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UGC रोलबैक नितांत आवश्यक!
शिक्षा रेत पर नहीं, चट्टान पर खड़ी हो।आरक्षण सुधार हो — न्याय और योग्यता साथ चलें।SC/ST Act सम्मान की ढाल रहे, निर्दोष पर तलवार न बने।
माँग है —
⭐ समान शिक्षा
⭐ समान क़ानून
#EqualEducation #EqualLaw #ReformNow #UGC
हर हर महादेव 🙏
शुभ दीपावली !
कार्तिक अमावस्या की अँधेरी रात।
न चाँद, न तारे।
फिर भी एक दीप जला —
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
जो दीप बुझे नहीं, वही असली ज्योति है।
हर हर महादेव 🙏
लोकसभा सचिवालय: महाराज ने DMCH के लिए ₹6 लाख + 300 एकड़ जमीन दी।
विधानसभा में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे: revisional survey में सिर्फ 227 एकड़।
300 और 227 में फर्क किसका है?
लोकसभा और विधानसभा के पटल पर अलग आंकड़े क्यों?
जमीन का हिसाब दो।
सीमांकन करो।
अतिक्रमण का खुलासा करो।
DMCH की जमीन किसी की जागीर नहीं।
@JPNadda
हर हर महादेव 🙏
जोशीमठ क्रैश के बाद @DGCAIndia ने दो पायलट और हर लेग की क्लीयरेंस जरूरी कर दी।
घटना के बाद एजेंसी जागती है, पहले क्यों नहीं?
चलाओ तो नियमों के साथ चलाओ।
नहीं चलाना तो बंद कर दो।
यात्रियों की जान तुम्हारे प्रॉफिट से ऊपर है।
@UCADAofficial @MoCA_GoI
हर हर महादेव 🙏
Brajesh Mishra retweeted
📍रामलीला मैदान, दिल्ली
“मैं इस मंच से देश के हर युवा को कह रहा हूँ, ज्ञानेश कुमार CEC पद से हटेगा, ज्ञानेश कुमार जेल जाएगा” : नेता विपक्ष राहुल गांधी जी
दलबदल कानून खत्म होना चाहिए।
जीतने के बाद पार्टी बदलनी है तो फिर से चुनाव लड़ो।
वही सीट चाहिए तो खर्च भी खुद उठाओ।
जनता भाजपा के खिलाफ वोट देती है, फिर विजयी को एनडीए में मिला लिया जाता है।
यह जनमत का खुला अपमान है।
लोकतंत्र में जनमत का अनादर करना घोर पाप है।
दलबदल = सीट खाली।
हर हर महादेव 🙏
#BREAKING | ज्ञानेश कुमार रात को सो नहीं पा रहा है- राहुल गांधी
@Chandans_live | abplive.com/live-tv
#Congress #INDIAAlliance #Protest #Delhi #RamlilaMaidan #GyaneshKumar #CEC #ABPNews
Brajesh Mishra retweeted
🔥 BREAKING: राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान ऐसा तर्क दिया कि पूरा मामला ही पलट गया!
राहुल गांधी ने सवाल उठाया:
"अगर बीजेपी ने 2024 का लोकसभा चुनाव सिर्फ 3% वोटों के अंतर से जीता था और अब आप कह रहे हैं कि 13 करोड़ हटाए गए वोटर अवैध थे, तो इसी तर्क से बीजेपी के वे सांसद भी अवैध रूप से जीते हुए माने जाएंगे, जिन्होंने 2024 का चुनाव जीता था!"
😂 एक तर्क और सत्ता पक्ष के दावों पर सीधा सवाल!
राहुल गांधी के इस बयान ने चुनावी प्रक्रिया, वोटर लिस्ट और लोकतंत्र की निष्पक्षता पर एक नई बहस छेड़ दी है।
और उनकी बॉडी लैंग्वेज? बिल्कुल शांत, आत्मविश्वास से भरी और बेबाक! 🗿
जब सवाल सीधे लोकतंत्र पर हो, तो जवाब भी सीधे होने चाहिए!
#RahulGandhi #GyaneshKumar #ElectionCommission #Democracy #BREAKING
भोजन से भी महत्वपूर्ण लोकतंत्र है।
दासत्व कोई मूर्ख ही माँगता है।
जो आज़ादी और मतदान बेचकर मुफ़्त और विशेषाधिकार माँगते हैं, वे खुद को और अपनी अगली पीढ़ी को दास बना रहे हैं।
भूख गुलामी से नहीं मिटती — मतदान, समान कानून, समान शिक्षा और मेधा से मिटती है।
हर हर महादेव 🙏
Brajesh Mishra retweeted
LIVE: The Public Impeachment of Gyanesh Kumar | 10 Rajaji Marg, New Delhi nitter.gq/i/broadcasts/2RezPKlmJ…
Brajesh Mishra retweeted
अबतक 6 राज्यों में हुए SIR में सिर्फ 1600 विदेशी नागरिक मिले। जिसमें 545 नेपाली नागरिक निकले !
हिंदुस्तान टाइम्स का बड़ा खुलासा
CBI traps Income Tax Inspector in Mumbai accepting ₹15 lakh bribe (original demand ₹20 lakh) to close a benami case.
Additional ₹11 lakh cash recovered. Total: ₹26 lakh.
A junior IRS/IAS officer’s basic salary is only ₹56,100/month.
The ₹15 lakh bribe equals more than 26 months of that basic pay.
Supreme Court (16 Oct) already said bribe demand is not official duty.
I flagged pending Demand-verified cases on 21, 22 & 24 Oct:
nitter.gq/onlymishra/status/2112…
nitter.gq/onlymishra/status/2113…
nitter.gq/onlymishra/status/2113…
Action is the only answer.
@CBIHeadquarters
#CBI #CorruptionFreeIndia #Accountability
Har Har Mahadev 🙏
नॉर्थ ब्लॉक में कल आग — वेल्डिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट।
अलीपुर में आग — हजारों EVM जल गए।
दोनों जगह आग लगी।
एक में लापरवाही, दूसरे में सबोटेज की आशंका।
प्राकृतिक आपदा में जवाबदेही नहीं होती।
मानवीय भूल या साजिश में जवाबदेही अनिवार्य होती है।
सवाल दोनों जगह एक ही है —
कौन जिम्मेदार था, और कार्रवाई कब होगी?
हर हर महादेव 🙏
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 2024 में अधिनियम के बाद कीमत नियंत्रण व अतिक्रमण रोकने के लिए समर्पित PERA फोर्स बनी, जो 2025 से सक्रिय है।
भारत में Essential Commodities Act और राज्य मशीनरी है, पर कोई समर्पित प्रवर्तन प्राधिकरण नहीं। चीन में भी Price Law से आवश्यक वस्तुओं पर नियंत्रण है।
महंगाई के मद्देनजर भारत सरकार और राज्य सरकारों को कागजों से आगे बढ़कर जमीन पर प्रभावी कार्रवाई के लिए ऐसा तंत्र बनाना चाहिए। असली फर्क लागू करने में पड़ता है।
हर हर महादेव 🙏
#Inflation #PriceControl #IndianGovernment
अरुणाचल में चीन के सैनिकों के घुसपैठ की खबर सोशल मीडिया में दिख रही है और कुछ आईटीबीपी के जवान दिल्ली में आम जनता के पीछे प्रदर्शन रोकने के लिए तैनात हैं !
जिस काम के लिए जो एजेंसी बनी उनसे से तो वही काम करवाने चाहिए न? आपकी राय?
हर हर महादेव 🙏
रिश्वत माँगना अब आधिकारिक कर्तव्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 793+374 मामले FIR क्यों नहीं?
सर्वोच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर को साफ शब्दों में कह दिया है कि रिश्वत माँगना शुद्ध आपराधिक कृत्य है। धारा 17A का बचाव अब इसमें लागू नहीं होता। फिर भी राजस्थान में 793 और महाराष्ट्र में 374 शिकायतें Demand Verification के बाद भी FIR या आगे की कार्रवाई के इंतजार में पड़ी हैं। जब कोर्ट ने अनुमति का बहाना खत्म कर दिया, तो जांच एजेंसियाँ और किस बहाने का इंतजार कर रही हैं?
16 अक्टूबर का फैसला: तेजाराम मामला -
राजस्थान पुलिस का कांस्टेबल तेजाराम सिरोही के डीएसपी कार्यालय में तैनात था। साथी कांस्टेबल देवेंद्र कुमार की 22 अप्रैल 2021 की ई-मेल शिकायत पर 4 जून 2021 को FIR दर्ज हुई। आरोप था कि उसने एसपी के नाम पर ₹1.5 लाख रिश्वत माँगी। 1 सितंबर 2021 को गिरफ्तारी हुई। धारा 19 के तहत अभियोजन स्वीकृति 8 दिसंबर 2023 को मिली और 19 जनवरी 2024 को चार्जशीट दाखिल हुई। 12 सितंबर 2024 को ACB पाली के विशेष न्यायाधीश ने धारा 7 के तहत आरोप तय किया। हाईकोर्ट ने 26 मार्च 2025 को संशोधन याचिका खारिज कर दी।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया) ने 16 अक्टूबर 2026 को अपील खारिज करते हुए स्पष्ट कहा: “रिश्वत माँगना एक शुद्ध आपराधिक कृत्य है, जो आधिकारिक कार्यों से जुड़ा नहीं है और न ही यह किसी सिफारिश या निर्णय से संबंधित है।” धारा 17A का संरक्षण केवल उन मामलों तक सीमित है जहाँ अपराध आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में लिए गए निर्णय या सिफारिश से जुड़ा हो। प्रावधान का “omnibus” लागू होना नहीं हो सकता।
इस फैसले ने उन बहानों को समाप्त कर दिया है जिनके तहत एजेंसियाँ Demand Verification के बाद भी विभागीय अनुमति का हवाला देकर मामले रोके रखती रहीं।
लंबित आंकड़े और जवाबदेही-
सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार राजस्थान में 30 सितंबर 2026 तक लगभग 793 शिकायतें ऐसी स्थिति में थीं जहाँ अभियोजन स्वीकृति या आगे की कार्रवाई लंबित थी। महाराष्ट्र में अप्रैल 2025 की RTI (कार्यकर्ता जीतेंद्र घाडगे) के मुताबिक धारा 17A के तहत 374 स्वीकृतियाँ लंबित थीं, जिनमें से 371 में 120 दिन से अधिक की देरी थी।
अब जहाँ Demand Verification हो चुका है, वहाँ FIR दर्ज करना ACB/CBI की प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है। अनुमति का इंतजार वैधानिक बाध्यता नहीं रह जाता। PC Act में मूल अपराध “Demand” ही है। Recovery सहायक तत्व है। पुराने मामलों में recovery की जटिलता को कार्रवाई रोकने का औचित्य नहीं बनाया जा सकता।
गोपनीयता भंग और निष्क्रियता-
यदि Demand Verification के बिना विभाग को पत्र लिखकर शिकायतकर्ता की पहचान फैल गई हो, तो यह गंभीर गोपनीयता भंग है। इससे शिकायतकर्ता की सुरक्षा दांव पर लगती है और सबूत प्रभावित होते हैं। ऐसे मामलों में एजेंसी पर आंतरिक जवाबदेही तय होनी चाहिए।
Demand verified होने के बावजूद FIR न होना तीन व्याख्याएँ देता है: - एजेंसी की निष्क्रियता, बाहरी दबाव/राजनीतिक हस्तक्षेप, या प्रक्रियात्मक लापरवाही। पूर्व CBI निदेशक एम. नागेश्वर राव ने सार्वजनिक रूप से जांच एजेंसियों पर प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव के प्रभाव का जिक्र किया है। उनके जैसे अनुभव वाले अधिकारियों के बयान इस संदर्भ में प्रासंगिक हैं।
अब क्या किया जाए-
1. Demand Verification हो चुके मामलों की सूची, FIR दर्ज मामलों और लंबित मामलों की स्थिति सार्वजनिक करें।
2. जहाँ Demand verified है, वहाँ 7–15 दिनों के भीतर FIR दर्ज करने का स्पष्ट लक्ष्य घोषित करें।
3. गोपनीयता भंग के मामलों में स्वतंत्र जाँच कर जवाबदेही तय करें।
4. Recovery की आशंका को कार्रवाई स्थगित करने का बहाना न बनाएँ — पहले FIR, फिर recovery की रणनीति।
5. मजबूत साक्ष्य वाले मामलों में ट्रैप और प्रोएक्टिव ऑपरेशन तेज करें।
सुप्रीम कोर्ट ने बहाना खत्म कर दिया है। अब राजस्थान के 793 और महाराष्ट्र के 374 मामले सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि सार्वजनिक विश्वास की परीक्षा हैं। जहाँ Demand verified है, वहाँ FIR दर्ज करके और जहाँ गोपनीयता भंग हुई है वहाँ जवाबदेही तय करके ही यह साबित होगा कि कानून का राज चल रहा है, न कि बहानों का। ACB और CBI अब चुप नहीं बैठ सकतीं।
स्रोत:-
• Tejaram v. State of Rajasthan, 2026 INSC 1147 (16 अक्टूबर 2026), सुप्रीम कोर्ट
• सार्वजनिक रिपोर्ट/RTI: राजस्थान ~793 (30 सितंबर 2026); महाराष्ट्र 374 (अप्रैल 2025, जीतेंद्र घाडगे RTI)
• पूर्व CBI निदेशक एम. नागेश्वर राव के सार्वजनिक बयान !
हर हर महादेव 🙏
#CorruptionFreeIndia #SupremeCourt #ACB #CBI #FIR











