पंकज सिंह गौर (@gour78) profile picture

LEARN TO GET IN TOUCH WITH THE SILENCE WITHIN YOURSELF AND KNOW THAT EVERYTHING IN LIFE HAS A PURPOSE.

Joined February 2012
Photo by पंकज सिंह गौर (@gour78)Photo by पंकज सिंह गौर (@gour78)Photo by पंकज सिंह गौर (@gour78)Photo by पंकज सिंह गौर (@gour78)Photo by पंकज सिंह गौर (@gour78)Photo by पंकज सिंह गौर (@gour78)Photo by पंकज सिंह गौर (@gour78)Photo by पंकज सिंह गौर (@gour78)Photo by पंकज सिंह गौर (@gour78)Photo by पंकज सिंह गौर (@gour78)
पंकज सिंह गौर retweeted
नमित मल्होत्रा की फिल्म में भगवान राम सुपर्णखा को पहचान नहीं पाते, ज़ाहिल भगवान को हनीट्रैप होते दिखा रहा हरे आम के पिल्ले जब मां सती, सीता माता का रूप धर के सामने आई तो भी भगवान ने उन्हें माता कहकर प्रणाम किया था। जो माता सती को पहचान ले वो एक राक्षसी के छद्म रूप में फंसेगा?
3
8
21
434
कोई कितनी भी बकैती करे लेकिन यह सत्य है कि १४और १९में बीजेपी कोपूर्ण बहुमत न मिला होता तो प्रभु श्री रामकामंदिर अयोध्या में नहीं बन सकता था।लोग कितना भी कहें कि कोर्ट के निर्णय से बना है। दूसरी सरकार होती तो निर्णय आता ही नहीं। मंदिर बननेके बाद ऐसी सुलगी कि धुआं बंद नहीं हो रहा
7
21
98
1,474
पंकज सिंह गौर retweeted
भारत त्योहारों का देश है.... हम या तो कोई त्योहार मना रहे होते है या किसी त्योहार की तैयारी में रहते है.. हमारे पूर्वजों ने हमे अच्छा बहाना दिया है. कि हम हर दुःख सुख भूलकर अपनो के बीच रहे और अपने रीति रिवाजों को जिए... हर पल एक समान तो नहीं लेकिन त्योहार अच्छे से मना लेना चाहिए
18
58
970
पंकज सिंह गौर retweeted
जब महात्मा बुद्ध अनपढ़ों की भूमि महाराष्ट्र पहुंचे तो वहाँ के लोगों ने कहा आली रे आली , ज्ञान की दीप आली। उसी दीपआली को बाद में ब्राह्मणों ने दीपावली कर दिया। आप सभी को दीपआली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
दिवाली तो बौद्धों का त्योहार है, मनुवादियों ने बस कॉपी करके अपना बता दिया। जब गौतम बुद्ध अपना घर-परिवार और कर्तव्य छोड़कर चले गए थे,तब नगरवासियों ने खुशी में दीप जलाए थे। उसी परंपरा को आज तक दिवाली के नाम पर मनाया जा रहा है।
3
29
1
201
3,544
पंकज सिंह गौर retweeted
भले ही रवींद्र जैन शरीर की आंखों से भगवान राम को नही देख सकते थे लेकिन उनके संगीत से उनकी भगवान राम में आस्था युगों तक अमर हो गई।
1
42
172
3,551
कवि के कहना का तात्पर्य यह है कि अब लौंडपन नहीं जीना है कोई विवाह करवाओ।
लौंडे त्योहारों में घर में बस उपद्रव कर सकते घर में असली रौनक तो बहु बेटियों से आती है ... घर में एक बेटी या बहू जरूर होनी चाहिए
1
10
358
मैने बारहवीं तक बहुत पटाखे फोड़े उसके बाद इच्छा नहीं होती थी। गांव में शरद पूर्णिमा को टेसू के विवाह में ही पटाखे फोड़े जाते थे दीपावली में नहीं। बाद में बंद कर दिया था लेकिन फिर इन ज्ञान देने वालों का स्यापा चालू हुआ तो अब दीपावली पर भी फोड़ने लगे हैं।
5
7
2
51
1,133
दिवाली में दीपों के जलने के बाद उनसे तराजू बना कर मिठाई किसने किसने तोली है 😊🤗
5
3
1
20
558
पंकज सिंह गौर retweeted
Get your ground water checked guys Use RO for everything even brushing, but try to drink better quality water 🙏🏻
1
6
170
मेरे लिए तुलसी कृत श्रीरामचरितमानस ही रामायण है जिसे मैं 10 की उम्र से पढ़ता आ रहा हूं। इसमें राम सहज, सरल, करुणामयी आडंबर रहित मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। भाषा भी जन जन को समझ में आने वाली है इसीलिए यह वाल्मीकि रामायण से ज्यादा पढ़ी जाती है। रामानंद सागर जी ने अपनी रामायण को इसी को+
3
8
45
1,810
आधार मानकर बनाया था। उनके बाद भी विभिन्न कहानियों में रामायण दिखाई गई लेकिन जो छाप रामानंद सागर जी की रामायण ने जनमानस में डाली वो और कोई नहीं डाल सका। भव्यता देने के लिए आप इधर उधर से आयातित सीने ही दे पाए हो। अब सवाल यह उठता है कि ४००० करोड़खर्च किसलिये किए यह देखनेजाएं या कथा
2
9
184
Too good 😊
This quoted post is unavailable.
4
26
पंकज सिंह गौर retweeted
आपको और आपके पूरे परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की कृपा सदैव बनी रहे आपका जीवन सुख, समृद्धि, सफलता और खुशियों से जगमगाता रहे। जय मॉं लक्ष्मी 🙏🚩 शुभ_दीपावली
3
9
13
220
मित्रों आप सभी को शुभ दीपावली।
6
3
23
253
पंकज सिंह गौर retweeted
कुछ तो बेहद खास रिश्ता है श्रीराम और हम हिंदुओं के बीच... सदियों से उनकी कथा सुनते आ रहे हैं सैकड़ों बार सुनने के बावजूद हर बार वही कहानी हमें हिम्मत और धैर्य देती है। भगवान के अनेक रूप हैं लेकिन श्रीराम सिर्फ आराध्य नहीं, हमारे अपने हैं… हमारे राजा, हमारे अभिभावक।
4
11
88
पंकज सिंह गौर retweeted
धनतेरस से लेकर दिवाली की रात तक बाजार से अपना जितना धन बचा पाए समझो आप पर उतनी ही लक्ष्मी माता की कृपा हुई है बाकी धनिया और झाड़ू खरीदने जैसे बहुत से टोटके ज्यादा भरोसेमंद नहीं है ।
1
4
16
310
पंकज सिंह गौर retweeted
यदि आपको प्राचीन भारत के उत्कर्ष स्वरूप में राजनीति , प्रेम ,मित्रता, युद्ध एवं नगरीय जीवन की विलासिता आदि का ठीक ठीक प्रदर्शन एवं उत्तम कथ्य एवं साथ में ही साहित्य के विविध अलंकारों एवं वाक्य विन्यास की जटिलता से झंकृत होना चाहते हैं तो डण्डिन कृत दशकुमारचरितम पढ़े। 😊😊🙏
2
1
4
388
पिछले चार दिनों के अथक मेहनत करने के उपरांत इस वर्ष दीपावली की साफ़ सफाई का कार्य आज स्नानागार और गुसलखाना साफ करने के बाद समाप्त हुआ। अब अगले वर्ष में फिर यही कार्य दोहराना पड़ेगा। अपनी पत्नी को प्यार करने वाला पति इस चक्र से बाहर नहीं निकल सकता है। यह सब अविवाहित नहीं समझ सकते।
4
4
1
26
507
भारत में कुछ मुख्य रामायण हैं - वाल्मीक रामायण, श्रीरामचरितमानस, अध्यात्म रामायण, आनंद रामायण, कम्बन रामावतारम, श्रीरंगनाथ रामायण, कृत्तिवासी रामायण, सप्तकांड रामायण आदि। जब इतनी रामायण हैं और सबमे अपने अपने हिसाब से चित्रण किया है। प्रसंग भी सब अलग अलग हिसाब से लिखे गए हैं। ++
2
3
18
455
जब इतनी रामायण हैं तो आप एक पर नहीं टिक सकते हैं। किसकी प्रमाणिक मानेंगे यह विचारणीय है। इसीलिए चित्रण करने के लिए सबको अपने तर्क मिल जाते हैं। जिसने जो रामायण पढ़ी होगी अगर उसके अनुसार नहीं हुआ तो उसकी भावनाएं आहत होंगी। बात वही है कि प्रामाणिकता किसकी माने।
1
1
66