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“શ્રીરાધાજી”કહે છે : હે પ્રભુ, ગૌલોક ધામમા કોઈ એવું સ્થાન હોય જે આપના જેવુ શ્યામવર્ણનું હોય, જેમાં અનેક કંદરા હોય જ્યાં આપણે બેસીને વાર્તાલાપ કરી શકીએ, જ્યાં રંગબેરંગી પક્ષીઓના ગીત સંભળાતા હોય, જ્યાં સુંદર ઝરણા વહેતા હોય…….શ્રીરાધાજી આમ વર્ણન કરતા ગયા અને “શ્રીઠાકોરજી”👇🏻
दिवाली की रात आई है, खुशियाँ साथ लाई है,
हर घर में दीयों की, एक नई रोशनी छाई है।✨❤️
#રાધાસ્વરા
#જય_શ્રી_કૃષ્ણ
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!!✨🪔
तुम, मैं और दिवाली की ये खूबसूरत सुबह...
आज सुबह जब मेरी आँख खुली, तो सबसे पहले मुझे तुम्हारी साँसों की गर्माहट महसूस हुई। तुम मेरे सीने पर सिर रखकर सो रही थी, और बाहर दिवाली की सुबह धीरे-धीरे खिल रही थी। खिड़की से आती हल्की-सी ठंडी हवा में दीयों, फूलों और ताज़ी रंगोली की खुशबू घुली हुई थी। पर मेरे लिए इस सुबह की सबसे खूबसूरत खुशबू, तुम्हारे बालों की खुशबू थी।
मैंने तुम्हें जगाया नहीं, बस देर तक तुम्हें देखता रहा। तुम्हारा वो मासूम चेहरा, तुम्हारी बंद पलकें, तुम्हारे होठों पर वो हल्की-सी मुस्कान... मुझे लगा जैसे भगवान ने दिवाली का सबसे खूबसूरत तोहफ़ा मुझे पहले ही दे दिया है। लोग आज लक्ष्मी की पूजा करेंगे, दीये जलाएँगे, मिठाई बाँटेंगे, पर मेरी लक्ष्मी तो सुबह से ही मेरे पास है, मेरी बाहों में है।
फिर तुमने धीरे से आँखें खोलीं, और मुझे देखते ही मुस्कुरा दीं। तुमने कहा, हैप्पी दिवाली, और मैंने तुम्हारे माथे को चूमकर कहा, मेरी दिवाली तो तुम हो। तुमने मेरे गाल पर हाथ रखा और कहा, आज तो पूरा दिन मेरे साथ रहना। और मैंने कहा, आज ही नहीं “स्वरा”, हर दिवाली, हर सुबह, हर शाम, मैं बस तुम्हारे साथ ही रहना चाहता हूँ।
आज हम साथ में चाय पिएँगे, साथ में रंगोली बनाएँगे, साथ में दीये जलाएँगे। और जब रात को पूरा आसमान रोशनी से भर जाएगा, तब मैं सबसे कहूँगा, देखो, ये रोशनी तो कुछ भी नहीं, असली रोशनी तो मेरे घर में है, मेरे दिल में है, वो तुम हो।
तुम, मैं और दिवाली की ये खूबसूरत सुबह... काश ये सुबह कभी खत्म ही ना हो।✨❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
काली चौदस की इस अँधेरी रात में,
माँ काली हर बुरी नज़र से, हर बला से बचाए।
अँधेरा चाहे कितना भी गहरा हो,
ज़िंदगी में माँ की कृपा का उजाला हमेशा बना रहे।✨🙏🏻
#રાધાસ્વરા
#જય_શ્રી_કૃષ્ણ
किस-किस एंगल से उतारूँ तस्वीर तुम्हारी, हर एंगल से तुम दिलकश नज़र आती हो। कभी आँखों में ठहर जाती हो तो लगता है जैसे पूरी कायनात उसी एक नज़र में सिमट गई हो, कभी मुस्कान में खिल जाती हो तो ऐसा लगता है जैसे सुबह की पहली धूप ने फूलों को छू लिया हो।
कभी ज़ुल्फ़ों की ओट से झाँकती हो तो दिल धड़कना भूल जाता है, और कभी अपनी सादगी से ही दिल चुरा लेती हो, बिना कुछ कहे, बिना कुछ किए, बस यूँ ही चुपचाप।
सोचता हूँ तुम्हारी तस्वीरों का एक ख़ज़ाना बना लूँ, हर पल को, हर अदा को, हर मुस्कान को कैमरे में क़ैद कर लूँ, मगर हर तस्वीर अधूरी लगती है, क्योंकि कैमरा तुम्हारा चेहरा तो उतार सकता है, तुम्हारी आँखों की चमक तो दिखा सकता है, मगर तुम्हारे भीतर बसी उस ख़ूबसूरती को कहाँ क़ैद कर पाता है, उस मासूमियत को, उस अपनापन को, उस प्यार को जो सिर्फ़ तुम्हें देखकर ही महसूस होता है।
सच कहूँ स्वरा, तुम्हें देखने के लिए मुझे किसी ख़ास एंगल की ज़रूरत नहीं, मेरी नज़र जिस ओर भी तुम पर ठहरती है, वहीं से मोहब्बत का एक नया नज़ारा दिखाई देता है, कभी तुम्हारी हँसी में जन्नत दिखती है, कभी तुम्हारी ख़ामोशी में सुकून मिलता है, कभी तुम्हारे गुस्से में भी प्यार नज़र आता है।
तुम सामने हो तो दुनिया ख़ूबसूरत लगती है, तुम दूर हो तो भी तुम्हारी यादें ही काफी हैं दिल को बहलाने के लिए। तुम मेरी हर प्रार्थना में हो, मेरी हर सोच में हो, मेरी हर सुबह और हर शाम में हो।
मैं तुम्हें किसी एक तस्वीर में नहीं, अपनी पूरी ज़िंदगी में बसाना चाहता हूँ, क्योंकि तुम सिर्फ़ ख़ूबसूरत नहीं हो, तुम मेरी मोहब्बत हो, मेरी दुनिया हो, मेरा सुकून हो।✨❤️
#રાધાસ્વરા
માટીનો દીવો પણ આજે સોનાની જેમ ચમકાય છે,
ધનતેરસે લક્ષ્મીની કૃપાથી ઘર આખું મહેકાય છે.
સોનું ચાંદી નહીં, દિલની અમીરી આજે પૂજાય છે,
જેના ઘરમાં માનવતા છે ત્યાંજ લક્ષ્મીજી રોકાય છે.✨🙏🏻
धनतेरस के दीये से
अंधेरा मिटा लो,
माँ लक्ष्मी के स्वागत में
घर को फूलों से सजा लो।
माँ लक्ष्मी आएंगी,
द्वार पर दीया जला लो,
धन-धान्य,सुख-शांति की
दुआएँ माँग लो।✨🙏🏻
#રાધાસ્વરા
#જય_શ્રી_કૃષ્ણ
ધનતેરસ પર્વ ની સૌને શુભેચ્છાઓ✨🙏🏻
सुनो... एक बात बताओ, सच-सच बताओ।
क्या तुम्हें भी कभी ऐसा लगता है? क्या तुम्हारी दुनिया में भी कोई अनदेखा सा शख्स हर जगह दिखाई देता है? जैसे मेरा हाल है। मैं जहाँ देखता हूँ, जिसे देखता हूँ, जिस आवाज को सुनता हूँ, हर चीज़ में बस तुम ही तुम नजर आती हो।
क्या तुम्हारी सुबहें भी मेरे ख्याल से शुरू होती हैं? आँख खुलते ही सबसे पहला ख्याल तुम्हारा आता है, सबसे पहला नाम तुम्हारा आता है। क्या तुम्हारी रातें भी मेरी याद में जागती हैं? क्योंकि मेरी रातों की नींद तो कब की तुम्हारी यादों ने चुरा ली है। मैं आधी रात को उठ कर तुम्हें सोचता हूँ, तुम्हारी बातों को याद करता हूँ, तुम्हारी हँसी को याद करके अकेले में मुस्कुरा देता हूँ।
क्या तुम्हें भी कभी किसी भीड़ में, किसी महफिल में अचानक मेरी कमी महसूस होती है? क्या तुम्हें भी लगता है कि सब कुछ है, पर कुछ तो अधूरा है... क्योंकि मैं नहीं हूँ?
या फिर... या फिर ये इश्क सिर्फ मुझे ही हुआ है?
क्या ये सारी बेचैनी, ये सारी तड़प, ये सारा इंतजार सिर्फ मेरे हिस्से में आया है, और तुम्हें मेरी खबर तक नहीं है?
सुनो, अगर ऐसा है भी, तो भी मुझे कोई शिकायत नहीं। मैं तुम्हें इस तरह भी चाहता रहूँगा, बिना किसी उम्मीद के, बिना किसी शर्त के। पर अगर मेरे दिल के किसी कोने में थोड़ी सी भी जगह तुम्हारे दिल में भी है, अगर कभी एक पल के लिए भी तुम्हें मेरी याद आती है, तो बस एक बार कह दो।
तुम्हारी एक हाँ मेरे इस एक तरफा इश्क को मेरी पूरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत कहानी बना देगी।अगर तुम्हें मुझसे प्यार है तो सच में एक बार जरूर बता देना ।✨❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
किसी को चूमना भी एक तरह का संवाद है, जिसमें शब्द तो नहीं पर व्याकरण ज़रूर है।
और इस व्याकरण को वही समझ पाते हैं, जो जिस्म से पहले आत्मा को चूमना जानते हैं।
चूमना सिर्फ होठों का मिलना नहीं होता। चूमना तो एक एहसास का नाम है। जब तुम किसी के माथे को चूमते हो, तो तुम उसे ये कह रहे होते हो “तुम मेरी इज्ज़त हो, मेरी दुआ हो, मेरे सुकून का ठिकाना हो।”माथे का चुम्बन सबसे पवित्र होता है, क्योंकि वहाँ वासना नहीं, वात्सल्य होता है। वहाँ सिर्फ ये एहसास होता है कि तुम मेरे लिए सबसे ज़्यादा कीमती हो।
जब तुम किसी की आँखों को चूमते हो, तो तुम उसके सारे डर, सारे आँसू, सारी रातों की नींदें अपने होठों पर ले लेते हो। तुम उसे ये कह रहे होते हो” मैं हूँ ना।”
जब तुम किसी के हाथों को चूमते हो, तो तुम उसकी थकान को, उसकी ज़िन्दगी की लड़ाई को सलाम कर रहे होते हो। तुम कह रहे होते हो “इन हाथों ने मुझे थामा है, अब इन्हें मैं कभी अकेला नहीं छोड़ूँगा।”
और जब तुम किसी के होठों को चूमते हो... तो वो सिर्फ एक चुम्बन नहीं होता। वो दो रूहों का मिलन होता है। वहाँ शब्द खत्म हो जाते हैं, और धड़कनें बोलने लगती हैं। वहाँ समय रुक जाता है। दुनिया पीछे छूट जाती है। बस दो लोग रह जाते हैं, और उनके बीच की खामोशी में छिपी हज़ारों बातें।
सच्चा चुम्बन वो नहीं जो जिस्म को छूकर गुज़र जाए, सच्चा चुम्बन वो है जो रूह को छूकर ठहर जाए। जो चूमने के बाद भी होठों पर नहीं, दिल पर महसूस हो। जो एक बार मिलने के बाद, उम्र भर याद रहे।
इसीलिए कहते हैं, चूमना हर कोई जानता है, पर चूमने का व्याकरण सिर्फ वही जानता है, जो प्रेम में जिस्म से पहले आत्मा को चूम लेता है।
क्योंकि जिस्म का चुम्बन कुछ पल का होता है, पर आत्मा का चुम्बन... वो तो जन्मों-जन्मों का हो जाता है।✨❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
सुनो,
पता है.... पहले मैं नहीं जानती थी प्रेम क्या है..? कैसे निभाया या जताया जाता है..? प्रेम के मायने क्या हैं..? हाँ... सुना था कि प्रेम हो जाता है खुद ब खुद, किसी से भी, कहीं भी, बस इतना लगता था कि लोग एक दूसरे को पसंद करते हैं, इतना कि वो दुनिया से लड़ जाने को भी तैयार हो जाते हैं, वो फिर किसी की परवाह नहीं करते, वो मरने तक से नहीं डरते।
मगर जब मैं समझने लगी, महसूस करने लगी, तो मुझे समझ आने लगा कि इसके अलावा बहुत कुछ है प्रेम। प्रेम एक मधुर संबंध है, प्रेम आस्था है जैसे ईश्वर के प्रति होती है, प्रेम अंत नहीं है किसी का भी, प्रेम तो आरम्भ है हर प्रकार के संबंध का, जीवन का, सृजनता का।
यदि आप प्रेम में हैं तो आप कभी भी किसी का अहित नहीं चाहेंगे, आप सह लेंगे विरह भी ख़ामोशी से, परन्तु आप कोई वाद-विवाद नहीं करेंगे, नहीं निकलेगी कोई बददुआ कभी किसी के लिए, आप बस प्रार्थनाओं की शरण लेंगे, आप चाहेंगे कि हर चेहरे पर मुस्कुराहट हो, मन की प्रेम से खिली हुई बगिया को आप चाहेंगे हर ओर संचित करना, प्रेम कभी दंडित नहीं करता, प्रेम बस क्षमा करना सिखाता है, सहजता से जीना सिखाता है।
और सच कहूँ तो प्रेम तब समझ आया जब तुम मिले। जब तुमसे बात हुई तो लगा जैसे बरसों से अधूरी कोई दुआ अब पूरी हो गई हो। तुम्हारे बिना प्रेम सिर्फ़ एक शब्द था, तुम्हारे साथ आकर वो मेरी पूरी ज़िंदगी बन गया।
तुम्हारी एक मुस्कान पर मेरा सारा दिन खिल जाता है, तुम्हारी एक आवाज़ पर मेरा दिल सुकून पा जाता है। तुम्हें देखकर लगता है जैसे ईश्वर ने मेरी हर प्रार्थना सुन ली हो।
मैं तुम्हें पाना नहीं चाहती, मैं तुम्हें महसूस करना चाहती हूँ, हर पल, हर साँस में। तुम्हारे साथ होना ही मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है, तुम्हारे बिना भी तुम्हारा होना ही मेरा प्रेम है। अगर कभी दूरियाँ आ भी जाएँ, तो भी मेरा प्रेम कम नहीं होगा, क्योंकि मेरा प्रेम तुम्हें बाँधने के लिए नहीं, तुम्हें आज़ाद रखने के लिए है, तुम्हें खुश देखने के लिए है।
मैं चाहती हूँ तुम जहाँ भी रहो, हमेशा मुस्कुराते रहो, क्योंकि तुम्हारी मुस्कुराहट ही मेरी दुनिया है, तुम्हारी खुशी ही मेरी पूजा है, और बस तुम ही मेरा प्रेम हो।✨❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
मोहब्बत में पुरुष की झुकी नज़रें भी एक मुकम्मल ग़ज़ल होती हैं, बस उन झुकी नज़रों में छिपी मोहब्बत को पढ़ने के लिए एक मोहब्बत भरा दिल चाहिए।
सच ही तो है, जब एक पुरुष सच्ची मोहब्बत में होता है तो वो शायर नहीं बनता, उसकी आँखें शायरी बन जाती हैं। वो जो पूरी दुनिया से आँखें मिला कर बात करता है, वो तुम्हारे सामने आते ही अपनी नज़रें झुका लेता है। और उसकी वो झुकी हुई नज़र कोई मामूली नज़र नहीं होती, वो एक पूरी ग़ज़ल होती है, एक ऐसी ग़ज़ल जिसका हर शेर तुम्हारे नाम होता है।
उसकी झुकी नज़रों के पहले मिसरे में शर्म होती है, कि तुम्हें देख कर उसका दिल कैसे ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगता है। दूसरे मिसरे में फ़िक्र होती है, कि तुम्हें कोई तकलीफ तो नहीं। तीसरे में उसका वो अनकहा इकरार होता है, जो वो लफ्ज़ों में कह नहीं पाता। और आखिरी मिसरे में उसका सारा समर्पण होता है, कि बस तुम हाँ कह दो, वो अपनी पूरी ज़िंदगी तुम्हारे नाम कर देगा।
लोग कहते हैं पुरुष को इज़हार करना नहीं आता, पर सच तो ये है कि वो अपनी मोहब्बत का इज़हार आँखों से करता है। वो तुम्हें चुपके से देखता है, जब तुम हँसती हो तो उसकी आँखें भी हँसती हैं, जब तुम उदास होती हो तो उसकी झुकी नज़रें और भी झुक जाती हैं।
इसलिए अगर कभी तुम्हें लगे कि वो कुछ कह नहीं रहा, तो उसकी आँखों को पढ़ लेना। क्योंकि उसकी झुकी हुई नज़रों में वो मोहब्बत लिखी है जो किसी किताब में नहीं मिलेगी। बस उसे पढ़ने के लिए तुम्हें अपनी आँखों में भी थोड़ी सी मोहब्बत रखनी होगी, थोड़ा सा प्यार, थोड़ा सा एहसास। फिर देखना, उसकी एक झुकी हुई नज़र में तुम्हें पूरी कायनात की मोहब्बत नज़र आएगी।✨❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
आज रमा एकादशी है,
आज से रोशनी की शुरुआत होगी,
आज से दीये जलेंगे,
घर की हर गली रोशन होगी।
आज से घर सजेगा, आज से मन खिलेगा,
आज से दिवाली शुरू है,
हर दिल में खुशियाँ खिलेंगी।
अब हर दिन त्योहार है,
हर शाम रोशनी है,
हर सुबह नई उम्मीद की
एक नई कहानी है।
बस यही दुआ है दिल से,
आपके घर में लक्ष्मी जी का वास हो,
श्रीनाथजी की कृपा सदा बनी रहे,
सुख-शांति का दीया हर रोज़ जले।
हर अंधेरा रोशनी में बदल जाए,
इस दिवाली आपका घर खुशियों से भर जाए।✨ 🪔❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
#જય_શ્રી_કૃષ્ણ
तेरे अधरों से जब मेरे अधर मिले, तो लगा,
जैसे दो प्यासे लफ़्ज़ों को
आखिर अपनी ग़ज़ल मिल गई।✨❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
आजकल दिल बेचैन सा रहता है,
दिल में रहने वाले तू ठीक तो है ना!?✨❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
छोड़ो ये दुनिया की बातें, बस बाहों में रहने दो,
इसी एक जगह सुकून है, बस यहीं रहने दो।✨❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
तुमसे रिश्ता मोहब्बत का इतना गहरा है,
तुम्हें देखे बिना अब दिल नहीं ठहरता है।✨❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
सुनो स्वरा,
तुम मेरे बिल्कुल पास बैठी थीं, इतनी पास कि तुम्हारे बालों से छूकर हवा मेरी गर्दन तक आ रही थी, इतनी पास कि तुम्हारी हँसी के बाद तुम्हारे होठों पर ठहरी मुस्कान मैं बिना कुछ कहे पढ़ सकता था।फिर भी मेरे भीतर एक बेचैन नदी थी, जो तुम्हारे पास आकर भी अपना समुद्र खोज रही थी।
तुमने पूछा, क्या सोच रहे हो? मैंने मुस्कुराकर कहा, कुछ नहीं।कैसे कहता कि तुम्हारी मौजूदगी ही मेरे भीतर इतनी इच्छाएँ जगा रही थी कि किसी एक को चुन पाना मुश्किल हो रहा था।
मन करता था तुम्हारा हाथ थामकर यूँ ही बैठा रहूँ, तुम्हारी उँगलियों की लकीरों में अपनी उँगलियाँ उलझा दूँ।
और फिर तुमने खुद ही अपना हाथ मेरी हथेली पर रख दिया। बस इतना सा स्पर्श था, मगर मेरे भीतर जैसे किसी बंद खिड़की से अचानक धूप उतर आई।
तुमने अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। मेरी बाँह तुम्हारे इर्द-गिर्द आ गई, तुम्हारे बाल मेरे गाल को छूने लगे।मैंने तुम्हारे माथे पर धीरे से अपने होंठ रखे। तुमने आँखें बंद कर लीं, और तुम्हारी उस छोटी सी प्रतिक्रिया ने मेरी बेचैनी को एक नई दिशा दे दी।
अब मन केवल तुम्हें छूना नहीं चाहता था, वो जानना चाहता था कि तुम्हारे भीतर उस क्षण क्या चल रहा है।क्या तुम्हें भी मेरी निकटता इतनी ही प्रिय लग रही थी? क्या तुम्हारी खामोशी में भी कोई ऐसी बात थी, जिसे कहने के लिए शब्द कम पड़ रहे थे?
मैंने तुम्हें चूमा, और तुमने भी मुझे अपनी इच्छा से अपने करीब कर लिया।उस चुम्बन में कोई जल्दबाज़ी नहीं थी, कोई मंज़िल पाने की हड़बड़ी नहीं।वो ऐसा था जैसे दो लंबे सफर के थके हुए मुसाफिर आखिरकार एक जगह बैठकर अपनी सारी यात्राएँ भूल जाएँ।
तुमने मेरे सीने पर सिर रख दिया, और उस क्षण मेरी सारी बेचैनी को एक शांत जगह मिल गई। लेकिन वो चाहत खत्म नहीं हुई। वो अब तुम्हारी हँसी सुनना चाहती थी, तुम्हारी छोटी-छोटी नाराज़गियों में तुम्हारे मन का कारण समझना चाहती थी।
तब मैंने जाना, तुम्हें और पास चाहने का अर्थ हर बार तुम्हारे शरीर के और निकट होना नहीं है।कभी तुम्हारी सोच के पास पहुँचना, कभी तुम्हारे डर को समझना, कभी तुम्हारी इच्छा का इंतज़ार करना, और कभी तुम्हारे साथ बिना कुछ माँगे बैठे रहना भी उसी चाहत के रूप हैं।
मैं तुम्हें अपने इतने पास चाहता था कि तुम्हारी धड़कन सुन सकूँ, और इतना समझदार भी बनना चाहता था कि तुम्हारी खामोशी को हमेशा अपने अर्थों में न पढ़ूँ।
क्योंकि प्रेम में किसी के पास होना एक सुख है, लेकिन उसके पास उसकी अपनी इच्छा, अपने मन और अपने पूरे अस्तित्व के साथ रह पाना;उससे कहीं बड़ा सुख है।
उस दिन तुम मेरी बाँहों में थीं, और मन ने धीरे से कहा थोड़ा और मैंने उस चाहत को सुना, मगर तुम्हें और कसकर बाँधने के बजाय तुम्हारे माथे को चूम लिया। क्योंकि अब समझने लगा था कि प्रेम की गहराई किसी को अपनी ओर खींच लेने में नहीं, उसके पास ऐसी जगह बन जाने में है, जहाँ वो खुद चलकर आना चाहे।
तुम पास थीं, फिर भी मन तुम्हें और पास चाहता रहा तुम्हें पा लेने के लिए नहीं, तुम्हारे साथ उस प्रेम में उतरने के लिए जिसकी कोई गहराई नहीं।✨❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
रात, मैं और स्वरा …!!!
रात के सन्नाटे में
जब दुनिया सो जाती है,
तब मेरी कलम
तेरी यादों से बातें करती है।
चाँद से पूछता हूँ,
बता वो कैसी होगी,
जिसे सोचकर मेरी हर रात
रोशन हो जाती है।
तेरी हँसी मेरे कानों में
गूँजती रहती है,
जैसे कोई धीमी सी धुन,
जो रुकती ही नहीं।
तकिया भी पूछता है
मुझसे हर रात,
आज फिर किसकी याद में
जाग रहे हो तुम?
मैं हँसकर कह देता हूँ,
कुछ नहीं,
बस एक चेहरा है,
जो आँखें बंद करते ही सामने आ जाता है।
कभी तेरे मेसेज
को बार-बार पढ़ता हूँ,
कभी तेरी आवाज़
को मन में दोहराता हूँ।
लोग कहते हैं
रात सोने के लिए होती है,
उन्हें क्या पता,
रात तो किसी को चाहने के लिए होती है।
जब सब सो जाते हैं,
तब मैं जागता हूँ,
और चुपचाप तेरे नाम की
शायरी लिखता हूँ।
काश तू जान पाती,
इस रात में,
एक लड़का तेरे लिए कितनी
दुआएँ माँगता है।
ना उसे तेरा जिस्म चाहिए,
ना कोई वादा,
बस एक सुबह तेरी मुस्कान के साथ
शुरू हो जाए,
यही उसकी आखिरी ख्वाहिश है।✨❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
सुनो स्वरा…. तुम्हें छू नहीं सकता था, इसलिए तुम्हें महसूस करना सीख गया।
तुम्हारे बालों में उँगलियाँ फिराने की जगह, मैं तुम्हारे मैसेज पर उँगलियाँ रोक कर तुम्हें पढ़ने लगा। तुम्हारे कंधे पर सिर रखने की जगह, तकिए में चेहरा छिपाकर तुम्हारी आवाज़ सुनने लगा।
अजीब था हमारा प्रेम। तुम वहाँ, मैं यहाँ, और हमारे बीच की दूरी हमसे ज़्यादा बेचैन थी।
तुम कहतीं “आज बहुत थक गई हूँ” और मेरा मन करता, काश मैं वहाँ होता। तुम्हारे हाथ से फोन लेकर रख देता, तुम्हारे माथे को चूमकर कहता,आज दुनिया को थोड़ी देर तुम्हारे बिना भी चलने दो।पर मेरे हिस्से में सिर्फ तुम्हारी आवाज़ थी। तुम्हारी साँसों के बीच के वो छोटे-छोटे ठहराव और वो खामोशी थी, जिसमें मैं समझ जाता था कि तुम मुस्कुरा रही हो या उदास हो।
धीरे-धीरे मैंने तुम्हें तस्वीरों से नहीं, तुम्हारी आदतों से जानना शुरू किया।तुम्हारा बात करते-करते अचानक चुप हो जाना, खुशी में आवाज़ का ऊँचा हो जाना, और दुख में बार-बार कहना “कुछ नहीं, रहने दो।”
मैं तुम्हें चूमना चाहता था, पर उससे पहले तुम्हारी आँखों की वो उदासी मिटाना चाहता था, जिसे तुम सबसे छिपाती थीं। मैं तुम्हें बाँहों में भरना चाहता था, पर उससे पहले तुम्हें ये भरोसा देना चाहता था कि तुम्हें हर बार मज़बूत बने रहने की ज़रूरत नहीं।
दूरी ने मेरी चाहत को कम नहीं किया, उसका मतलब बदल दिया। अब तुम्हारे होठों की कल्पना में सिर्फ चुम्बन नहीं था, उसके बाद तुम्हारे चेहरे पर आने वाली मुस्कान भी थी।
और अगर कभी ये दूरी मिट भी जाए, तो मैं तुम्हें पाकर तुम्हें जानना बंद नहीं करूँगा। तुम्हारे पास रहकर भी तुम्हारी बातें सुनूँगा, तुम्हें छूकर भी तुम्हारी इच्छाओं का सम्मान करूँगा, तुम्हें बाँहों में भरकर भी तुम्हारे मन के लिए जगह बचाए रखूँगा।
क्योंकि अब समझ आया है ,प्रेम सिर्फ छूने का नाम नहीं, किसी की अनुपस्थिति में भी उसके प्रति कोमल बने रहने का नाम है।
तुम्हें छूने की चाह आज भी वैसी ही है, जैसी पहली बार थी। फर्क बस इतना है कि अब मैं तुम्हें सिर्फ छूना नहीं चाहता, मैं तुम्हारे इतने करीब होना चाहता हूँ कि मेरा स्पर्श तुम्हें वासना नहीं, अपनापन लगे। मेरी बाहों में आकर तुम्हें लगे कि तुम दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह पर हो। मेरी खामोशी में भी तुम्हें मेरा प्यार सुनाई दे।
मैं नहीं चाहता कि मेरे साथ रहते हुए तुम्हें कभी ये लगे कि तुम्हारा मन तुम्हारी देह से पीछे छूट गया है। मैं चाहता हूँ, जब मैं तुम्हें छूऊँ तो तुम्हारी रूह भी मुस्कुरा उठे। जब मैं तुम्हें देखूँ तो तुम्हें लगे कि कोई तुम्हें सिर्फ देख नहीं रहा, तुम्हें समझ भी रहा है।
दूरी ने मुझे यही सिखाया है, प्रेम सिर्फ पास आने का नाम नहीं, एक-दूसरे के मन के पास रहने का नाम है।✨❤️
#રાધાસ્વરા
#बज़्म
सच कहूँ...
तो जीवन की इस डगर पर मन को एक मधुर गीत सा बहने दो, इसे हर बात पर रोक-टोक मत करो। जहाँ धूप मिले, वहाँ जी भर के मुस्कुरा लेना,और जहाँ छाँव मिले, वहाँ जरा ठहर जाना, दो घड़ी साँस ले लेना, खुद को थोड़ा आराम दे देना।
हर मौसम को उसकी प्रकृति के साथ स्वीकारना, हर सावन अच्छा नहीं लगेगा, हर पतझड़ बुरा नहीं होगा। हर अनुभव को, चाहे वो मीठा हो या कड़वा, मन की किताब में एक कोमल अध्याय बना कर रख लेना, क्योंकि वही अध्याय तुम्हें पूरा बनाते हैं।
न किसी की प्रतीक्षा में अपनी शाम को उदास करना, क्योंकि जो तुम्हारा है वो लौट आएगा, और जो नहीं है उसकी प्रतीक्षा में खुद को खत्म करना प्रेम नहीं है। न किसी से कोई शिकवा रखना, न किसी से कोई गिला, क्योंकि शिकवे-गिले मन को भारी कर देते हैं, और हमें तो हल्का होकर उड़ना है।
जो मिला है, उसे स्नेह समझ कर, प्रसाद समझ कर सँजो लेना। जो छूट गया, जो हाथ से फिसल गया, उसे समय के हाथों में सौंप देना, उसे बार-बार पलट कर मत देखना। क्षमा करना सीख लेना, क्योंकि सच तो ये है कि दूसरों को क्षमा करके हम उन पर नहीं, अपने ही मन पर एहसान करते हैं, अपने ही बोझ हल्के करते हैं।
किसे पता है, समय का कौन सा मोड़ हमारी यात्रा का अंतिम पड़ाव बन जाए। कौन सी मुलाकात आखिरी मुलाकात हो, कौन सी मुस्कान किसी की याद में हमेशा के लिए रह जाए। इसलिए जीवन को कल पर मत टालना।
आज जो अपने हैं, जो पास हैं, उन्हें जी भर के प्रेम दे दो, उन्हें कह दो कि तुम उनके लिए कितने जरूरी हो। जो दूर हैं, उनके लिए मन में कोई मैल मत रखना, उनके लिए सद्भाव रखना और जो पीड़ा दे गए, जिन्होंने दिल दुखाया, उन्हें भी मन से मुक्त कर देना, क्योंकि उन्हें पकड़ कर रखने से दर्द तुम्हारा ही बढ़ता है।
जीवन तो एक क्षणभंगुर दीपशिखा है, एक छोटी सी लौ है जो न जाने कब बुझ जाए। तो क्यों न जब तक ये जले, ये अपनी ही रोशनी में झूमती रहे, नाचती रहे। न किसी के आने की शर्त पर जिए, न किसी के जाने के संताप में मरे। बस हृदय में थोड़ा प्रेम, अधरों पर एक सच्ची मुस्कान, और आत्मा में एक शांत सा संतोष लिए चलते रहो।
क्या पता, अगला मोड़ कोई नई सुबह लेकर आए, या फिर इसी सुंदर यात्रा का आखिरी अलविदा हो। ज़िंदगी सच में बहुत छोटी है... इसे प्रतीक्षाओं, शिकायतों और अधूरे हिसाबों में मत उलझाइए।बस माफ करते चलिए, मुस्कुराते चलिए, और जहाँ तक हो सके, प्रेम बाँटते चलिए... क्या पता कौन सा पल आखिरी हो और कौन सी मुलाकात फिर कभी न हो।✨❤️
#રાધાસ્વરા
🪔 इस दीपावली, कुछ खरीदारी उन हाथों से भी कीजिए जिनकी आँखें बड़ी ही उम्मीद से आपकी राह देख रही हैं…
दीपावली आते ही बाजारों में रौनक आ जाती है। हर कोई अपने घर को सजाना चाहता है। कोई दीये ले रहा है, कोई झालरें, कोई रंगोली के रंग, कोई मिठाई, कोई नए कपड़े।
अब तो हम सबकी आदत हो गई है, एक क्लिक पर सामान घर आ जाता है। बड़े-बड़े शोरूम में सब कुछ चमकदार दिखता है। वहाँ हम बिना सोचे कीमत चुका कर आगे बढ़ जाते हैं।
लेकिन ज़रा एक बार अपनी गली की तरफ भी देखिएगा।हो सकता है नुक्कड़ पर कोई बुजुर्ग बूढ़ी आँखों से दीये सजाकर बैठा हो। कोई माँ अपने छोटे से ठेले पर पूजा का सामान लेकर बैठी हो। कोई गरीब पिता अपने बच्चों के साथ रंग-बिरंगे दीये और खिलौने बेच रहा हो।
उनके पास न बड़ी दुकान है, न चमकदार लाइटें, न ऑनलाइन विज्ञापन। उनके पास है तो बस थोड़ी सी पूँजी, दिन भर की मेहनत, और एक छोटी सी उम्मीद। कि इस त्योहार पर थोड़ी बिक्री हो जाएगी तो घर में भी दीपावली मन जाएगी। बच्चों के लिए मिठाई आ जाएगी, पत्नी के लिए एक साड़ी आ जाएगी, बूढ़ी माँ की दवा आ जाएगी।
हम बड़े शोरूम में हज़ारों खर्च कर देते हैं, पर इन्हीं छोटे दुकानदारों के पास आकर 10-5 रुपये के लिए मोलभाव करने लगते हैं। हम भूल जाते हैं कि जिस सामान की कीमत हम कम करवा रहे हैं, उसके पीछे किसी की पूरी रात की मेहनत है, किसी की आँखों की नींद है।
इस बार ऐसा मत कीजिएगा।ज़रूरी नहीं कि सारी खरीदारी उन्हीं से करें। बस थोड़ी सी खरीदारी उनसे भी कर लीजिएगा। घर के लिए 20 दीये, थोड़ी रंगोली, पूजा का छोटा सा सामान। और अगर कीमत ठीक लग रही है तो मोलभाव मत कीजिएगा। वो 10 रुपये आपके लिए कुछ नहीं, पर उनके लिए पूरे दिन की कमाई है।
क्योंकि आपकी एक छोटी सी खरीदारी किसी के घर का चूल्हा जला सकती है। आपके खरीदे हुए दीयों से सिर्फ आपका घर नहीं, किसी और का घर भी रोशन हो सकता है।
हम लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं, समृद्धि मांगते हैं। तो क्यों न इस बार अपनी समृद्धि में किसी और को भी शामिल कर लें?
त्योहार का असली मज़ा सिर्फ अपने घर को सजाने में नहीं है, किसी दूसरे के घर में भी खुशियों का एक छोटा सा दीप जलाने में है।
इस दीपावली, खरीदारी सामान देखकर नहीं, उस मेहनत को देखकर कीजिएगा जो उस सामान को आपके सामने लेकर आई है।✨❤️ 🪔
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