ज़रूरतानुसार अपनी ख़ुद की ज़िम्मेवारी भी सौंप सकते हैं।
---लेकिन वे अपने दोनों बेटों को व आगे चलकर उनके युवा बच्चो में से किसी को भी अपनी यह ज़िम्मेवारी नहीं सौपेंगे। साथ ही, यह भी कहना है कि अपनी बेटी के तैयार नहीं होने पर फिर वे पार्टी की आम सहमति से केवल पार्टी के दलित वर्ग में से ही अन्य किसी मिशनरी कार्यकर्ता को भी अपनी यह ज़िम्मेवारी सौंप सकते हैं अर्थात् अपने किसी भी बेटे को व उनके बच्चों के बड़े होने पर उन्हें भी यह ज़िम्मेवारी नहीं सौंपेंगे। यही वर्तमान में समय की जरुरत है व पार्टी के हित में भी है।
---ताकि मान्यवर श्री कांशीराम जी जिस प्रकार से ’परिवारवाद’ आदि के विरुद्ध कायम रहे, उनकी शिष्या होने के नाते मैं भी उसी प्रकार से पूरी तरह डटी हूँ , और जैसाकि मैंने काफी कुछ इस पर अमल करके भी दिखाया है और यदि मैं लड़की नहीं होती, तो मैं फिर मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह ही अपने भाई-बहिनों आदि में से किसी को भी अपने साथ नहीं रखती। लेकिन मैं लड़की होने की वजह से अपनी सुरक्षा सम्बन्धी, हर परेशानी से मुक्त होकर व पूरे मान-सम्मान के साथ पार्टी में आगे बढ़ती रहूँ तभी मुझे अपने सबसे छोटे भाई श्री आनन्द कुमार को मजबूरी में अपने साथ रखना पड़ा है। और अब इनके बच्चों के बड़े व शादीशुदा होने पर काफी कुछ मुझे भी झेलना पड़ रहा है, लेकिन फिर भी मैं किसी के भी मोह आदि के चक्कर में ना पड़कर पार्टी को कोई भी नुकसान नहीं पहुचने दूँगी।
7. इसी प्रकार पार्टी संगठन में व आगे सरकार बनने पर भी, चाहे वह कोई भी हो, केवल सम्बन्धित उसी एक व्यक्ति को ही मौक़ा दिया जायेगा, लेकिन उसकी आड़ में उसके परिवार के अन्य किसी भी सदस्य को कोई भी लाभ आदि नहीं दिया जायेगा, ताकि बी.एस.पी. अब आगे परिवारवाद से मुक्त रहे तथा सर्वसमाज में से ज़्यादा से ज़्यादा लोग ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ आन्दोलन के सहभागी बन सकें, जो कि अम्बेडकरवादी राजनीति के लिये बहुत ज़रूरी है।
8. इसके साथ ही बी.एस.पी. के लोगों से यह भी कहना है कि वे बी.एस.पी. विरोधी पार्टियों/संगठनों तथा जातिवादी मीडिया व सोशल मीडिया आदि के भी विषैले एवं साज़िशी तथा प्रायोजित व पेड paid प्रोपेगण्डा आदि से ज़रूर सावधान रहें क्योंकि इनका मक़सद केवल साम, दाम, दण्ड, भेद आदि सभी प्रकार के घिनौने हथकण्डे अपनाकर बी.एस.पी. को यूपी में सरकार बनाने से रोकना है, जिसे किसी भी हाल में सफल नहीं होने देना है और इन्हें पूरे तन, मन, धन से लगातार अपने अम्बेडकरवादी मिशन में लगे रहना है, इसी में ही सबकी भलाई है यानी कि व्यापक देश व जनहित निहित है।
9. अन्त में यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया आदि में यह भी प्रचारित किया जा रहा है कि अनुशासनहीनता अपनाने व पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने आदि के कारण बी.एस.पी से निष्कासित लोगों को वापस लिया जायेगा, यह पूरी तरह से ग़लत एवं मिथ्या प्रचार है यानी कि यह फेक न्यूज़ है अर्थात ऐसे लोगों को बी.एस.पी में कतई भी वापस नहीं लियाा जायेगा।
1. यूपी के ज़िला रामपुर में समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद आज़म ख़ान के पारिवारिक ट्रस्ट द्वारा स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित यूनिवर्सिटी की 38 शिक्षण इमारतों को, उसका स्वीकृत नक्शा आदि के अभाव में, ध्वस्त करने की रामपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई पर अब रोक लगाने का फैसला उचित व इसका स्वागत।
2. वैसे केवल जौहर विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में अगर अन्य और भी शिक्षण संस्थायें हैं जो अपने निर्माण आदि में सरकारी नियमों आदि का सही से अनुपालन नहीं कर पाये हैं, तो उन पर भी बुलडोजर चलाकर तोड़ने की सख़्ती करने के बजाय, सरकार को उन सबको सही व नियमित कराने के सम्बंध में ज़रूरी कार्रवाई करने की नीति अपनानी चाहिये, ताकि वहाँ शिक्षा हासिल करने वाले सभी छात्र-छात्राओं का जीवन किसी भी प्रकार से प्रभावित ना होने पाये। उम्मीद है कि सरकार बी.एस.पी. की इस जनहितैषी सलाह पर ज़रूर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
1. देश में पेपर लीक के जघन्य अपराध व उसके कारण नौजवान छात्र-छात्राओं का उनका भविष्य अंधकार होता देख अनेकों द्वारा आत्महत्या जैसी अति-दुखद घटनाओं की रोकथाम की उपाय के रूप में संसद ने एक बार फिर से एक और सख़्त सज़ा के प्रावधान वाला क़ानून बनाने वाला बिल लोकसभा ने आज अन्ततः पास कर दिया है, लेकिन क्या केवल इससे समस्या का समाधान हो जायेगा, इसकी चिन्ता लोगों में बरक़रार है, क्योंकि लोगों को यह आपाधापी/जल्दबाज़ी में लिया गया एक और क़दम ज़्यादा लगता है, जबकि अन्य और भी उपायों को तत्काल सख़्ती से लागू करना ज़रूरी है।
2. वास्तव में यह कदम भी पेपर लीक होने के बाद सख़्त सज़ा का प्रावधान करता है, जबकि पेपर लीक का पूरा मामला इस महा अपराध को होने देने से पहले ही इसे रोकने का है, अर्थात् अपराध नियंत्रण ज़्यादा महत्वपूर्ण है, जो कि अधिकतर मामलों में यहाँ कहीं भी प्रभावी होता हुआ नज़र नहीं आता है, और यह पेपर लीक के पिछले क़ानून के निष्प्रभावी होने से भी स्पष्ट है।
3. हकीकत में अन्य अपराधों की तरह पेपर लीक जैसे जघन्य अपराध के नियंत्रण के लिये सख़्त से सख़्त कानून से अधिक इसकी रोकथाम हेतु बेहतर से बेहतर उपाय करने की ज़रूरत है, जिसके तहत् शिक्षा के लिये शोषणकारी ऋण को सस्ता करके उसे कल्याणकारी बनाना, सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा आदि सहित पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की ज़रूरत है, ताकि ग़रीबों, उपेक्षितों, शोषितों व अन्य मेहनतकश लोगों के बच्चे भी समता व समानता के साथ आगे बढ़ सकें, जो परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के कल्याणकारी संविधान का उद्देश्य तो है किन्तु इसका हर स्तर पर वर्तमान में घोर अभाव है।
4. दरअसल अमीर परिवारों के लोग तो धनबल के आधार पर अपनी मनमानी व मनचाही पढ़ाई आदि प्राप्त कर लेते हैं, किन्तु करोड़ों ग़रीब परिवारों के बच्चे-बच्चियों का क्या जो होनहार होने के बावजूद अपना जीवन संवार नहीं पाते हैं।
5. वैसे भी पेपर लीक शिक्षा व्यवस्था में बिगाड़ का केवल एक उदाहरण है, जबकि शिक्षा व्यवस्था में बिगाड़ की जड़ काफी गहरी व अति-गंभीर है। इसके निदान के लिये दृढ़ इच्छाशक्ति व नेक नीयत के साथ अनवरत ईमानदार प्रयास की ज़रूरत है, तभी कुछ मुट्ठी भर लोगों के बजाय करीब 140 करोड़ लोगों का यह देश आगे बढ़ पायेगा।
6. लेकिन यह अति-दुखद है कि पेपर लीक रोकथाम सम्बंधी बिल पर भी बहस के दौरान अधिकतर पार्टियाँ दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठ पायीं अर्थात् संसद में चर्चा के दौरान पूरी गंभीरता कम व एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप ही ज़्यादा रहा। ऐसे में क्या नया बनने वाला यह पेपर लीक निरोधक क़ानून कितना सार्थक होगा इससे लोगों का शंकित होना उचित है।
7. ऐसे में मूल प्रश्न यही है कि क़ानून पर क़ानून क्या इस जटिल समस्या का सही समाधान कर पायेगा? सरकार इसके अलावा भी अन्य बेहतर उपायों पर भी ज़रूर विचार करे तो यह देश के उज्जवल भविष्य के लिये बेहतर होगा।
1. जैसाकि मीडिया की ख़बरों से सर्वविदित है कि यूपी की वर्तमान सरकार ने, बी.एस.पी. सरकार द्वारा भदोही को राज्य मुख्यालय का दर्जा देते हुये संत रविदास नगर के नाम से नया ज़िला बनाया था और जिसे समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार ने अपनी संकीर्ण जातिवादी मानसिकता के तहत् बदल दिया था, इसे अब फिर से संत रविदास नगर ज़िला स्थापित कर दिया है, जिसके लिये पार्टी राज्य सरकार की आभारी है।
2. वास्तव में बी.एस.पी. की यूपी में रही चारों सरकारों में प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने व आम जनहित को बेहतर बनाने के मद्देनज़र अनेकों नये ज़िले, तहसील, विकास खण्ड तथा पुलिस ज़ोन व रेंज आदि बनाये गये और उनमें से कई ज़िलों के नाम दलित व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) में समय-समय में जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के नाम पर रखे गये और इसी क्रम में संत रविदास नगर व छत्रपति शाहूजी महाराज नगर व भीम नगर आदि अनेकों नये ज़िले बने, जिनके नाम सपा सरकार ने केवल अपनी जातिवादी सोच, द्वेष व संकीर्ण राजनीति के कारण बदल दिये, जिसको लोग कभी भी भुला नहीं पायेंगे।
3. इतना ही नहीं बल्कि ब्रज क्षेत्र में कासगंज इलाके़ के समुचित विकास हेतु कासंगज को ज़िला मुख्यालय का दर्जा देते हुये मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम पर नया ज़िला बनाया गया, जिसका भी नाम सपा सरकार ने अपने पीडीए-पिछड़ा दलित व अक्लि़यत विरोधी रवैयों के कारण बदल दिया।
4. ऐसे में यूपी सरकार संत रविदास नगर की तरह ही, मान्यवर श्री कांशीराम जी व अन्य महापुरुषों के नाम पर बनाये गये नये ज़िलों के भी असली नाम बहाल कर दे तो यह उचित होगा और यह कार्य अगर मान्यवर श्री कांशीराम जी की दिनांक 9 अक्तूबर के परिनिर्वाण दिवस से पहले कर दिया जाये या उसी दिन ही कर दिया जाये तो बी.एस.पी. इसके लिये आभारी रहेगी।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव अब बहुत नज़दीक आ रहा है, जिसकी तैयारी हेतु मेरे खुद के द्वारा प्रदेश की पिछली कई राज्य स्तरीय बड़ी बैठकें लखनऊ पार्टी प्रदेश कार्यालय में ली गई हैं और आगे भी ज़रूरत के अनुसार ली जायेंगी, जिसमें पार्टी के उम्मीद्वार तय करने के लिए पार्टी के ख़ासकर प्रदेश व मण्डल स्तरीय पदाधिकारियों को ज़रूरी दिशा-निर्देश दिये गये हैं, जिसके तहत् ही अभी तक मेरे द्वारा उनका इन्टरव्यू आदि लेकर लखनऊ में लगभग 2 दर्जन से ज़्यादा उम्मीदवार तय/फाइनल कर दिये गये हैं और आगे भी सभी सीटों पर मेरे द्वारा ही उम्मीदवार तय किये जायेंगे, जिसके बारे में अब पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक श्री आकाश आनन्द को लेकर क़िस्म-क़िस्म के भ्रम फैलाये जा रहे हैं जिसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है।
2. जबकि अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि पूरे देश में जहाँ-जहाँ भी समय-समय पर विधानसभा के आमचुनाव होते हैं, या देश में लोकसभा के भी आमचुनाव होते हैं तो वहाँ भी उम्मीदवारों को अन्तिम रूप मेरे द्वारा ही दिया जाता है।
3. यहाँ यह भी अवगत कराना है कि यू.पी. की जिन विधानसभा की सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार तय कर दिये गये हैं तो वहाँ मेरी अनुमति से ही पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा छोटी-बड़ी जनसभायें करके उनका ऐलान भी किया जा रहा है, जिसके तहत् ही कुछ सीटों के उम्मीदवार का ऐलान श्री आकाश आनन्द भी पार्टी की जनसभा करके करेंगे।
4. हालाँकि इससे पहले देश के कई राज्यों में अभी हाल ही में विधानसभा के आमचुनाव हुये हैं जहाँ मेरे दिशा-निर्देशन में ही चुनावी जनसभा लेने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक श्री आकाश आनन्द को भेजा गया और पिछले लगभग एक वर्ष से इनकी पूरे देश में पार्टी संगठन की समीक्षा बैठकें व जनसभा आदि करने के लिए भी इनको भेजा जा रहा है और वे भी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अपनी ज़िम्मेवारी को निभा रहे हैं।
5. इसलिए उत्तर प्रदेश में भी इसी क्रम में इनकी भी कुछ सीटों पर पार्टी के तय किये गये उम्मीदवारों के ऐलान हेतु जनसभायें हो रही हैं। जबकि इससे पहले यू.पी. की राजधानी लखनऊ में दिनांक 9 अक्तूबर सन् 2025 को मान्यवर श्री कांशीराम जी की पुण्यतिथि पर पार्टी की ऐतिहासिक महारैली भी हुई, जिसमें श्री आकाश आनन्द को बोलने का मौक़ा दिया गया। साथ ही, इसके पूर्व यहाँ लोकसभा के हुये आमचुनाव में भी इनको पूरे प्रदेश में व देश के अन्य राज्यों में भी पार्टी की चुनावी जनसभायें लेने के लिए भेजा गया था, यह सब सोशल मीडिया आदि पर मौजूद है।
6. जबकि यह सब पार्टी की रूटीन प्रक्रिया के तहत् हो रहा है। इसका श्री आकाश आनन्द के क़द को बढ़ाने व कम करने आदि से कोई लेना देना नहीं है और ना ही पार्टी के उम्मीद्वार भी तय करने से कोई लेना देना है। यह भी पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की तरह ही पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के दिशा-निर्देशन में यू.पी. में कुछ स्थानों पर पार्टी के उम्मीद्वार के ऐलान के लिये जनसभा कर रहे हैं। लेकिन फिर भी इनके बारे में सोशल मीडिया आदि पर आए दिन अनाप-सनाप बातें करना यह ठीक नहीं है। पार्टी के लोग ऐसे सभी शरारती व जातिवादी तत्वों से हमेशा सावधान रहें।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि श्री अशोक सिद्धार्थ, पूर्व सांसद को महाराष्ट्र के चुनाव में खा़सकर पार्टी टिकट के बंटवारे को लेकर बी.एस.पी. महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष आदि के साथ सही से तालमेल करके नहीं चलने की वजह से अनुशासनहीनता व दिशा-निर्देश का उल्लंघन करने पर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था तथा उन्हें दोबारा पार्टी में इस शर्त के साथ वापस लिया गया था कि वे दोबारा ऐसी ग़लती नहीं करेंगे और साथ ही उन्हें उत्तर प्रदेश में कहीं पर भी नहीं, बल्कि केवल दूसरे राज्यों में ही पार्टी के जनाधार को बढ़ाने की ज़िम्मेदारी दी जायेगी।
2. लेकिन उसके बाद जिन भी राज्यों की ज़िम्मेदारी बी.एस.पी. कोआर्डिनेटर के रूप में उन्हें दी गयी वहाँ इन्होंने अपनी ज़िम्मेदारी को सही से नहीं निभाया। केवल कर्नाटक ही नहीं बल्कि उड़ीसा व पश्चिम बंगाल इन राज्यों से भी इनकी अनुशासनहीनता अर्थात् पार्टी के दिशा-निर्देश के उल्लंघन की ख़बरें लगातार आते रहने के फलस्वरूप इनको बार-बार चेतावनी देने के बावजूद भी इनमें सुधार नहीं आने की वजह से कल श्री अशोक सिद्धार्थ को पार्टी की सभी ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था।
3. लेकिन इसके बाद यूपी में इनके वापस लौटने की ख़बरें जानबूझकर पार्टी में भ्रम की स्थिति फैलाकर आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव के सघन अभियान को प्रभावित करने का षडयंत्र है। अतः पार्टी व मूवमेन्ट के हित में श्री अशोक सिद्धार्थ को आज तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है और अब इन्हें पार्टी में आगे कतई भी वापिस नहीं लिया जायेगा।
4. इसी प्रकार श्री रणधीर सिंह बेनीवाल (निवासी ज़िला सहारनपुर) को बी.एस.पी. कोआर्डिनेटर के रूप में पंजाब सहित हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कशमीर की भी कुछ ज़िम्मेदारी दी गयी थी। उनके विरुद्ध़ भी अनुशासनहीनता व पार्टी दिशा-निर्देश का उल्लंघन करने की ख़बरें लगातार आती रही हैं और अब श्री रणधीर सिंह बेनीवाल को भी पार्टी व मूवमेन्ट के हित के मद्देनज़र आज इनको भी तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
5. यहाँ यह भी अवगत कराना है कि कल पार्टी संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर किये गये फेरबदल में श्री रामजी गौतम, राज्यसभा सांसद को अन्य राज्यों के साथ ही पंजाब स्टेट का भी पुनः प्रभारी बनाया गया है जो पंजाब के आगामी विधानसभा आमचुनाव तक ही नहीं बल्कि आगामी लोकसभा आमचुनाव तक भी अपनी इस ज़िम्मेदारी को निभाते रहेंगे।
6. इतना ही नहीं बल्कि बी.एस.पी. नेतृत्व का वर्तमान में यह नीतिगत फैसला है कि यूपी निवासी जो भी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी व कोआर्डिनेटर आदि के रूप में यूपी के बाहर के राज्यों की अपनी ज़िम्मेदारी को निभा रहे हैं, उनमें से किसी को भी यूपी में पार्टी की किसी भी ज़िम्मेदारी पर नहीं लगाया जायेगा।
7. साथ ही, पार्टी के लोगों को ख़ास तौर से यह अपील है कि वे ऐसे सभी शरारती व षडयंत्रकारी तत्वों से पूरी तरह से ज़रूर सावधान रहें जो उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की अपनी बी.एस.पी. सरकार बनाने के पूरे ज़िद के साथ लगे अभियान को किसी ना किसी बहाने से ध्यान भटकाने अर्थात् हानि पहुँचाने का प्रयास करते रहते हैं तथा मीडिया से भी विशेष अपील है कि वे ग़रीबों, दलितों, शोषितों, उपेक्षितों आदि की अम्बेडकरवादी पार्टी बी.एस.पी. के विरुद्ध, विरोधी पार्टियों के षडयंत्र का हथियार बनने से अपने आपको ज़रूर बचायें अर्थात् मिथ्या एवं ग़लत तथ्यों को प्रचारित ना करें।
1. उत्तर प्रदेश विधानमण्डल का मानसून सत्र आज दिनांक 3 अगस्त से शुरू हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक़ कुल मिलाकर चार कार्य दिवस वाले इस सत्र में अगले दिन दिनांक 4 अगस्त को सरकारी ख़र्चे सम्बंधी अनुपूरक बजट राज्य सरकार विधानसभा में पेश करेगी।
2. हालाँकि यह सत्र अति-अल्पकालीन है, फिर भी लोगों की यही अपेक्षा है कि यूपी विधानमण्डल का यह सत्र, संसद के वर्तमान सत्र की तरह ही, देश व जनहित, जनकल्याण एवं जव्लन्त जन समस्याओं के प्रति समर्पित होने के बजाय, संकीर्ण दलगत राजनीति, खींचतान, आरोप-प्रत्यारोप व हंगामा आदि की पूरी तरह से भेंट ना चढ़ जाये।
3. वैसे इस अल्पकालीन सत्र को लेकर लोगों की यह चिन्ता भी स्वाभाविक ही है कि अफ़सरशाही (ब्यूरोक्रेसी) को संविधान के शपथ के प्रति जवाबदेह एवं जनहित, जनकल्याण को लेकर उत्तरदायी बनाये रखने के लिये ज़रूरी है कि विधायिका का संवैधानिक प्रभाव किसी भी प्रकार से कम ना होने पाये।
4. इसके लिये यूपी के विधानमण्डल का लगातार घटते सत्र के साथ-साथ विधानसभा का इतना संक्षिप्त सत्र क्या अपना वास्तविक उद्देश्य हासिल कर पायेगा या फिर केवल औपचारिकता ही रह जायेगी?
5. देश के संविधान व यहाँ लोकतंत्र की मज़बूती तथा अफसरशाही पर लगाम के लिये विधायिका की मज़बूती अति-महत्वपूर्ण और इसके लिये सरकार व विपक्ष दोनों का गंभीर संसदीय आचरण ज़रूरी।
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के कर्मठ, ईमानदार व पूरी तरह से वफादार बलिया की रसड़ा सीट से लोकप्रिय विधायक श्री उमाशंकर सिंह की आज शाम लम्बी बीमारी की वजह से इलाज के दौरान देहान्त हो जाने की ख़बर अति-दुखद। उनके परिवार तथा उनके सभी चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी शोक संवेदना। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा की जितनी भी तारीफ की जाये वह कम है। उनका पूरा परिवार बी.एस.पी. परिवार की तरह है तथा उनके परिवार के सभी लोग मुझे बड़ी बहन की तरह ही पूरा आदर-सम्मान देते हैं।
उनके पुत्र से लगातार सम्पर्क बने रहने के दौरान ही आज शाम उनके देहान्त की ख़बर उनके पुत्र से ही मिली। इस दुख की घड़ी में मैं व पूरी पार्टी उनके व उनके परिवार के साथ है तथा उन्हें किसी भी प्रकार से हिम्मत नहीं हारना है बल्कि इस परिस्थिति का सामना करते हुये आगे बढ़ना है। कुदरत उन सभी लोगों को इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।
1. गुजरात राज्य के ज़िला गिर सोमनाथ के ऊना में सन् 2016 में हुये दलितों पर जघन्य अन्याय-अत्याचार काण्ड के लगभग सभी अभियुक्तों को मार्च में स्थानीय कोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर न्याय पाने के लिये पीड़ित दलित परिवारों को वित्तीय आदि का भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी विचलित करने वाली कड़वी सच्चाई से ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के लोगों में भारी चिन्ता व्याप्त है।
2. इसको लेकर मेरी चिन्ता का विशेष कारण यह भी है कि इस काण्ड के पीड़ितों से मिलने मैं खु़द भी वहाँ गयी थी और वहाँ सच्चाई का पूरा पता करने के बाद राज्य सरकार से सभी दोषियों के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई करने की माँग की थी, किन्तु देश भर में इसके ख़िलाफ रोष व आक्रोश आदि होने के बावजूद 40 में से 35 आरोपी के मार्च महीने में बरी हो जाने की ख़बर कुछ और नहीं बल्कि दलितों के प्रति सरकारी द्वेष, उनके हित व सुरक्षा के प्रति लापरवाही व उदासीनता आदि का ही परिणाम ज़्यादा लगता है।
3. वैसे अभी भी मौक़ा है जब गुजरात सरकार अपनी इस ग़लती में सुधार करते हुये इस मामले की हाईकोर्ट में उचित पैरवी करके सभी दोषियों को सख़्त सज़ा दिलवाये ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके और दूसरों को सबक।
4. साथ ही, राज्य सरकार पीड़ित परिवार वालों के संतोष के मुताबिक वकील सरकारी ख़र्च पर उसी तरह मुहैया कराये, जिस प्रकार बी.एस.पी. की यूपी में मेरी रही सरकार ने ग़रीबों के लिये फ्री में क़ानूनी सहायता का क़ानूनी प्रावधान किया था।































