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राजस्थान बेरोजगार यूनियन परिवार की ओर से आप सभी को धनतेरस, दीपावली एवं गोवर्धन पूजा के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ। 💐🪔
माँ लक्ष्मी की कृपा आप सभी पर बनी रहे। आपके जीवन में सुख, समृद्धि, खुशहाली और नई ऊर्जा का संचार हो।
ईश्वर से कामना है कि यह दीपावली हर परिवार के जीवन में खुशियों का उजाला लेकर आए और हमारे युवाओं के सपनों को नई उड़ान मिले।
आप सभी का जीवन मंगलमय हो।
सादर,
राजस्थान बेरोजगार यूनियन परिवार 🙏
#HappyDiwali2026
#HappyDiwali
#HappyDhanteras
#Happygovardhan
#Happybhaiyadhoj
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MVSI भर्ती 2021 अच्छी खबर-
(1)दस्तावेज सत्यापन के लिए 6 दलों का गठन किया गया है। आगामी 16 एवं 20 नवंबर 2026 को अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया आयोजित होगी।
(2) परिणाम-रिजल्ट रिवीजन की आवश्यकता नहीं है। जिन अभ्यर्थियों के पास केवल डिग्री है और निर्धारित योग्यता के अनुसार डिप्लोमा नहीं है, वे पात्र नहीं हैं।
संभवतः विभाग इसी तथ्य की जांच करना चाहता है कि जिन अभ्यर्थियों ने आवेदन फॉर्म में केवल डिग्री की जानकारी भरी है, लेकिन उनके पास निर्धारित डिप्लोमा भी मौजूद है, तो उन्हें पात्रता से वंचित न किया जाए।
विभाग द्वारा दस्तावेज सत्यापन के माध्यम से यह जांच करना बिल्कुल सही कदम है। दो गुना अभ्यर्थियों की सूची में ही पर्याप्त संख्या में डिप्लोमा धारक अभ्यर्थी मिल जाएंगे।
इसलिए रिजल्ट रिवाइज की आवश्यकता नहीं है ।
#हनुमान_किसान
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तीन साल से लगातार मैं इस पूरे मामले में सवाल उठा रहा हूँ और आरोप लगा रहा हूँ कि विभाग में एक ऐसा नेटवर्क काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य नियमों और जनहित से ज्यादा वसूली के तंत्र को बचाए रखना है।
जरा सोचिए, जिन डेपुटेशन पर लगे कर्मचारियों की योग्यता और नियुक्ति पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, उनमें इतनी हिम्मत कैसे आ रही है कि मुख्यमंत्री महोदय, मुख्य सचिव (CS) और माननीय न्यायालय के आदेशों तक की पालना नहीं होने दी जा रही है? आखिर इन्हें संरक्षण कहाँ से मिल रहा है?
हैरानी की बात यह है कि प्रदेश में पहली बार ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है, जहाँ डेपुटेशन पर लगे पदों को भी भरा हुआ मानकर नियमित FSO की नियुक्तियाँ की जा रही हैं, जबकि दूसरी तरफ इन्हीं डेपुटेशन पर लगे कर्मचारियों को नियमित FSO का बॉस बनाकर बैठा दिया गया है।
आखिर विभाग में किसका शासन चल रहा है? नियमों का, आदेशों का या फिर किसी कथित वसूली नेटवर्क का?
अगर वास्तव में सरकार और विभाग जनता के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर हैं, तो केवल दिखावे के छोटे-मोटे एक्शन से काम नहीं चलेगा।
इन विवादित एवं कथित रूप से नियमविरुद्ध डेपुटेशन पर लगे कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए, नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच हो और पूरे मामले में जवाबदेही तय की जाए।
यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए है।
आप भी सोचिए… आखिर सिस्टम किसके संरक्षण में चल रहा है?
विभाग को सब पता है, सिस्टम को भी सब पता है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSO) के पद पर नियमों के विरुद्ध डेपुटेशन पर लगाए गए कुछ कार्मिक न तो इस पद के योग्य हैं और न ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमित नियुक्त हैं। आरोप हैं कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल वसूली के लिए किया जा रहा है और भ्रष्टाचार का पैसा ऊपर तक पहुँचाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री महोदय के आदेश, मुख्य सचिव (CS) के निर्देश और माननीय न्यायालय के निर्णय तक इन व्यवस्थाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करवा पाए। आखिर इन डेपुटेशन पर लगे कार्मिकों का इतना रसूख और संरक्षण किसके पास है?
जब भी वसूली का मामला सामने आता है तो विभाग संबंधित कार्मिक को रिलीव करके उसके मूल विभाग में भेजने की औपचारिकता पूरी कर देता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसी नौबत आती ही क्यों है? क्या केवल रिलीव कर देना ही भ्रष्टाचार का समाधान है?
सोचिए, भ्रष्टाचार किस स्तर तक पहुँच चुका है! सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं और जनता के स्वास्थ्य से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विभाग में कथित अवैध वसूली का खेल चल रहा है।
व्यापारी भाइयों से भी अपील है कि त्योहारों के सीजन में यदि कोई खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनकर जाँच या कार्रवाई के नाम पर दबाव बनाए अथवा पैसे माँगे तो कानून के दायरे में रहते हुए उसकी पहचान, पदस्थापना और वैध अधिकारों की पुष्टि जरूर करें। वसूली की मांग होने पर संबंधित विभाग और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को शिकायत करें। नियमित FSO और नियम विरुद्ध डेपुटेशन पर लगाए गए कार्मिकों के बीच अंतर समझें।
अब सवाल केवल डेपुटेशन का नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य, व्यापारियों के सम्मान और सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही का है।
दुर्भाग्य है कि मंत्री जी से लेकर विभाग के बड़े अधिकारी तक इस गंभीर विषय पर खुलकर जवाब देना उचित नहीं समझ रहे हैं।
आखिर कब तक जनता के स्वास्थ्य और सरकारी व्यवस्था के नाम पर भ्रष्टाचार का यह खेल चलता रहेगा? जवाब कौन देगा?
खबर-*बारां में फूड इंस्पेक्टर पर वसूली के लगे आरोप:* व्यापारियों में आक्रोश-प्रताप चौक पर की नारेबाजी, जिला बंद कराने की दी चेतावनी
dainik.bhaskar.com/g29SWotkQ…
#FoodSafety #Rajasthan #भ्रष्टाचार #जवाबदोसरकार
आप सभी को रूप चतुर्दशी एवं छोटी दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएँ।
#रूप_चतुर्दशी #छोटी_दीपावली #दिवाली #दीपोत्सव
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MarksheetSMs are Live for BCI and SCI 2026 exams
Also for Women Supervisor Exam
recruitment.rajasthan.gov.in…
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Final answer keys.. .. BCI, SCI and Women Supervisor Exams on our website please... rssb.rajasthan.gov.in/answer…
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सवाल डिलीट होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा,
तीन परीक्षाओं में अब तक 9 सवाल डिलीट।
@RajCMO
@BhajanlalBjp @alokrajRSSB @RajGovOfficial @rajeduofficial @madandilawar
धनतेरस के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएँ।
#धनतेरस
सवाल डिलीट होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा,
तीन परीक्षाओं में अब तक 9 सवाल डिलीट।
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भरपूर प्रयासों के बावजूद चयन बोर्ड की परीक्षाओं में सवाल डिलीट होने की यह विसंगति आज तक दूर नहीं हो पा रही है।
एक बेरोजगार युवा दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करता है, अपना कीमती समय और संसाधन लगाता है, लेकिन जब परीक्षा आयोजित करने वाले पेपर सेटर ही पूरे सवाल सही तरीके से तैयार नहीं कर पा रहे हैं, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अगर इसी को हम बदलाव और सुधार मानकर संतुष्ट हो रहे हैं, तो शायद हम अभी भी भ्रम में हैं।
हालांकि, कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष श्री आलोक राज जी अपने स्तर पर व्यवस्थाओं में सुधार के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए वे निश्चित रूप से धन्यवाद और प्रशंसा के पात्र हैं। लेकिन वास्तविक खुशी उस दिन होगी, जब समस्या का स्थायी समाधान होगा और युवाओं को त्रुटिरहित एवं पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था मिलेगी।
आलोक राज जी की एक और अच्छी बात यह है कि वे ईमानदारी से युवाओं के हित में प्रयास करते दिखाई देते हैं। वरना व्यवस्था में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जो अवसर मिलते ही बेरोजगार युवाओं के अधिकारों को नुकसान पहुँचाने से पीछे नहीं हटते।
युवाओं को आश्वासन नहीं, त्रुटिरहित परीक्षा और न्यायपूर्ण चयन व्यवस्था चाहिए।
#RSSB #राजस्थान_बेरोजगार
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अभिषेक चौधरी युवक कांग्रेस के नए अध्यक्ष... और अनिल चौपड़ा वरिष्ठ उपाध्यक्ष होंगे..!! – at Jaipur, India
किसी भी भर्ती में पोस्ट खाली रहना आपकी नजर में आखिर किसकी कमी है?
लेकिन ओवरऑल बात करें तो यहां दोनों तरफ से नुकसान है एक तरफ पूरा सरकारी तंत्र एग्जाम करवाने में लगता है, दूसरी तरफ सालों से तैयारी करने वाले अभ्यर्थी बैठते हैं। फिर भी सीट खाली चली जाती है तो क्या ही कहें।
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स्टाफिंग पैटर्न का काम पूरा नहीं होने से 1.23 लाख पदों की बढ़ोतरी का प्रस्ताव अटका
स्टाफिंग पैटर्न हो तो शिक्षा विभाग में नई भर्तियों की राह खुले

























