Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ (@AzamkhanUP) header
Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ (@AzamkhanUP) profile picture

Former MP of Rampur AzamWadi... 🎊 Fan page of Azam khan sahab

Joined July 2022
Photo by Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ (@AzamkhanUP)Photo by Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ (@AzamkhanUP)Photo by Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ (@AzamkhanUP)Photo by Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ (@AzamkhanUP)Photo by Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ (@AzamkhanUP)Photo by Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ (@AzamkhanUP)Photo by Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ (@AzamkhanUP)Photo by Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ (@AzamkhanUP)
Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ retweeted
भाई अब्दुल्ला आजम घर के लिए निकल गए है
1
4
24
281
आज़म खान साहब को ED की 15 गाड़ियां गाज़ियाबाद लेकर निकली..!! बाकी आज़म खान साहब के छोटे बेटे अब्दुल्लाह आज़म साहब घर के लिए निकले..!!
1
13
1
39
683
जेल से रिहा होते ही आज़म खान साहब को ED अपने साथ ले गयी है आज़म साहब को मुसलमान होने की सज़ा मिल रही है, आप सब उनकी सलामती की दुआँ करें..!!
4
50
2
169
2,222
Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ retweeted
पत्रकार :- जेल से बाहर आने पर क्या कहोगे..? आज़म खान :- कहने को बचा क्या है मुसलमान होने की सज़ा मिल रही है, हमने जो यूनिवर्सिटी बनाई उसकी सज़ा मिल रही है
3
25
2
95
1,450
रामपुर जेल से बाहर निकलते ही ED नें आज़म खान साहब को हिरासत मे लिया जेल से निकलते वक़्त उनकी एक झलक पर पब्लिक मे शोर उमड़ गया
1
13
65
1,248
रामपुर जेल से रिहा होते ही आज़म खान साहब को ED नें हिरासत में लिया..!! आप सब दुआँ करे..!! #Azamkhan
5
20
1
47
1,323
Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ retweeted
आज़म खान साहब आज़ाद हो गए, वो इस सत्ता के आगे नहीं झुके, अल्लाह नें उनके हक़ मे फैसला लिया @AzamkhanUP
3
21
2
132
1,770
Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ retweeted
तमाम आज़म खान साहब के चाहने वालो को आज़म खान साहब की रिहाई की बहुत बहुत मुबारकबाद..!!
4
20
69
1,008
जेल के ताला टूट गया शेर हमारा छूट गया #Azamkhan
17
75
1,526
Congratulations आज़म खान साहब की रिहाई हो चुकी है अब उत्तरप्रदेश मैं समाजवादी पार्टी और मजबूती से लड़ेगी
5
13
72
1,742
रामपुर जेल के बाहर आज़म खान साहब की रिहाई का इंतजार कर रही भीड़..!! क्या आज रिहाई हो पाएगी..!!
7
32
858
वोट देगा जहिर.. राज्यसभा जाएगा अहीर..?
1
9
13
709
Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ retweeted
"ओवैसी सरकार नहीं बना सकता!" जब भी चुनाव में AIMIM यानी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के उतरने की बात आती है, सबसे पहले विरोध शुरू हो जाता है। सवाल उठाए जाते हैं कि ओवैसी चुनाव क्यों लड़ रहा है? तेलंगाना से बाहर क्यों आ रहा है? फिर बी-टीम और वोटकटवा होने के आरोप लगाए जाते हैं। कुछ तथाकथित समझदार लोग यह सवाल भी करते हैं कि मान लीजिए, ओवैसी को वोट दे भी दिया और उनकी पार्टी पाँच-दस सीटें जीत भी गई, तो उससे कौन-सी सरकार बन जाएगी? लेकिन इन लोगों को शायद यह समझ नहीं आता कि मजलिस की राजनीति का मकसद सिर्फ सरकार बनाना नहीं, बल्कि मुसलमानों को अपनी स्वतंत्र राजनीतिक आवाज़ देना, उनके सवालों को ताकत देना और सरकारों पर दबाव बनाकर अपने मुद्दों पर फैसले करवाना भी है। ज़रा सोचिए! अगर सरकार बनाने की क्षमता ही चुनाव लड़ने की पहली शर्त है, तो आज के दौर में देश के कितने राजनीतिक दल इस कसौटी पर खरे उतरेंगे? मोदी के साथ भी अनेक क्षेत्रीय, भाषाई और जाति आधारित राजनीति करने वाले दल हैं, तो दूसरी ओर विपक्षी गठबंधनों में भी ऐसे कई दल शामिल हैं, जो अपने दम पर सरकार नहीं बना सकते। फिर अकेले सरकार न बना पाने का तर्क सिर्फ AIMIM के खिलाफ ही क्यों इस्तेमाल किया जाता है? ओवैसी की पार्टी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती, यह बताने के लिए किसी राजनीतिक विशेषज्ञ की जरूरत नहीं है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या मजलिस की राजनीति का उद्देश्य सिर्फ सत्ता हासिल करना है? 'मजलिस' की ताकत सिर्फ उसकी सीटों में नहीं, बल्कि उसकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान, बेबाक आवाज़ और अपने मुद्दों पर समझौता न करने की क्षमता में भी है। संयुक्त आंध्र प्रदेश से लेकर तेलंगाना राज्य के गठन के बाद तक 'मजलिस' ने अपनी राजनीतिक भूमिका बनाए रखी है। उसके पास राज्य और केंद्र की सत्ता में हिस्सेदारी के अवसर भी आए, लेकिन 'मजलिस' ने अपनी राजनीति को सिर्फ मंत्री पद या सरकार में शामिल होने तक सीमित नहीं रखा। उसकी पहचान एक ऐसे राजनीतिक संगठन की रही है, जो अपने मुद्दों के आधार पर सरकार का समर्थन भी करता है और जरूरत पड़ने पर उसकी नीतियों पर सवाल भी उठाता है। यही मजलिस की राजनीति का बुनियादी पहलू है। हर राजनीतिक दल का उद्देश्य केवल सरकार बनाना या मंत्री पद हासिल करना नहीं होता। कुछ दल सत्ता में भागीदारी से आगे बढ़कर सरकारों पर राजनीतिक दबाव बनाते हैं, अपने समुदाय के सवालों को मजबूती से उठाते हैं और नीतिगत फैसलों को प्रभावित करते हैं। 'मजलिस' की राजनीति इसी स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका का उदाहरण है। मुसलमानों को अपनी राजनीतिक आवाज़ के लिए हमेशा दूसरी पार्टियों के नेतृत्व और उनकी चुनावी रणनीति पर निर्भर रहना पड़े, यह जरूरी नहीं है। अपनी पार्टी, अपना नेतृत्व और अपने राजनीतिक फैसले- यह भी लोकतंत्र में हिस्सेदारी का एक महत्वपूर्ण रूप है। 'मजलिस' ने इसी स्वतंत्र पहचान के साथ अपनी राजनीति को आगे बढ़ाया है। असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकारों और अल्पसंख्यकों से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाया है। वहीं अकबरुद्दीन ओवैसी ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की विधानसभा की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है। यह भी 'मजलिस' की राजनीति की खासियत है कि राजनीतिक समर्थन का मतलब हर मुद्दे पर सरकार के सामने झुक जाना नहीं है। सरकार किसी फैसले पर सही है तो समर्थन और गलत है तो विरोध- यही मुद्दा आधारित राजनीति की पहचान है। तेलंगाना में अल्पसंख्यकों के कल्याण, बजटीय प्रावधानों और दूसरी सरकारी नीतियों पर 'मजलिस' की भूमिका उसके राजनीतिक प्रभाव की चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सीमित संख्या में विधायक होने के बावजूद राज्य की राजनीति में उसके नेताओं को मिलने वाला महत्व यह दिखाता है कि राजनीतिक प्रभाव हमेशा संख्या के सीधे अनुपात में नहीं होता। जहाँ 'मजलिस' अपने समर्थन और राजनीतिक संवाद के जरिए सरकारों को प्रभावित करती है, वहाँ उसकी भूमिका को केवल सात विधायकों की संख्या तक सीमित करके नहीं समझा जा सकता। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि 'मजलिस' की हर नीति सही है या उसके नेताओं से कोई गलती नहीं होती। 'मजलिस' के नेता भी इंसान हैं, फरिश्ते नहीं। उनमें राजनीतिक कमियाँ और गलतियाँ हो सकती हैं। लेकिन किसी पार्टी की कमियों को गिनाते हुए उसकी राजनीतिक भूमिका और उपलब्धियों को नकार देना भी निष्पक्षता नहीं है। 'मजलिस' की आलोचना कीजिए, लेकिन उसकी स्वतंत्र मुस्लिम राजनीतिक आवाज़ को कमजोर करने के लिए नहीं; बल्कि उसकी राजनीति को और प्रभावी बनाने के लिए। आखिर किसी राजनीतिक दल का मूल्यांकन सिर्फ इस आधार पर क्यों हो कि वह सरकार बना सकता है या नहीं?
1
14
1
24
693
Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ retweeted
RSS, your grave will be dug on the soil of Jamia. Jamia students raised the slogan.
7
19
3
55
918
We have Dr Swaleha Dr Umm Miran Dr Saud Dr Javed Dr Chand Dr Ashiq Dr Usman Dr Waseem Dr Saifi @Swaleha_2 @Umm_e_Meeran @AKHTAR100375 @IAasMohd @Wasim_Shaikh22 @ChaandK007 @AzamkhanUP @spyder007 @ashiqecool
7
12
21
683
Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ retweeted
आज आजम खान साहब जेल से बाहर आएंगे..!! वाकई वो एक शेर दिल लीडर है,अगर शेर अगर सर्कस में चला जाए, तो वो सिर्फ मनोरंजन के लिए रह जाता है..!!
2
8
43
927
Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ retweeted
🚨 Another Controversy Over Haji Malang Dargah! Anurag Singh and other members of Sakal Hindu Samaj reached Haji Malang Dargah and raised slogans demanding the “liberation” of Malang Gad. How long will Muslim religious sites continue to be dragged into controversies? The faith, identity, and traditions associated with religious places must be respected. The Constitution guarantees every citizen the right to religious freedom and the protection of their faith. The administration must act impartially, uphold the rule of law, and ensure that the religious sentiments of Muslims are not undermined. Respect religious freedom. Protect Haji Malang Dargah. #HajiMalangDargah
1
18
2
29
1,143
इसलिए हमारे इमाम नें फ़रमाया " अपनी बेटियों को शातिर सहेलियों से दूर रखों, वरना इज़्ज़त के साथ साथ ईमान जाने में देर नहीं लगती है..!!
142
155
8
589
96,417
कल जेल से बाहर आएंगे आज़म खान साहब और उनके बेटे अब्दुल्लाह आज़म खान..!! उत्तरप्रदेश इलेक्शन इस बार बिहार से भी ज्यादा रुख बदल रहा है..!!
4
8
2
32
1,109
Azam Khan ᵖᵃʳᵒᵈʸ retweeted
Two Muslim men, Shahid Akhtar and Saad Mohammad, were lynched by a mob in West Bengal. Yet, serious questions remain unanswered. Three people have been arrested in connection with the killings, while seven others were arrested in a separate alleged cattle theft case. But who mobilised the mob? Why has there been no clear action against those who set vehicles on fire? And why was the footage of the incident deleted? Arrests alone are not justice. Every perpetrator must be held accountable, and the families of Shahid Akhtar and Saad Mohammad deserve justice.
2
87
1
127
1,598