Everyday Aesthete | ©Photographs | Writing

Joined November 2022
किसी कटाव के कारण बहाव में हम हैं, मगर दिखाई यूँ देगा कि नाव में हम हैं। ―इरशाद खान सिकंदर
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सूरज की आख़िरी हिचकी।
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रात, एक स्थिर स्मृति थी छूट गयी और छोड़ी गई चीजों की। सपने, बीत गए सुखद समय की यादों से पीड़ित थे, और वे ख़त जिन्हें वह प्रेम और उत्साह से लिखता था अब वह किसी भाग्यशाली वक्त की पीड़ादायक याद के पीले पड़ गए दस्तावेजों के सिवाय कुछ भी न थे।
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पहाड़ों के उस पार जाता हुआ कि उस पार भी इस पार की मलामतें न हों ( देवी प्रसाद मिश्र )
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These evenings are so old fashioned, always wanting lovers on benches.
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Scent and flowers, radiance and heat, are distilled here to a fiery, to a yellow liquid..This is rapture; this is relief. Virginia Woolf, The Waves
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कभी-कभी प्रेम किसी तेज़ चीख़ या वादे में नहीं छुपा होता — वह एक पत्ते में होता है, जो थकी हुई बूढ़ी बिल्ली अपनी कांपती हुई चाल से उठा लाती है और तुम्हारे पैरों के पास रख देती है।
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हो सकता है तुम अपने शहर में घुसो और तुम्हे लगे कि शहर एक स्त्री की अनुपस्थिति का दूसरा नाम है। केदारनाथ सिंह
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उनके लिए इतिहास कोई बीती हुई चीज़ नहीं थी।
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“Sat in my room watching the day change to evening. The fire like a golden stag. Thinking of the past always; dreaming it over.”  Katherine Mansfield
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