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Replying to @narendramodi @donaldtusk
Sir, please don't waste your time in useless PCs.
This time could have been used to decide which Bank/PSU to be sold next in national interest.
How courts work so swiftly for these people? Because they have access to high profile lawyers or there is something else?
सुभाष चंद्र गर्ग और भाभी जी/ भौजी का वकील एक ही है ।वकील साहब ने कहा तुरंत सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट कर रहे हैं,लेकिन भौजी तो कोर्ट से उपर हैं, जो मर्ज़ी वह करेंगी,मर्यादा दूसरे से,महिला होने का फ़ायदा अलग ।लेकिन मेरा मुक़दमा जारी है,2 करोड़ रुपये लेने तक मुक़दमा लड़ूँगा ।देश के लोगों को गुमराह करना क्या होता है? निर्णय आपका
The frustration of @BJP4India and troll like behaviour of BJP's top leadership is testament to rising political stature of @RahulGandhi and his strategies.
#DelhiChallo
#RamlilaMaidan
#लोकतंत्र_बचाओ_अराजकता_हटाओ
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On ECINET (the software on which electoral roll now sits) it says the ERO (Electoral Registration Officer) remains the legal authority and announces a committee with IIT Mumbai and IISc experts to check the software complies with the law.
What it doesn’t say: that this is Joshi’s proposal of May 29, almost to the word, which Sandhu endorsed in July and recorded in August that it had gone nowhere. The affidavit only presents it as the Commission’s September decision.
(4/10)
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The worst investment I did is buying a property of Godrej- big brand bigger, bigger fraud.
Bought a property in 2023, they told we will get possession in 2026 mid, forget the possession, they are telling they want to add additional floors and that too 8-9 floors, without adding any extra plot to the project.
From past 3 months the CRMs has bullied, disturbed, bribed and what not for us to sign the consent form to modify the RERA, as a person who works a full time job, this kind of harassment takes a toll on mental health, as now I am paying full EMI and possession not sure when they are going to give(maybe 2028(Rera date)), the constructions they have left in mid. For Phase1 owners also they are pushing the handover deadline.
This is so disappointing! and now I am stuck, so whenever you decide to buy a property in Godrej, think 100 times before.
ये पोस्ट ना पढ़े।
पढ़ते पढ़ते आपकी दिवाली बीत जाएगी 😭
राहुल गांधी एक नवंबर की रैली की जिद पर हैं। हिन्दुओं के पर्व पर भी उन्हें झूठी लड़ाई लड़कर सत्ता प्राप्त करना है। अब सर्वोच्च न्यायालय में चुनाव आयुक्तों ने शपथपत्र दाखिल किया है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक,
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के कामकाज के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है; आयोग का कहना है कि यह याचिका पूरी तरह से केवल एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है।
ECI का क्या कहना है:
🔹 हलफनामे को तीनों सदस्यों - CEC और दोनों निर्वाचन आयुक्तों (ECs) - ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है।
🔹 तीनों SIR आदेश (जून 2025, अक्टूबर 2025, मई 2026) आयोग के सर्वसम्मत फैसले थे।
🔹 किसी फाइल पर काम चलने के दौरान CEC या ECs द्वारा दी गई टिप्पणियां, सवाल या सुझाव, आयोग के 'फैसले' नहीं माने जाते हैं।
🔹 फाइलें एक EC के पास जाती हैं, फिर दूसरे EC के पास, और अंत में CEC के पास। जरूरी मामलों में, मंजूरी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ले ली जाती है और बाद में उसे फाइल में दर्ज कर दिया जाता है
🔹 अगर कोई अधिकारी अपनी तय शक्तियों से बाहर जाकर आदेश जारी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी
🔹 28 जुलाई का काम बांटने (work allocation) का आदेश प्रतिनियुक्ति (deputation) पर आए एक अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था। अगले ही दिन दोनों ECs ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा। 30 जुलाई को ECs के संयुक्त निर्देश के बाद, उस आदेश को कभी लागू नहीं किया गया
🔹 फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसमें बदलाव करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। SIR घोषणा-पत्र (declaration) एक अलग दस्तावेज है
🔹 यह माना गया है कि ऑनलाइन डिस्प्ले को बदलाव (amendment) के रूप में समझा जा सकता था। 21 अक्टूबर से, ऑनलाइन आवेदन को फॉर्म 6 और घोषणा-पत्र में बांट दिया जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे फिजिकल फॉर्म में होता है
🔹 जिन मतदाताओं का डेटा मैप नहीं हुआ है, उन्हें सुनवाई (hearing) में जाने की जरूरत नहीं है। BLOs उनके घर जाकर दस्तावेज ले लेंगे। सुनवाई केवल बहुत खास मामलों में ही होगी, और वह भी ऑनलाइन होने को प्राथमिकता दी जाएगी
🔹 ECINet: ERO के आदेश के बिना कोई भी नाम न तो जोड़ा जा सकता है और न ही हटाया जा सकता है। नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, यह जांचने के लिए IIT और IISc के विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई है।
🔹 गोवा: "छूट गए" 97 मतदाताओं में से 88 पहले ही पंजीकृत हो चुके थे, 6 विदेश में थे और 3 के पास पुर्तगाली पासपोर्ट थे।
🔹 पश्चिम बंगाल: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत, CEO पश्चिम बंगाल के अधिकारियों ने मतदाताओं को शामिल किए जाने के खिलाफ अपीलें दायर कीं। "इन मामलों को आयोग के सामने नहीं लाया गया था।"
🔹 CEC (मुख्य चुनाव आयुक्त) को रोकने की याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती। CEC को केवल सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही हटाया जा सकता है।
🔹 आयोग ने कभी भी कोई आंतरिक नोट या फाइल मीडिया को जारी नहीं की, और न ही ऐसा करने की अनुमति दी।
🔹 EVM पर बार-बार उठाए गए सवाल, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है
🔹 दशहरे की छुट्टियों के कारण संक्षिप्त जवाब दाखिल किया गया। ECI ने विस्तृत, बिंदुवार जवाब दाखिल करने की अनुमति मांगी है
अब राहुल गांधी एक नवंबर की रैली रद्द करेंगे क्या? वैसे भी एक नवंबर 1984 के सिख नरसंहार की तारीख पर रैली को भाजपा बड़ा मुद्दा बना रही है, लेकिन राहुल गांधी तो राहुल गांधी हैं। उनका कुछ भी योजनाबद्ध नहीं होता। उन्होंने तो स्पष्ट बताया था कि, प्रियंका चाहती थीं कि, योजनाबद्ध तरीके से हो, लेकिन बिना योजना बनाए ही मीडिया कवरेज मिलती है। अब आप अच्छे से समझ सकते हैं कि, राहुल गांधी क्या और कैसे करना चाहते हैं। हम भारत के लोगों को समझना होगा कि, नेता प्रतिपक्ष मोदी या भाजपा पर नहीं, लोकतंत्र और संविधान पर ही हमला कर रहे हैं। अब हम भारत के लोगों को तय करना होगा कि, संविधान बदल देंगे, आरक्षण समाप्त कर देंगे वाली अफवाह से 99 तक पहुंचे राहुल गांधी को लोकतांत्रिक तरीके से कैसे सुधारना है।
Hmmm.
#CJP
Is it true that RW has asked #DelhiPolice to furnish a Peace Bond after deleting 👇 post?
Can someone please confirm or deny? @SauravDassss @neha_aisa @zoo_bear
लेकिन पत्रकारिता और चाटुकारिता का अन्तर अभी भी समझ नहीं आया होगा, है ना? @apnarajeevnigam
BJP is doing everything to deny #JusticeForAnkitaBhandari while people like @yogitabhayana continue to fight for it.
अंकिता भंडारी मर्डर केस में कॉन्सिपरेसी समझिए –
> 21 अक्टूबर को CBI ने उर्मिला भंडारी से पूछताछ की। उर्मिला ने नार्को टेस्ट की मौखिक सहमति दी।
> 23 अक्टूबर को उर्मिला ने CBI कोर्ट में खड़े होकर नार्को टेस्ट की सहमति दी। कोर्ट ने फिर एक बार विचार करने को कहा। अगली तारीख 26 अक्टूबर लगाई।
> 24 अक्टूबर की रात हरिद्वार पुलिस ने उर्मिला राठौर पर सुरेश राठौर को ब्लैकमेल करने का केस दर्ज किया।
> 25 अक्टूबर को उत्तराखंड पुलिस ने उर्मिला को गिरफ्तार किया, कोर्ट ने जेल भेजा।
> 26 अक्टूबर यानि कल CBI कोर्ट में नार्को टेस्ट पर सुनवाई होगी, लेकिन मेन मुद्दई यानि उर्मिला राठौर मौजूद नहीं होंगी। लिहाजा, यह सुनवाई टलने के आसार हैं।
उर्मिला और सुरेश राठौर की फोन कॉल बातचीत में अंकिता भंडारी मर्डर केस में VIP का नाम ‘गट्टू’ सामने आया था। बाद में उर्मिला ने गट्टू की डेफिनेशन दुष्यंत गौतम के रूप में बताई। दुष्यंत गौतम अब सिक्किम के राज्यपाल बन चुके हैं। जेल जाने से पहले तक उर्मिला अपने इस बयान पर अडिग हैं कि उस ऑडियो में बातचीत गट्टू की हो रही थी, जो दुष्यंत गौतम है। उत्तराखंड के लोग चाहते हैं कि अंकिता भंडारी मर्डर केस में VIP का नाम उजागर हो।
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अंकिता भंडारी मर्डर केस से जुड़ा दिसंबर 2025 का ऑडियो सुनिए !!
"विनोद आर्या (पूर्व BJP नेता) का लड़का जो जेल में बंद है, उसने अंकिता भंडारी को प्रेशर किया कि तू दुष्यंत को देगी। रात को इसके साथ सोएगी। अंकिता ने मना कर दिया"
यह बातचीत उर्मिला और सुरेश राठौर के बीच हो रही है। इसी ऑडियो को लेकर कल उर्मिला के नार्को टेस्ट की मंजूरी CBI कोर्ट देहरादून में होनी थी, उसे पहले आज उत्तराखंड पुलिस ने उर्मिला को ब्लैकमेलिंग में गिरफ्तार कर लिया।
आखिर कौन नहीं चाहता कि इस केस में VIP का नाम उजागर हो?
He was fine before #MannKiBaat . What happened after that @User_Maine ?
सर थोड़ा आराम से। फिर पलटी मार के आपको इधर ही आना है 🫢
अहंकार और हताशा में डूबी कांग्रेस ने एक बार फिर राजनीति की मर्यादा तार-तार कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी द्वारा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के स्वर्गीय पिता जी के संदर्भ में की गई टिप्पणी अत्यंत निंदनीय है।
वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन भाषा और आचरण की मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।
खड़गे जी को इस अमर्यादित टिप्पणी के लिए देश से तत्काल माफ़ी माँगनी चाहिए।

































