ये भी खूब है!
अमेरिकी विदेश मंत्री रिलायंस की पेट्रोलियम रिफाइनरी के दौरे पर और ठीक उसी समय भारत के पेट्रोलियम मंत्री की एक विवादास्पद व्यक्ति के साथ तस्वीरें वायरल हो रही हैं।
CJP के दोनों नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को बेल मिल गई है।
दोनों की न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने उनकी रिहाई का आदेश दिया।
दोनों को 14 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद से वे पिछले सात दिनों से न्यायिक हिरासत में थे।
बाकी तो कोर्ट केस की मेरिट देखे, लेकिन इन दोनों की उम्र और इनके Gen Z होने या न होने का केस से क्या लेना-देना है?
देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO आज से खुल गया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी Jio Platforms पहली बार शेयर बाजार में उतर रही है। कंपनी IPO के जरिए करीब 30,200 करोड़ जुटाने की तैयारी में है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या अवसर हैं और किन जोखिमों पर ध्यान देना जरूरी है?
इसी बड़ी खबर और शेयर बाजार पर इसके संभावित असर को लेकर @News18India पर विस्तार से विश्लेषण।
तो अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज क्यों जा रहे हैं? इसके बारे में उन्होंने खुद जानकारी दी है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ वेनेजुएला से आने वाले अधिक कच्चे तेल की रिफाइनिंग को लेकर बातचीत करेगा।
भारत को तेल रिफाइनिंग के क्षेत्र में सुपरपावर बताते हुए कहा कि भारत के पास भारी कच्चे तेल (Heavy Crude Oil) को रिफाइन करने की क्षमता है और वह पहले भी ऐसा करता रहा है। ऐसे में वेनेजुएला से तेल का उत्पादन और आपूर्ति बढ़ने के साथ भारत वैश्विक ऊर्जा मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुंबई पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा-
21वीं सदी की दिशा, अच्छे और बुरे दोनों अर्थों में, इस बात से तय होगी कि इस क्षेत्र में क्या होता है।
आखिर यूरोप में क्यों भड़की है विरोध प्रदर्शनों की आग?
और इन प्रदर्शनों में ट्रंप का नाम क्यों सामने आ रहा है?
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यूरोप का एक और देश भीषण विरोध प्रदर्शनों की चपेट में।
दक्षिण-पूर्वी यूरोप में बाल्कन प्रायद्वीप पर बसा एक छोटा-सा देश अल्बानिया भी अब सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है।
राजधानी तिराना का दृश्य!
इस तरह की किस्मत सिर्फ फिल्मों में ही संभव होती है... लेकिन आज टाइगर श्रॉफ को रियल लाइफ में भी ऐसी किस्मत नसीब हुई।
फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत देश के कई बड़े शहरों में अराजकता की स्थिति।
वहां चल रहे प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने भयानक आगजनी, तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट की है।
कई जगह सरकारी इमारतों को भी निशाना बनाया गया है।
लिमोज शहर में प्रदर्शनकारियों ने करीब 143 साल पुराने ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगा दी।
फ्रांस में बढ़ती महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और शिक्षा व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है इसी को लेकर वहां लगातार प्रोटेस्ट हो रहे हैं।
CEC ज्ञानेश कुमार को दिवाली गिफ्ट के तौर पर नेहा बोरा और प्रशांत भूषण को सोनपापड़ी के दो-दो डिब्बे भिजवाने चाहिए।
कहां SIR, चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट को लेकर घमासान मचा हुआ था, और अब कहां पूरी बहस इस बात पर शिफ्ट हो गई है कि रेजीम चेंज का आखिर मतलब क्या होता है!
प्रशांत भूषण ने ‘रेजीम चेंज’ की बात शायद आवेश और माहौल के प्रभाव में की है। अगर नहीं तो बेहद आपत्तिजनक है। रेजीम चेंज का लगभग सार्वभौमिक अर्थ तख़्ता पलट है। यह सरकार-परिवर्तन से अलग है। हिंदी में रेजीम चेंज के ठीक समकक्ष शब्द मुझे नहीं मिला।
रेजीम चेंज अपने प्रचलित अर्थ में अलोकतांत्रिक, हिंसक तरीक़ों से शासन/शासकों को अपदस्थ करना होता है। भले ही आज की सरकार कितनी भी अलोकतांत्रिक, भ्रष्ट, दमनकारी और विभाजक हो भारत के संदर्भ में इसकी बात करना सरासर गलत है।
प्रशांत और इस विचार से सहमत जो भी लोग हों उन्हें अपने शब्द वापस लेने चाहिए। पुनर्विचार करना चाहिए।
राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाले Lindsey Graham Act के तहत भारत को फिलहाल छूट दे दी है।
ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर इस कानून के तहत लागू होने वाले अधिकांश नए प्रतिबंधों और टैरिफ को रोक दिया है। इसके पीछे उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रीय हितों का हवाला दिया है।
अब इसके पीछे असली कारण क्या है, इसका अंदाजा ही लगाया जा सकता है। क्या इसका कोई संबंध मार्को रूबियो की जामनगर यात्रा से है? क्या पता!








