जब मन में मंथरा बस जाए, तो राम भी दोषी दिखाई देने लगते है!
किसी के मन में आपके प्रति घृणा भर दी जाए, तो आपके त्याग को स्वार्थ, प्रेम को छल और मौन को अहंकार समझा जाता है।
फिर आप लाख सफाई दीजिए, अपने चरित्र का प्रणाम दीजिए– कुछ नहीं बदलता।
क्योंकि जहां निर्णय पहले हो चुका हो,
ये स्वघोषित इज्ज़तदार लोग जहां भी दिखाई दे, इनकी
पूजा किया करो आखिर कलयुग के भगवान जो ठहरे।
इनका किरदार चाहे सौ सवालों के घेरे में हो, मगर इन्हें
अपनी इज़्ज़त पर आँच बर्दाश्त नहीं होते!
वे वो नमूने हैं जो दूसरों की जिंदगी में आग लगाकर भी
जो व्यक्ति
अपनी शक्तियों और कमियों से
भली–भांति परिचित होकर
संसार को समझने की दृष्टि विकसित करता है,
उसे न छल विचलित कर सकता है,
न झूठ परास्त कर सकता है
और न ही विपरित परिस्थितियां
उसको मनोबल तोड़ सकती है..!!
जो द्रौपदी के चिरहरण के दिन ही हो जानी चाहिए थी
वो तेरह वर्ष बाद हुई, पर हुई ।।
कर्म समय ले सकता है,
पर अपना परिणाम नहीं भूलता।
कर्तव्य से बचने का कोई रास्ता नहीं है।
उसे आज टाल दीजिए, कल सामने आएगा,
कल टाल दीजिए, वर्षों बाद आयेगा।
मगर आयेगा।
भागीरथी के पास जाओ या अलकनंदा के पास जाओ बहकर तो वनारस ही आओगे।
प्रेम से मुक्ति चाहते हो तो शिव को कैसे पाओगे
शिव को नहीं पाओगे तो मणिकर्णिका कैसे आओगे!!
वर्तमान में सुख लेने का प्रयास कीजिए,
भविष्य बहुत कपटी है, वह केवल आश्वासन देता हैं।।
गारंटी नहीं..!!
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सफ़र भी छूट जाएगा,शहर भी छूट जाएगा।
जहाँ पहली सांस ली थी, वो घर भी छूट जाएगा।
जिस आंगन में गिर– गिरकर संभलना सिखा था।
मां की दुआओं का वो असर भी छूट जाएगा।
जिन गलियों में बचपन हंसते–हंसते बीता था,
वक्त के साथ वो हर मंजर भी छूट जाएगा।
सोचा न था कभी की एक दिन ऐसा भी आएगा।
याद रखो, तुम्हारी सोच तुम्हारे कदमों की
दिशा तय करती है। अपने विचारों को ऐसा बनाओ,
जो तुम्हें आगे बढ़ने की शक्ति दें।
!! स्वाभिमान के आगे,
परिणाम नहीं देखे जाते!!
भय उन्हें होते है, जिनका
अस्तित्व गुलामी पर टिका हो
मैं अपन सामर्थ्य जानता हूं।
जब भी समय ने विद्रोह मांगा,
मैने समर्पण का विकल्प ठुकराया है!
परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, मैं अपने
सिद्धांतों पर अटल रहता हूं..!!
तुम पत्थर भी बन जाओ तो चुनना
अपनी नीरवता में
एक अनंत इंतज़ार..!!
सावन की पहली फुहार में
मत बहना चंचल धाराओं सा,
तुम अडिग रहना उसी आस्था के साथ
जिससे पार्वती ने पाया था वैरागी शिव का संग।
यदि पाषाण ही होना पड़े,
तो ऐसा होना जो समर्पण से पिघल जाए,
जहाँ गिरती बूँदे,
चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल के घायल श्रद्धालुओं पर माँ कृपा करना..!!
दिवंगत आत्माओं को ईश्वर शांति दें..!!
ॐ शांति🙏🙏💐💐
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गाएं भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती,
तेरे भक्त जनों पर माता, भीड़ पड़ी है भारी,
दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी;!
♥️🙏
अचानक मृत्यु एक ऐसा सत्य है, जो किसी को भी ,कभी भी कहीं भी आ सकती है। यह न उम्र देखती हैं, न समय, न परिस्थिति। यह बस एक पल में सब कुछ छीन लेती है और पीछे छोड़ जाती है– यादें, सवाल और अधूरे ख्वाब।
लोग कहेंगे हार्ट अटैक, एक्सीडेंट, बीमारी भगवान के मर्जी, किस्मत का खेल.. जाने कितने


