अल मुहन्नद के फतवा से ओलमा-ए-देवबंद काफ़िर हैं ...!🤔
अल मुहन्नद के फतवे की हक़ीक़त क्या है?
आख़िर अल मुहन्नद में ऐसा क्या लिखा है और उलमा ए देवबंद के अक़ायद और इस किताब के दरम्यान क्या ताल्लुक है?
وَلِلَّهِ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَإِلَى اللَّهِ الْمَصِيرُ ٤٢
"اور اللہ ہی کے لیے ہے سلطنت آسمانوں اور زمین کی اور اللہ ہی کی طرف پھر جانا۔"
और अल्लाह ही के लिए है सल्तनत आसमानों और ज़मीन की और अल्लाह ही की तरफ़ फिर जाना है
सूरह अन-नूर - आयत 42 📚
Farman-e-Aakhiri Nabi ﷺ
Mafhoome Hadees
"Jo apne walidain (maa-baap) ke sath achha bartav karta hai uske liye khushkhabri hai ki Allah Paak uski umr mein izaafa kar deta hai"
▪️(Mustadrak Jild 05, Safah 213, Hadees 7339.)
*दिवाली की मुबारकबाद देना और दिवाली की मिठाई*
*मस्अला* : होली दिवाली बद-मज़हबों के त्योहारों पर हिंदुओं को मुबारकबाद देना। सख़्त हराम, और कुफ़्र की तरफ़ ले जाने वाला काम है।
*मस्अला* : अगर अपनी खुशी से मुबारकबाद दे या शरीक हो या उनके इस काम को अच्छा समझे। तो
*मस्अला* : मुसलमान को होली दिवाली के इश्तिहार, पोस्टर वगैरा छापना। यह सब भी हराम है। और उसका पैसा लेना भी हराम और गुनाह है।
*मस्अला* : हिंदुओं के त्यौहार की मिठाई उनके त्यौहार के दिन लेना जाइज़ नहीं है। कि यह एक तरीके से उसमें शरीक होना माना जाएगा। किसी और दिन ले सकते हैं।
बिहार में RSS आतंकवादी संगठन से जुड़े चार आतंकियों ...चंदन तिवारी, अभिषेक तिवारी, लालटू कुमार और सरस कुमार से 𝟒𝟒,𝟎𝟎𝟎 जिंदा कारतूस पकड़े गए !
लेकिन गोदी मीडिया के दंगाई पत्तलकार खामोश हैं,और गोदी मीडिया के किसी भी न्यूज चैनल पर कोई डिबेट नहीं ....!!
*और ज़िंदगी में कभी कोई ऐसा वक़्त आए...*
"कि आप महसूस करें कि तन्हा रह गए हैं,और कहीं अपने भी अज़नबी की जमात में नज़र आने लगे हैं...उस वक़्त फिर दिल, रूह, ज़ुबान को एक करके समझ लेना -
जब सारी दुनिया साथ छोड़ जाती है,तो रब की रहमतें उस वक़्त भी साथ रहती हैं,और
*अज़ान के वक़्त बातें करना*
अज़ान के वक़्त बातों में मशगूल रहना एक आम बात हो गई है। अवाम तो अवाम, बाज़ ख़वास अहले इल्म तक इसका ख़याल नहीं रखते, जबकि हदीस शरीफ़ में है:
“जो अज़ान के वक़्त बातों में मशगूल रहे, उस पर ख़ात्मा बुरा होने का ख़ौफ़ है।”
मसअला यह है कि जब अज़ान हो, तो
उतनी देर के लिए न सलाम करे, न सलाम का जवाब दे, न कोई और बात करे। यहाँ तक कि क़ुरआन मजीद की तिलावत में अगर अज़ान की आवाज़ आए, तो तिलावत रोक दे और अज़ान ग़ौर से सुने और जवाब दे।
रास्ता चलने में अज़ान की आवाज़ आ जाए, तो उतनी देर खड़ा हो जाए, सुने और जवाब दे। अगर चन्द अज़ानें सुने,
*Farman-e-Mufti Ahmed Yaar Khan Rehmatullah Alaih*
Neki karne wala, karane wala,
batane wala aur mashwara dene wala
sab sawab ke haqdaar hain.
*(Mirat, Jild 1, Safah 193)*
📖 قرآنِ پاک 📖
هُنَّ لِبَاسٌ لَّكُمْ وَأَنتُمْ لِبَاسٌ لَّهُنَّ
اردو ترجمہ:
عورتیں تمہارا لباس ہیں اور تم ان کا لباس ہو۔
📚 سورۃ البقرہ، آیت 187
" नज़्म बेनमाज़ियों "
करते नहीं नमाज़ अदा बेनमाज़ियों,
जाती रही है शर्म-ओ-हया बेनमाज़ियों।
ग़फ़लत में सारी उम्र गँवाई है किस लिए,
खो के नमाज़ क्या ही मिला बेनमाज़ियों।
आक़ाए दो जहाँ रहे अमली नमाज़ के,
होते न क्यों दिल से फ़िदा बेनमाज़ियों।
जन्नत की लज़्ज़तों का, शराबन तहूर का
तुमको मगर नहीं है मज़ा बेनमाज़ियों।
ख़ालिक़ का हुक्म टालो, उम्मीद-ए-जिना है फिर,
सोचो तो इतना बहरे-ख़ुदा बेनमाज़ियों।
जाता रहा है ख़ौफ़-ए-ख़ुदा दिल से यक़लम,
करते नहीं जो फ़र्ज़ अदा बेनमाज़ियों।
दोज़ख़ की आग से कलेजा है काँपता,

