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II यतो धर्मस्ततो जयः II अस्तित्व की खोज में निकला एक पथिक II

भारतवर्ष
Joined October 2025
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देश की वैज्ञानिक क्षमता को बर्बाद करने के लिए 2022 में मोदी ने साइंटिफिक और तकनीकी क्षेत्रों में आरक्षण की व्यवस्था बनाई। किसी से पूछा नहीं, चुपके से लागू किया जैसा कि इस समाजविभाजक प्रधानमंत्री ने अपने भीम प्रेम में पहले भी किया है। यह व्यक्ति यही कार्य प्राइवेट क्षेत्रों में भी आरक्षण के लिए 2028 के बजट सत्र में या उससे पूर्व ग्रुप डी से आरंभ करेगा। जबकि सत्य यह है कि जिसके लिए यह इतना झुक रहा है, वो इसे कहीं नहीं वोट करते। @narendramodi इसी कारण 2047 का लक्ष्य रखा है कि तब किसको याद रहेगा?
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देश में बैंककर्मिओं की स्थिति पर जल्द बात शुरू नहीं हुई तो हालत बिगड़ सकते हैं। जिस तरह आए दिन बैंककर्मी सुसाइड कर रहे हैं,यह खतरे की घंटी है। बैंको का कामकाज भी देश की सुचारू सिस्टम का लाइफलाइन है। वह बाधित हुआ तो बड़ी समस्या होगी। उनकी बात सुनिए। देखिए आसपास क्या हो रहा है ।
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अब एक समाचार 'सूत्रों' के नहीं, 'उच्च पदस्थ सूत्रों' के हिसाब से फैलाया जा रहा है कि सरकार UGC रोलबैक नवंबर के मध्य में करेगी। यह कोई समाचार नहीं है, यह वही धूर्तता है जो इनके प्रवक्ताओं के मुँह में माइक देने पर ये कहते हैं कि 'विषय कोर्ट में है'। ध्यान रहे हमारी तीन माँगें हैं: 1. UGC रोलबैक 2. मोदी एक्ट में समुचित संशोधन 3. वर्तमान आरक्षण में समीक्षा कोई एक माँग से कुछ नहीं होने वाला। संघर्ष चलता रहेगा। 5 महीना लगे, 2 साल लगे, 10 साल लगे।
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राजकिशोर सर का अकाट्य तर्क मुग्ध कर लेने वाला है। फिर भी @RajkishorLive की बात पर थोड़ा सा मतांतर रखते हुए कहना है कि निःसंदेह बिहारीलाल में विस्तार है, कविता व्यापक है। इसके मुकाबले घनानंद के यहां एकरस चीजें हैं। प्रेम का संयोग कम विप्रलंभ अधिक है। और उसी में मौन पुकार है। थोड़ी भक्ति भी है लेकिन शृंगार ही अधिक है। हालांकि शृंगार इतना जबरदस्त है कि वह कविता पढ़ते हुए मृदंग की तरह बजता हुआ प्रतीत होता है। उनके पास साहित्य को व्यक्त करने वाली लाक्षणिक पदावली है। और सबसे प्रमुख तो वह पीड़ा है जिसे वह चुप रहकर सह रहे हैं। जिसे वह कह नहीं रहे हैं लेकिन वह प्रकट हो रही है। उनकी पीड़ा और उसकी अभिव्यक्ति कविता बन गई है। इतना ईमानदार कोई नहीं दिखता। स्व की बात करने वाले इतने मुखर कवि बाद में निराला मिले। उसके बाद कोई बड़ा कवि नहीं है। बिहारीलाल को अच्छा संरक्षक मिल गया। उन्होंने उनकी कविता को तुरंत पुरस्कृत करना आरम्भ किया। घनानंद का संरक्षक तो उनकी बेअदबी से खिन्न हो गया था। दरबार से निकाल ही दिया। घनानंद अहमद शाह अब्दाली के अभियान में मारे गए। सैनिकों ने उन्हें प्रताड़ित करके मारा। वह कृष्णभूमि का रज उड़ाकर जीवन दर्शन को व्यक्त करने वाले कवि बने। बिहारीलाल सिद्ध थे। अभ्यास से सिद्ध हुए। घनानंद सिद्ध + 1 हैं। उनका दुःख भोगा हुआ है। फिर, घनानंद आधुनिक चेतना युक्त हैं। उनके प्रेम के आदर्श को दीप/पतंगा, जल/मीन से नहीं व्यक्त किया जा सकता। जो अकुलाहट है, पीड़ा है, वह बिहारी के यहां नहीं। यदि पीड़ा को, करुणा को हटा दें तो शृंगार नक्काशी है, पच्चीकारी है, सजावट है। यह गुलदस्ता जैसा है। उसमें प्राकृतिक सौंदर्य नहीं है। मुझे लगता है कि बिहारीलाल की कविता एक गुलदस्ता है। घनानंद की कविता एक "वन बाग उपवन वाटिका" जैसी है। बहुत आदर के साथ कहना है कि मुझे गुलदस्ता और वाटिका में से चुनना ही हो तो मैं वाटिका ही चुनूंगा।
आपकी बात का सम्मान करते हुए, घनानंद और बिहारी के इस प्रश्न पर मैं अपनी राय थोड़ा खोलकर रखता हूं, क्योंकि यह केवल दो कवियों की तुलना नहीं, कविता को देखने की दो दृष्टियों का प्रश्न है। घनानंद के बारे में आपने जो कहा, उससे असहमति का प्रश्न ही नहीं। रीति की बंधी - बंधाई परिपाटी के बीच उनकी कविता सचमुच कलेजे से निकली हुई आवाज है। -अति सूधो सनेह को मारग है, जहाँ नेकु सयानप बाँक नहीं- जैसी पंक्ति पढ़कर लगता है कि कवि कविता नहीं लिख रहा, अपना घाव दिखा रहा है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने भी उन्हें ब्रजभाषा के सबसे सच्चे प्रेम-कवियों में गिना था। सुजान के विरह ने उन्हें जो पीर दी, वही उनकी कविता का प्राण बनी। पर मेरी कठिनाई ‘अभ्यास’ और ‘सिद्धि’ वाले इस विभाजन से है। बिहारी का शिल्प अभ्यास भर होता तो सात सौ दोहों की सतसई पर सदियों तक टीकाएं न लिखी जातीं। —-कहत, नटत, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात। भरे भौन में करत हैं, नैननु ही सौं बात॥—- इस एक दोहे में पूरा नाटक है- भरा हुआ घर, दो प्रेमी, और आँखों ही आँखों में कहना, मुकरना, रीझना, खीझना, मिलना, खिलना और लजाना। सात क्रियाओं की यह झड़ी नाद सौंदर्य में भी किसी कवित्त से कम नहीं। दोहे जैसे छोटे छंद में इतना समेट लेना कारीगरी से आगे की चीज है। जिसे हम अभ्यास कहते हैं, वह बिहारी के यहाँ साधना बनकर सिद्धि तक पहुँचता है। दूसरी बात विस्तार की है। घनानंद एक ही भाव के कवि हैं, गहरे, पर एक ही। बिहारी के यहां श्रृंगार है, भक्ति है, नीति है, लोक का चुटीला निरीक्षण है। —मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोय-१में भक्त बिहारी हैं, और —नहिं पराग नहिं मधुर मधु, नहिं बिकास इहि काल। अली कली ही सौं बँध्यौ, आगैं कौन हवाल॥— में वह कवि जिसके एक दोहे ने राजा जयसिंह को विलास से जगाकर राजकाज की ओर लौटा दिया। कविता का समाज पर ऐसा सीधा असर कम ही देखने को मिलता है।
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कल तक जो सदाओं में चिल्लाता था वारेन एंडरसन का नाम । आज दबी आवाज में मैथ्यू वैनडाइक से कहता है : अब्बाजान ! अब्बाजान !!
Myanmar Training Camp case | Special NIA court at Rouse Avenue has granted permission to US National Matthew Aaron Vandyke and 6 Ukrainian nationals to travel to the USA and Ukraine to meet their families for one month, subject to certain conditions and formalities. The court directed the release of their passports to them. All 7 foreigners have been granted default bail by the court. They are likely to be released from Tihar Jail today.
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साँसों की माला पे सिमरुं मैं CIA का नाम
Myanmar Training Camp case | Special NIA court at Rouse Avenue has granted permission to US National Matthew Aaron Vandyke and 6 Ukrainian nationals to travel to the USA and Ukraine to meet their families for one month, subject to certain conditions and formalities. The court directed the release of their passports to them. All 7 foreigners have been granted default bail by the court. They are likely to be released from Tihar Jail today.
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बैंकों का मुनाफा बढ़ रहा है लेकिन कर्मचारियों की संख्या घट रही है और काम घटाने की बात ना करते हुए बैंक वाले 2 दिन की छुट्टी माँग ले रहे तो आग लगी है सिस्टम को। क्या सरकारी, क्या प्राइवेट बैंक.. देखिए क्या ही हो रखा है बैंकर्स का हाल
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बैंक मुनाफे में चल रहे हैं लेकिन बैंक कर्मचारियों को 2दिन की छुट्टी देने में इनको मौत आने लगती है। जबकि आप ख़ुद देखिए बैंक कर्मचारियों पर काम का कितना प्रेशर है। अब वो हड़ताल नहीं करें तो क्या करें
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शोषण व्यक्ति नहीं करता , शोषण हमेशा व्यवस्था करती है। आज के दौर का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि लोग व्यवस्था को सुधारने की बजाय व्यक्ति को टारगेट करने लगते हैं। व्यक्ति को टारगेट करना आसान है , व्यवस्था को सुधारना बहुत ही मुश्किल काम है शायद इसीलिए स्थापित व्यवस्था कभी बदल नहीं पाती इस देश में।
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एक और संस्थान बर्बादी की ओर धकेल दिया गया इस निकम्मी सरकार द्वारा ।
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Government to Introduce Right to Cheat Act in order to save GCs from SC/ST Act 🫡
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नए राम जी के 30 दिन के जन्ममाह उत्सव का लवणेन भोज्यम् हो गया!
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Gems of @narendramodi act नकल करने से रोकोगे तो नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा,केस होगा अलग से कल इसी एक्ट की आड़ में आपकी बहन बेटियों पर बुरी नजर डाली जाएगी और आप इस बात से खुश रहना कि फलाने से बैर नही,ढिमकाने की खैर नहीं । वोट सजातीय को दोगे मानते हैं,पर बहन बेटी के लिए सवाल तो पूछो
Our govt has made SC/ST (Prevention of Atrocities) Act more stringent and increased the offences listed in the Act from 22 to 47 : PM Modi #BJP4InclusiveVikasa
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जो केवल यूजीसी रोल बैक की बात करे और एससी एसटी एक्ट और आरक्षण में सुधार की माँग ना करे वास्तव में वह भाजपा का ही सिपाही है सावधान रहिए
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दोनों इंजन ओरेंज लाइन से ब्लू लाइन पर शिफ्ट हो रहे हैं तो इतनी तकलीफ देशहित में उठाया ही जा सकता है 😊
प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है। शाम 7 बजते ही अंधेरा छा जाता है और दोनो इंजन की पावर फैल हो जाती है।
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साहिल वकोड़े IIT बॉम्बे के छात्र थे। परीक्षा चल रही थी। पूरा प्रश्नपत्र AI एप्प को अपलोड कर के उत्तर कॉपी में लिख रहे थे। प्रोफेसर ने पकड़ लिया। बाहर ले गए, डाँटा और कहा कि संस्थान के नियम स्पष्ट हैं आप चोरी करते पकड़े गए तो सस्पेंड किए जा सकते हो। साहिल ने बाद में आत्महत्या कर ली। माँ-बाप ने पोस्टमार्टम के बाद भी शव नहीं लिया क्योंकि उन्हें न्याय चाहिए। न्याय पाने के लिए उन्होंने मोदी एक्ट की धाराएँ लगवा दीं प्रोफेसर पर। एक लड़का आरक्षण से IIT पहुँचा। कम नंबर न आए, इसलिए चोरी कर रहा था। वह टॉपर बनना चाह रहा था। पर एक मनुवादी शिक्षक ने उसे कॉलेज के कानून बताए, सस्पेंड किया भी नहीं। उसने आत्महत्या कर ली। क्या एक दलित को फोन ले जाने अनुमति नहीं होनी चाहिए? क्या ऐतिहासिक प्रताड़ना के कारण उसको ओपन मोबाइल परीक्षा देने की अनुमति नहीं होनी चाहिए? आज एक ब्राइट स्टूडेंट, जो जेट इंजन बना सकता था AI से पूछ कर, हमारे बीच इसलिए नहीं रहा क्योंकि उससे पहले ही चरण में रोक लिया गया। मोदी एक्ट इसीलिए बना ही है। प्रोफेसर को फाँसी होनी चाहिए।
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आईटी सेल सवर्णों को अभी तक यही डरा रही थी कि अगर कांग्रेस आ जाएगी तो आरक्षण 80% कर देगी अब इनके @myogiadityanath खुद सुप्रीमकोर्ट जा रहे हैं 91% आरक्षण को डिफेंड करने जिससे सवर्ण बच्चे MBBS ना कर पाए जबकि वास्तविकता ये है के सिर्फ5% दलित योगी को वोट देते है पर 95%सवर्ण
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Embracing a 5-day banking week allows employees time to upskill, ensuring innovation and better service for all customers. #5DayBankingNow #AIBEA @PMOIndia
40 Minutes more Banking Every Monday to Friday if #5DayBankingNow implemented so No Inconvenience to Customers @DFS_India @ChiefIba @ChairmanIba @nsitharaman @nsitharamanoffc @PMOIndia
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‼️ मोदी के जन्म दिन पर विशेष ‼️ प्रजा सुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्। नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम्॥ आदर्श राजा की दृष्टि में प्रजा प्रजा होती है—वहाँ जाति, वर्ग, धन या पद के आधार पर भेद नहीं होता; न्याय सबके लिए समान होता है। नोट -ठीक शाम 7 बजे दिया बुझाना ना भूलें (ब्लैकआउट)
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भगवान बनने के लिए ही सारे प्रयत्न चल रहे है पिछले दो तीन वर्षों से ! सवर्णों को हाशिए पर डालना इसी रणनीति का हिस्सा है। जबरदस्ती भगवान बनने के लिए बिना दिमाग के भक्तों की एक भीड़ चाहिए और सवर्ण कभी की उस भीड़ का हिस्सा नहीं बनेगा ये महामानव को अच्छे से पता है ।
क्या हम इसको "अंधभक्ति" बोल सकते हैं? क्या आजतक ऐसा हुआ है कि किसी जीवित राजनेता का बर्थडे मनाने के लिए दिए जलाए जा रहे हों? और वो भी जनता को बोला जा रहा है करने को! ऐसा request सरकार ने किसी हिंदू त्यौहार पर किया हो, याद नहीं आता! मतलब अब खुद को ही भगवान बनने की तैयारी है?
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