This is the official twitter account of the Department of #Environment, #Forest & #Climate Change, Govt. of #Bihar. #JalJeevanHariyali

Patna, India
Joined June 2018
क्या आप इस तस्वीर में दिखाई दे रही जगह को पहचान पाए? अपना जवाब हमें कमेंट में जरूर बताएं। @mla_hayaghat @moefcc #GuessThePlace #biharecotourism #biharexplore #IncredibleBihar
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कुसुम (Schleichera oleosa) का वृक्ष अपनी घनी छाया और उपयोगिता के लिए जाना जाता है। इसके फल, बीज और छाल विभिन्न कार्यों में उपयोगी हैं। इस वृक्ष की एक प्रमुख विशेषता लाख उत्पादन की है। इसकी शाखाओं पर पनपने वाले लाख के कीटों से प्राकृतिक लाख प्राप्त होती है, जिसका उपयोग चूड़ियाँ, सजावटी वस्तुएँ और पॉलिश बनाने में किया जाता है। @mla_hayaghat @moefcc #KusumTree #SchleicheraOleosa #Ecofriendly #savenature #SustainableForestry
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वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष में लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या। प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों को करीब से जानने के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रहा है। पिछले तीन वर्षों में पर्यटकों की संख्या में हुई वृद्धि, इस क्षेत्र के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि को दर्शाती है। आप भी अपनी यात्रा में वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व के रोमांच को शामिल करें साथ ही, वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएँ। @mla_hayaghat @moefcc #ValmikiTigerReserve #tigerreserves #WildlifeConservation #NatureTourism #explorebihar
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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी का रोमांच, अब चार नए रूट के साथ! वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है। इस बार पर्यटकों के लिए चार नए सफारी रूट शुरू किए गए हैं। अब जंगल सफारी के दौरान जंगल की खूबसूरती देखने के साथ गिद्ध संरक्षण केंद्र घूमने का मौका भी मिलेगा। पर्यटकों की सुविधा के लिए पटना से वाल्मीकिनगर और मंगुराहा के लिए एक, दो और तीन दिन के टूर पैकेज भी उपलब्ध हैं। इनमें आने-जाने, खाने, ठहरने और घूमने की सुविधाएं शामिल हैं। तो आइए, इस पर्यटन सत्र में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व घूमने का प्लान बनाएं और बिहार के खूबसूरत जंगलों को करीब से जानें! @mla_hayaghat @moefcc #ValmikiTigerReserve #JungleSafari #BiharTourism #WildlifeTourism #ExploreBihar #EcoTourism
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कोयल पक्षी अपना घोंसला स्वयं नहीं बनाती, बल्कि प्रायः कौवे के घोंसले में अंडे देती है। इसके बाद कौवा अंडों को सेने तथा बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी निभाता है। पक्षियों के व्यवहार से जुड़ा यह तथ्य प्रकृति की विविधता और जैविक प्रक्रियाओं की विशिष्टता को दर्शाता है। आइए, प्रकृति की अनमोल विरासत को जानें, समझें और उसके संरक्षण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। @mla_hayaghat @moefcc #koel #Birdsconservation #birdfacts #WildlifeAwareness #wildlifeconservation
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नीले फूलों से प्रकृति को खूबसूरत बनाता जकरंडा (Jacaranda mimosifolia) जकरंडा अपने आकर्षक नीले फूलों और सुंदर पत्तियों के लिए जाना जाता है। सड़कों के किनारे इसकी मौजूदगी प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाती है। इसकी खास पत्तियाँ और कलात्मक वस्तुओं के निर्माण में उपयोग होने वाली लकड़ी इसे एक विशिष्ट वृक्ष बनाती है। @mla_hayaghat @moefcc df4D #jacarandatree #Jacarandamimosifolia #TreeConservation #FloralBeauty
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खेतों और आर्द्रभूमियों की खूबसूरती बढ़ाने वाला सारस(Antigone Antigone), अपनी लंबी कद-काठी और आकर्षक रूप के लिए जाना जाता है। आर्द्रभूमियों और प्राकृतिक आवासों का संरक्षण सारस जैसे पक्षियों के सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। आइए, इनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने में अपनी भूमिका निभाएं। प्रकृति का संरक्षण, जैव-विविधता का संवर्धन। @mla_hayaghat @moefcc #SarusCrane #Antigone #wetlandbirds #birdconservation #BirdFacts
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बिहार के जमुई जिले में स्थित नागी-नकटी पक्षी अभयारण्य एक ऐसी आर्द्रभूमि है, जो सर्दियाँ शुरू होते ही हजारों प्रवासी पक्षियों का बसेरा बन जाती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे रामसर स्थल की मान्यता प्राप्त है, जो इसे और भी खास बनाता है। यदि आप प्रकृति, शांति और परिंदों के कलरव के बीच समय बिताना चाहते हैं, तो अपनी अगली यात्रा में नागी-नकटी के प्राकृतिक नजारों का दीदार जरूर करें। @mla_hayaghat @moefcc #birdsanctuary #wetlandconservation #RamsarSite #birdconservation #ecotourism #biodiversity
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हरगिला (Leptoptilos dubius) हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण पक्षी है। यह मुख्य रूप से मृत जीवों और मछलियों को खाता है। इस कारण से इसे पर्यावरण का कुशल सफाईकर्मी भी माना जाता है, जो बीमारियों को फैलने से रोकता है। इसका नाम हरगिला संस्कृत के शब्द 'हड़' (हड्डी) और 'गिला' (निगलना) से आया है, जिसका अर्थ है हड्डी निगलने वाला। यह पक्षी बड़े जीवों की हड्डियों को भी आसानी से पचा सकता है। हरगिला भारत में मुख्य रूप से असम और बिहार के आद्रभूमियों में पाया जाता है। @mla_hayaghat @moefcc #Hargila #greateradjutant #birdconservation #wildlifeconservation #biodiversity
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पटना जू की सैर, साक्षी कुमारी के अनुभव के साथ! पटना जू घूमने आईं साक्षी कुमारी से जानिए, कैसा रहा उनका अनुभव और वन्यजीवों को करीब से देखने का एहसास। आप भी आइए पटना जू और प्रकृति व वन्यजीवों की खूबसूरत दुनिया को करीब से जानिए। @mla_hayaghat @moefcc #patnazoo #SuccessStory #bihartourism #zoovisit #explorebihar
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पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी बढ़ाने के उद्देश्य से किस टाइगर रिजर्व से बाघिन भेजी गई है? अपना सही जवाब कमेंट बॉक्स में बताएं। @mla_hayaghat @moefcc #buxatigerreserve #TigerReserve #savetigers #wildlifeconservation #biodiversity
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नदियाँ स्वस्थ, तो वन्यजीव सुरक्षित! अपनी चंचल अठखेलियों के लिए पहचाना जाने वाला "ऊदबिलाव" नदी के पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वस्थ नदियाँ और आर्द्रभूमियाँ इसके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। आइए, नदियों और आर्द्रभूमियों का संरक्षण करें तथा इन जलीय जीवों के सुरक्षित भविष्य में योगदान दें। 📍 तस्वीर: स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव (Lutrogale perspicillata) 📍 स्थान: विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य, बिहार
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बिहार के राजकीय पक्षी गौरैया (Passer domesticus) को अलग-अलग क्षेत्रों में कई स्थानीय नामों से भी जाना जाता है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच इनके प्राकृतिक आवास को क्षति पहुँचती है, इसलिए इनके संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-II में शामिल किया गया है। ​आप भी इन छोटे प्रयासों से गौरैया संरक्षण में भागीदार बनें- -छत या बालकनी में अनाज और साफ पानी रखें। -घोंसला बनाने के लिए सुरक्षित स्थान रखें। -अपने आसपास हरियाली को बढ़ावा दें। @mla_hayaghat @moefcc #sparrow #SaveSparrow #PasserDomesticus #BirdConservation #WildlifeConservation #Biodiversity
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लसोड़ा (Cordia dichotoma), जिसे भारतीय चेरी या गोंदी के नाम से भी जाना जाता है, स्वास्थ्य के लिए बेहद गुणकारी है। पारंपरिक चिकित्सा से लेकर आयुर्वेद में इसके फल, बीज और पत्तियों का उपयोग कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभों में होता है। इसके गूदे का उपयोग प्राकृतिक गोंद के विकल्प के रूप में भी किया जाता रहा है। साथ ही, लसोड़े का रसोई में भी खूब इस्तेमाल किया जाता है, इसके कच्चे फलों से स्वादिष्ट सब्जी और अचार भी तैयार किए जाते हैं। @mla_hayaghat @moefcc #Lasoda #CordiaDichotoma #medicinalplant #healthyliving #GreenBihar
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पनडुब्बी (Tachybaptus ruficollis) एक छोटा जलीय पक्षी है, जो अपनी अनोखी डुबकी लगाने की कला के लिए जाना जाता है। खतरा महसूस होते ही यह उड़ने के बजाय पानी में गोता लगाकर छिप जाता है और पानी के भीतर तैरते हुए दूर निकल जाता है। इसके पीछे की ओर स्थित पैर इसे पानी में तेज़ी से तैरने और दिशा बदलने में मदद करते हैं। प्रकृति की इस अनोखी विशेषता को जानें और बिहार की समृद्ध पक्षी विविधता को करीब से पहचानें। @mla_hayaghat @moefcc #LittleGrebe #TachybaptusRuficollis #Birds #biodiversity #AquaticBirds
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काले और पीले रंग की चौड़ी पट्टियों वाला यह जीव बैंडेड करैत (Bungarus fasciatus) है। यह अपनी त्रिकोणीय बनावट और शांत स्वभाव के लिए पहचाना जाने वाला साँप है। अक्सर डर या जानकारी के अभाव में लोग ऐसे जीवों को नुकसान पहुँचा बैठते हैं, जबकि खतरा महसूस होने पर यह आक्रामक होने के बजाय छिपने की कोशिश करता है। वन्यजीवों के प्राकृतिक स्वभाव को समझें, इनसे अकारण भयभीत न हों और इनके संरक्षण में अपना योगदान दें। @mla_hayaghat @moefcc #Bandedkarait #Snakeawareness #Snakefacts #Wildlifeconversation #Biodiversity
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पाटली वृक्ष: पटना के नाम से जुड़ी प्रकृति की एक अनूठी पहचान! सफेद, तुरही के आकार के आकर्षक फूलों वाला पाटली वृक्ष अपनी विशिष्ट बनावट और पारंपरिक उपयोगों के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि प्राचीन नगर पाटलिपुत्र, जिसे आज पटना के नाम से जाना जाता है, का नाम इसी वृक्ष से जुड़ा है। इसकी पत्तियों, बीजों और हल्की लकड़ी का पारंपरिक रूप से विभिन्न कार्यों में उपयोग किया जाता रहा है। @mla_hayaghat @moefcc #Patli #savetrees #PlantKnowledge #NatureConservation #Biodiversity
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पान में इस्तेमाल होने वाली सुपारी(Areca catechu) के बारे में तो आप सभी जानते होंगे , लेकिन क्या आपने कभी इसके पेड़ को देखा है? सुपारी का पेड़ भी नारियल के पेड़ जैसा दिखता है, इसके फल का इस्तेमाल पान में किया जाता है और साथ ही इसको कई रीति-रिवाजों में भी उपयोगी है। प्रकृति की ऐसी ही अनोखी वनस्पतियों के बारे में जानें और इसके संरक्षण में अपना योगदान दें। @mla_hayaghat @moefcc #Supari #ArecaCatechu #PlantKnowledge #AmazingPlants #Biodiversity #GreenBihar
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बिहार के प्राकृतिक वैभव का अनुभव करने के लिए तैयार हो जाइए! वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन सत्र 2026-27 का शुभारंभ हो चुका है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF), बिहार, श्री अरविंदर सिंह ने जंगल सफारी का उद्घाटन कर सैलानियों के पहले जत्थे को रवाना किया। इस पर्यटन सत्र में जंगल सफारी के रोमांच के साथ वन्यजीवों और समृद्ध जैव विविधता को करीब से जानने का अवसर आपका इंतजार कर रहा है। तो आइए, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की सैर करें और प्रकृति के अनमोल संसार को करीब से महसूस करें! @mla_hayaghat @moefcc #ValmikiTigerReserve #ecotourism #WildlifeConservation #bihartourism
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भारतीय रसोई में तेजपत्ते (Cinnamomum tamala) का इस्तेमाल खाने में स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए तो किया ही जाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल केवल रसोई तक सीमित नहीं है। पारंपरिक चिकित्सा में भी इसका खास महत्व है। पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और सूजन कम करने में भी तेजपत्ते को लाभकारी माना जाता है। आइए, इस उपयोगी वनस्पति की खूबियों के बारे में जानें और इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। @mla_hayaghat @moefcc #TejPatta #medicinalplant #healthyliving #herbalplants #GreenBihar
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