सदियों पुराने गड़े मुर्दे उखाड़कर आज के नौजवानों से नफरत करने की यह घटिया मानसिकता ही इस देश की प्रतिभाओं को पलायन करने पर मजबूर करती है।
एकलव्य का नाम लेकर राजनीति करने वालों, कभी उस सामान्य वर्ग के किसान और मजदूर बाप का दर्द भी देखा है, जिसके बेटे का अंगूठा नहीं, बल्कि दिन-रात पढ़कर 95% लाने के बाद पूरा का पूरा भविष्य ही सिस्टम काट देता है?
हम किसी की भीख पर नहीं पलते, न किसी का हक मांग रहे हैं। जब अपने हक और संविधान प्रदत्त बराबरी की आवाज़ उठाई जाती है, तो पेट में दर्द केवल उन लोगों को होता है जिनकी पूरी दुकान सवर्णों की लाचारी और नफरत के कारोबार पर टिकी है।
#UgcRollback
#general_act
Replying to @Challenge2Norms
bakaiti करने से सच्चाई नही बदल जाएगी ? एकलव्य का अंगूठा काटने कला कभी भी सो नही सकता।वह निरंतर जागकर दूसरे एकलव्य का3 अंगूठा कटता है
महिपाल मकराना 🦅FANCLUB retweeted
सदियों पुराने गड़े मुर्दे उखाड़कर आज के नौजवानों से नफरत करने की यह घटिया मानसिकता ही इस देश की प्रतिभाओं को पलायन करने पर मजबूर करती है।
एकलव्य का नाम लेकर राजनीति करने वालों, कभी उस सामान्य वर्ग के किसान और मजदूर बाप का दर्द भी देखा है, जिसके बेटे का अंगूठा नहीं, बल्कि दिन-रात पढ़कर 95% लाने के बाद पूरा का पूरा भविष्य ही सिस्टम काट देता है?
हम किसी की भीख पर नहीं पलते, न किसी का हक मांग रहे हैं। जब अपने हक और संविधान प्रदत्त बराबरी की आवाज़ उठाई जाती है, तो पेट में दर्द केवल उन लोगों को होता है जिनकी पूरी दुकान सवर्णों की लाचारी और नफरत के कारोबार पर टिकी है।
#UgcRollback
#general_act
Replying to @Challenge2Norms
bakaiti करने से सच्चाई नही बदल जाएगी ? एकलव्य का अंगूठा काटने कला कभी भी सो नही सकता।वह निरंतर जागकर दूसरे एकलव्य का3 अंगूठा कटता है
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Replying to @Challenge2Norms @mahipalmakrana_
महिपाल मकराना 🦅FANCLUB retweeted
हमारी पदयात्रा से पेट में दर्द केवल उन लोगों को हो रहा है, जिनकी राजनीतिक दुकानें सवर्णों की खामोशी और लाचारी पर चलती थीं!
जब दूसरे वर्ग सड़कों पर उतरकर व्यवस्था को बंधक बना लेते हैं, तब यही तथाकथित बुद्धिजीवी और राजनीतिक दलाल इसे 'लोकतंत्र की खूबसूरती' और 'अधिकारों की अभिव्यक्ति' बताते हैं। लेकिन जैसे ही सवर्ण समाज हाथ में संविधान लेकर, शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक और अनुच्छेद 14 की रक्षा के लिए पैदल चलने की बात करता है, इनके हलक सूख जाते हैं और इन्हें 'कानून-व्यवस्था' व 'सामाजिक सौहार्द' का ज्ञान याद आने लगता है ।
तुम्हारा असली खौफ यह है कि अगर दशकों से बंटा हुआ सवर्ण समाज एक झंडे तले खड़ा हो गया, तो तुम्हारी दशकों पुरानी बंधुआ वोट-बैंक वाली दलाली हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
जो लोग अपने राजनीतिक आकाओं की परिक्रमा में इतने अंधे हो चुके हैं कि उन्हें अपने ही बच्चों के भविष्य पर लटकी तलवार नहीं दिखती ,वे हमें ज्ञान न दें। अगर तुम्हारे भीतर धूप में चलने, मुकदमों का सामना करने और व्यवस्था की आंखों में आंखें डालने का माद्दा नहीं है, तो अपने एसी कमरों में मुंह बंद करके बैठो। जो समाज के लिए लड़ नहीं सकते, उन्हें लड़ने वालों की राह में भौंकने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
हमने कभी किसी का हक नहीं छीना, लेकिन अब अपने हिस्से का संविधान प्रदत्त हक भी किसी की झोली में नहीं छोड़ेंगे। न तुम्हारे झूठे नैरेटिव से यह कारवां रुकेगा, न तुम्हारी गीदड़ भभकियों से।
11 नवम्बर से मध्य प्रदेश की सड़कों पर जब नौजवानों के कदमों की थाप गूंजेगी, तो हुकूमत के महलों तक यह संदेश साफ पहुंचेगा कि स्वाभिमान का यह सैलाब अब किसी के रोके नहीं रुकने वाला।
जिसको विरोध करना है अपनी पूरी ताकत लगा ले, सवर्ण न्याय यात्रा होकर रहेगी, और इतिहास गवाह बनेगा कि जब-जब कौम जागी है, व्यवस्था को झुकना ही पड़ा है!
@mahipalmakrana_
#UGCRollBack
#general_act
हमारी पदयात्रा से पेट में दर्द केवल उन लोगों को हो रहा है, जिनकी राजनीतिक दुकानें सवर्णों की खामोशी और लाचारी पर चलती थीं!
जब दूसरे वर्ग सड़कों पर उतरकर व्यवस्था को बंधक बना लेते हैं, तब यही तथाकथित बुद्धिजीवी और राजनीतिक दलाल इसे 'लोकतंत्र की खूबसूरती' और 'अधिकारों की अभिव्यक्ति' बताते हैं। लेकिन जैसे ही सवर्ण समाज हाथ में संविधान लेकर, शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक और अनुच्छेद 14 की रक्षा के लिए पैदल चलने की बात करता है, इनके हलक सूख जाते हैं और इन्हें 'कानून-व्यवस्था' व 'सामाजिक सौहार्द' का ज्ञान याद आने लगता है ।
तुम्हारा असली खौफ यह है कि अगर दशकों से बंटा हुआ सवर्ण समाज एक झंडे तले खड़ा हो गया, तो तुम्हारी दशकों पुरानी बंधुआ वोट-बैंक वाली दलाली हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
जो लोग अपने राजनीतिक आकाओं की परिक्रमा में इतने अंधे हो चुके हैं कि उन्हें अपने ही बच्चों के भविष्य पर लटकी तलवार नहीं दिखती ,वे हमें ज्ञान न दें। अगर तुम्हारे भीतर धूप में चलने, मुकदमों का सामना करने और व्यवस्था की आंखों में आंखें डालने का माद्दा नहीं है, तो अपने एसी कमरों में मुंह बंद करके बैठो। जो समाज के लिए लड़ नहीं सकते, उन्हें लड़ने वालों की राह में भौंकने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
हमने कभी किसी का हक नहीं छीना, लेकिन अब अपने हिस्से का संविधान प्रदत्त हक भी किसी की झोली में नहीं छोड़ेंगे। न तुम्हारे झूठे नैरेटिव से यह कारवां रुकेगा, न तुम्हारी गीदड़ भभकियों से।
11 नवम्बर से मध्य प्रदेश की सड़कों पर जब नौजवानों के कदमों की थाप गूंजेगी, तो हुकूमत के महलों तक यह संदेश साफ पहुंचेगा कि स्वाभिमान का यह सैलाब अब किसी के रोके नहीं रुकने वाला।
जिसको विरोध करना है अपनी पूरी ताकत लगा ले, सवर्ण न्याय यात्रा होकर रहेगी, और इतिहास गवाह बनेगा कि जब-जब कौम जागी है, व्यवस्था को झुकना ही पड़ा है!
@mahipalmakrana_
#UGCRollBack
#general_act
मैं सवर्ण हूं
सोया हुआ हूं।
#UGCROLLBACK
#general_act
महिपाल मकराना 🦅FANCLUB retweeted
8 में एक योद्धा जीता है नाम है संजीव कुमार
जिन्होंने डंके की चोट पर ugc विरोध किया था
Ews के लिए आवाज उठाया था.
वो एकमात्र MLA जिन्होंने बिहार विधानसभा में 65% आरक्षण का विरोध किया
बाँकी सब गिनती के है, कोई काम का नही है।
#UGCROLLBACK
8 में एक योद्धा जीता है नाम है संजीव कुमार
जिन्होंने डंके की चोट पर ugc विरोध किया था
Ews के लिए आवाज उठाया था.
वो एकमात्र MLA जिन्होंने बिहार विधानसभा में 65% आरक्षण का विरोध किया
बाँकी सब गिनती के है, कोई काम का नही है।
#UGCROLLBACK


