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ठीक है आप असदुद्दीन ओवैसी साहब से गठबंधन मत करिए, डॉ अय्यूब साहब की पीस पार्टी से कर लीजिए
डॉ अय्यूब साहब ने तो कभी कोई आक्रामक बयान भी नहीं दिया था, उनके तो विधायकों को भी आपने तोड़ लिया था..!
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मन्दिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनी इसका प्रमाण है
मस्जिद तोड़कर मन्दिर बनाया गया यह दुनिया ने देखा
कल को अगर कोई मन्दिर को मस्जिद में कन्वर्ट करें तो उचित होगा?
इतिहास बहुत लम्बा है मुसलमानो का कि हमनें जगह फतह की लेकिन बर्बाद कुछ नहीं किया आगे भी बर्बाद नहीं होगा
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AIMIM प्रमुख @asadowaisi मुसलमानों के नेता बनना चाहते नहीं, ऑलरेडी है। इनको छोड़ हम मुसलमानों के पास फिलहाल कोई दूसरा लीडर नहीं, जो नेशनल लेवल पर हमें रिप्रेजेंट कर सके।
ऐसे में हम मुसलमानों के पास @aimim_national छोड़ दूसरा ऑप्शन नहीं।
अबे R&D के
103 MLA, 37 MP, 10 MLC
अपनी गांव मरवाने के लिए ले के हो
भैंस तो आसानी से ढूंढा लिए थे
राम मंदिर चोरी पर तो सड़क पर नौटंकी कर रहे थे
भैया जी डिटेन हुए तो सब सड़क पर आ गए थे
अब मुसलमान आज़म ख़ान के लिए ओवैसी बैठे और तुमलोग 93% वोट मुसलमानों का लो
चादरमोड
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पहले यूपी में सत्ता नहीं है इसलिए कुछ नहीं कर पा रहे हैं।फिर कहेंगे केंद्र में सत्ता नहीं है इसलिए कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
आज़म ख़ान थे आज़म हैं आज़म ख़ान रहेंगे।
कुछ दिन पहले ही किसी ने कहा था।बिना प्लानिंग के तो इतना बड़ा दावा नहीं करेगा।
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शर्मिंदा कर रहे हैं महोदय।
वक्त तो बदल जाते हैं।
तख़्त बदल जाते हैं।
लेकिन नियत इंसाफ़ की होनी चाहिए।फाइल आगे बढ़ाने की नहीं।
आज के हुक्मरानों को याद रहे जब वक़्त बदल जाता है तो तख़्त बदल जाता है।
आदरणीय आज़म ख़ान साहब के साथ मुक़दमों की जो साज़िश की जा रही है, उसे पूरा देश ही नहीं पूरी दुनिया देख रही है।
किसी उम्र दराज़ को इस तरह के बेमानी मुक़दमों में फँसाकर बार-बार जेल में डालना एक बेहद कायराना हरकत है।
आज की सत्ता जिस ग़लत रवायत को हवा दे रही है, हवा बदलने पर वो ख़ुद उसकी शिकार होगी। तब भागते नहीं बनेगा।
नाइंसाफ़ी जब हद से गुज़र जाती है तो जुल्म करनेवाले के लिए ही कहर बन जाती है।
बेहद निंदनीय!
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काफी दिनों से मैं एक बात गौर कर रहा हूँ कि आम मुसलमानों के बीच असदुद्दीन ओवैसी साहब की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। आज बड़ी तादाद में मुसलमान उन्हें अपना सियासी नेता मानने लगे हैं। मेरा मानना है कि आम मुसलमानों का एक बड़ा हिस्सा अब अपनी सियासी आवाज़ और हिस्सेदारी को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो चुका है।
मुसलमानों को अगर दो हिस्सों में समझें, तो एक तरफ आम मुसलमान हैं और दूसरी तरफ सियासत करने वाले मुसलमान। दिलचस्प बात यह है कि आम मुसलमान ओवैसी साहब को स्वीकार कर रहा है, लेकिन कुछ सियासी लोगों को आज भी उन्हें स्वीकार करने में परेशानी हो रही है। कोई बी टीम कहता है, कोई सी टीम, तो कोई बीजेपी की टीम बताने लगता है।
अब सवाल यह है कि आखिर बी टीम है कौन? कभी कांग्रेस, सपा को बीजेपी की बी टीम बताती है, कभी सपा कांग्रेस को बीजेपी का फायदा पहुँचाने वाली पार्टी बताती है। कभी बसपा पर यही इल्जाम लगता है, तो कभी चंद्रशेखर आजाद की पार्टी पर। यानी चुनाव आते ही हर पार्टी के पास दूसरी पार्टी को बी टीम बताने का सर्टिफिकेट तैयार रहता है! 😂
लेकिन अब आम मुसलमान हर बार इन सियासी जुमलों में आने वाला नहीं है। उसे भी समझ में आने लगा है कि लोकतंत्र में अपनी आवाज़, अपनी नुमाइंदगी और अपनी हिस्सेदारी होना कितना जरूरी है।
और जो लोग कहते हैं कि ओवैसी साहब वोट काटते हैं या बीजेपी को फायदा पहुँचाते हैं, उनसे मेरा एक सीधा सा सवाल है।
अगर वाकई आपको लगता है कि ओवैसी साहब की वजह से आपका नुकसान हो रहा है, तो फिर उन्हें गठबंधन में शामिल क्यों नहीं कर लेते?
ओवैसी साहब तो बार-बार गठबंधन की बात करते हैं। आप उन्हें 15-20 सीटें देकर देख लीजिए। अगर आपको इतना ही भरोसा है कि आप बीजेपी को हराना चाहते हैं, तो फिर सीटें देने में इतनी परेशानी क्यों है? या फिर परेशानी बीजेपी को हराने से ज्यादा अपनी कुर्सी और हिस्सेदारी बचाने की है?
अब मुसलमानों को हर चुनाव में बीजेपी का डर दिखाकर वोट लेने का पुराना तरीका ज्यादा दिन चलने वाला नहीं है। मुसलमान अब सिर्फ डर की सियासत नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी की बात भी करेगा।
इंशाअल्लाह, 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बहुत कुछ साफ कर देगा। जो लोग आज ओवैसी साहब को हल्के में ले रहे हैं, उन्हें चुनाव के नतीजे आने तक इंतजार करना चाहिए।
क्योंकि अब सवाल सिर्फ किसी पार्टी को जिताने या हराने का नहीं है, सवाल है अपनी सियासी पहचान, अपनी आवाज़ और अपनी हिस्सेदारी का।
हिस्सेदारी भी चाहिए और इज्जत भी चाहिए। अब सिर्फ वोट बैंक बनकर नहीं रहना है!
#AsaduddinOwaisi #AIMIM #UPElection2027 #MuslimPoliticalRepresentation #Hissedari #ApniAwaaz #InshaAllah
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AIMIM बीजेपी की B टीम हो या C टीम, हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं ऐसा क्यों कह रहा हूँ, इसकी एक वजह है।
चार दिन पहले बिहार के मोतिहारी ज़िले के एक सिंगर संजय सिंह द्वारा मुस्लिम लड़कियों को लेकर कथित तौर पर अभद्र गाना गाया गया। इस मामले में सेक्युलर पार्टी के मुस्लिम नेता खामोश रहे, किसी ने खुलकर विरोध करने की ज़हमत नहीं उठाई।
लेकिन उसी वक्त AIMIM के ज़िलाध्यक्ष डॉ. शमीमुल हक़ साहब ने इस मामले का पुरज़ोर विरोध किया और गायक के ख़िलाफ़ FIR दर्ज कराई।
अब आप ही बताइए, जब हमारे समाज की बहन-बेटियों के सम्मान की बात आती है, तो कौन सड़क पर उतरकर आवाज़ उठा रहा है? कौन कार्रवाई के लिए आगे आ रहा है?
अगर AIMIM को बीजेपी की B टीम कहने के बावजूद वह हमारी बहन-बेटियों की इज़्ज़त और हिफ़ाज़त के लिए खड़ी होती है, हमारे हक़ और सम्मान की लड़ाई लड़ती है, तो हमें ऐसी B टीम भी मंज़ूर है।
**हमें सियासी तमग़ों से ज़्यादा अपने समाज की इज़्ज़त, सुरक्षा और हक़ की फ़िक्र है।**
डॉ. शमीमुल हक़ साहब, इस मज़बूत पहल के लिए दिल से शुक्रिया। ❤️
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जेल से रिहा होते ही आज़म ख़ान साहब को ED अपने साथ ले गई। आखिर आज़म ख़ान साहब के साथ इतनी नाइंसाफ़ी क्यों?
ऐसा महसूस होता है कि उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है। आज़म साहब को मुसलमान होने की सज़ा दी जा रही है।
अल्लाह तआला से दुआ है कि आज़म ख़ान साहब को हर मुसीबत और परेशानी से निजात अता फ़रमाए, उन्हें सेहत, हिम्मत और हौसला दे।
आप सभी से गुज़ारिश है कि आज़म ख़ान साहब की सलामती और रिहाई के लिए ख़ास दुआ करें। आमीन! 🤲
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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित सांकेतिक 'जन-महाभियोग' कार्यक्रम में छात्र नेता नेहा बोरा ने महज़ 3 मिनट के अपने बयान में ज्ञानेश कुमार और उनके इशारों पर काम करने वाली पूरी व्यवस्था को आईना दिखा दिया।
तीन मिनट का बयान था, लेकिन सवाल इतने तीखे थे कि सत्ता के गलियारों तक उसकी गूंज जरूर पहुँची होगी। नेहा बोरा ने साबित कर दिया कि सच बोलने के लिए लंबे भाषण नहीं, बल्कि मजबूत हौसले और बेबाक आवाज़ की जरूरत होती है।
सलाम है इस जज़्बे को!
@neha_aisa ✊🏻🔥
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प्रचंड गांधीवाद के तमाम अनुयायियों को सूचित किया जाता है कि पुण्य प्राप्ति का कोई भी अवसर व्यर्थ न होने दे।
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सेक्युलर लोगों ने कहा की ये भैंस और गाय है
यानी संविधान लोकतंत्र है इसकी सेवा करना हिफ़ाज़त करना मुस्लिम की ज़िम्मेदारी है
अस्सी साल से मुसलमान लगा हुआ है क्या मजाल है कि एक भी सीपी 🦪 दूध निकला हो
@ChaandK007 @spyder007 @ashiqecool @AKHTAR100375 @qureshi2_sultan @IAasMohd
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We have Dr Swaleha Dr Umm Miran Dr Saud Dr Javed Dr Chand Dr Ashiq Dr Usman Dr Waseem Dr Saifi
@Swaleha_2 @Umm_e_Meeran @AKHTAR100375 @IAasMohd @Wasim_Shaikh22 @ChaandK007 @AzamkhanUP @spyder007 @ashiqecool
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बिहार, मोतिहारी।
एक युवक द्वारा मुस्लिम समुदाय की बेटियों को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक गाना बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया जा रहा है।
@bihar_police @motihari_police से अनुरोध है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी निष्पक्ष जाँच करें और तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
किसी भी समुदाय की बेटियों के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाली ऐसी हरकतों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।
मोतिहारी, बिहार के निवासी एक व्यक्ति द्वारा गाने में बेटियों को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक एवं अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।
@bihar_police @motihari_police कृपया मामले की निष्पक्ष जाँच कर उचित कानूनी कार्रवाई करने की कृपा करें
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बिहार, मोतिहारी।
एक युवक द्वारा मुस्लिम समुदाय की बेटियों को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक गाना बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया जा रहा है।
@bihar_police @motihari_police से अनुरोध है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी निष्पक्ष जाँच करें और तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
किसी भी समुदाय की बेटियों के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाली ऐसी हरकतों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।
@AadilHasanAdv1 @asadowaisi @warispathan @shadab_chouhan1 @imtiaz_jaleel @imshaukatali @Akhtaruliman5 @simabakhtar2
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अंसारी परिवार का नाम था, है और रहेगा। लेकिन मौजूदा नस्ल की सियासत देखकर अफ़सोस होता है।
मुख़्तार अंसारी साहब का कैसे इंतकाल हुआ वो पूरे देश के मुसलमानों को मालूम है।
2024 के रमज़ान में, मुख़्तार अंसारी साहब के इंतक़ाल के बाद, जब बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी उनके परिवार से मिलने पहुँचे, तब आधी रात को उस ग़म के माहौल में भी सियासत करना नहीं छोड़ा था, सिबगतुल्लाह अंसारी का विधायक बेटा शोएब अंसारी उर्फ मन्नु अंसारी समाजवादी पार्टी की लाल टोपी पहनकर ओवैसी के सामने बैठा था।
अफ़ज़ल अंसारी घर में रहते हुए घर से बाहर रहने का बहाना बनाकर उस वक्त ओवैसी से मुलाकात नहीं थे।
भाई-चाचा के इंतक़ाल पर भी सियासी पहचान दिखाने की इतनी बेचैनी?
अंसारी परिवार की विरासत से सियासत तक सिर्फ़ नाम से नहीं, किरदार से बचती है!
अंसारी परिवार इतने निचले स्तर की राजनीति शुरू कर दिया है?
✍🏻 @TheSyedBaba
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मुजफ्फर नगर दंगों के समय सत्ता और विधायक दोनों हाथ में थे।
फिर कोई मदद के लिए क्यों नहीं आया?
विधायक से जरूरी होती है सत्ता क्योंकि बिना सत्ता के 100 विधायक भी जीरो जैसे होते हो।
भाजपा ने हिंदू मुस्लिम की राजनीति की सबसे ज्यादा घाटा सपा का हुआ क्योंकि उन पर मुस्लिम समर्थक होने का दगा लगा।
10 सालों में अखिलेश यादव ने अन्य हिन्दुओं को जोड़कर ये दाग कम किया।
अब ओवैसी और उनके समर्थक भाजपा से फंड लेकर मुस्लिम वोट तोड़ने आए हैं।
देख भाई सपा कुछ लाख वोटों से ही चुनाव हारी थी अगर वो कुछ लाख वोट इस बार मुस्लिमों के हुए तो फिर 5 साल भूल जाना।
क्योंकि फिर तुम्हारी बेवकूफी पर मदद करने कोई नहीं आएगा क्योंकि ये आखिरी मौका है भाजपा सबसे कमजोर दौर में है।
























