
Shagird E @SaleemRazaNoori | Full Stack Web and Mobile App Developer. Builds Beautiful and Powerful Stuffs. (+Web Security)
Uttar Pradesh, India
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Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳 retweeted
Today marks two years since I joined X.
I mean x today's my #MyXAnniversary
Yes, that's a different matter. I'm not very active on X.
One day, that day will come when it will be my wedding anniversary too.
🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣
@SaleemRazaNoori
@ImranGifted
Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳 retweeted
*حضرت علامہ صاحب!*
آپ کی ارسال کردہ تصویر/تحریر نظر سے گزری۔ مضمون میں بیان کردہ واقعۂ فتحِ بیت المقدس کے حوالے سے ایک مختصر سی ادباً تحقیقی گزارش پیش کرنے کی جسارت کر رہا ہوں۔
تحقیق کے مطابق 2 اکتوبر 1187ء، مطابق 27 رجب 583ھ کو مجاہدِ اسلام، حضرت سلطان صلاح الدین ایوبی علیہ الرحمہ بیت المقدس میں داخل ہوئے اور شہر صلیبی اقتدار سے دوبارہ اسلامی اقتدار میں آ گیا۔ تاریخی ماخذوں میں اس تاریخ کی صراحت ملتی ہے۔
البتہ تاریخی تسلسل کو سامنے رکھا جائے تو یہ وضاحت زیادہ دقیق ہوگی کہ جولائی 1187ء میں جنگِ حطین کی فیصلہ کن فتح کے بعد حضرت سلطان صلاح الدین ایوبی نے بیت المقدس کا رخ کیا اور ستمبر کے آخر میں شہر کا محاصرہ شروع ہوا۔ شدید حملوں اور فصیل میں نقب پڑنے کے بعد شہر کے مدافعین نے امان اور صلح کی درخواست کی، جس کے نتیجے میں 2 اکتوبر 1187ء کو بیت المقدس نے باقاعدہ سپردگی اختیار کی۔
چنانچہ تصویر میں موجود "صلیبیوں کو مات دے کر مسجدِ اقصیٰ کو آزاد کرایا" کا مفہوم اپنی جگہ درست ہے، لیکن علمی و تاریخی دقت کے اعتبار سے جنگِ حطین، محاصرۂ بیت المقدس اور پھر صلح کے ذریعے شہر کی سپردگی کا ذکر زیادہ مکمل صورتِ حال پیش کرتا ہے۔ فتح کے بعد مسجدِ اقصیٰ کو دوبارہ اسلامی عبادت کے لیے بحال کیا گیا، صلیبی دور کی تبدیلیاں ختم کی گئیں اور بعد ازاں وہاں مسلمانوں کی نمازِ جمعہ بھی دوبارہ قائم ہوئی۔
لہٰذا اگر تصویر کے متن کو تحقیقی اور تاریخی انداز میں مرتب کیا جائے تو اسے یوں لکھنا زیادہ جامع ہوگا:
*"2 اکتوبر 1187ء، مطابق 27 رجب 583ھ، سلطان صلاح الدین ایوبی کے ہاتھوں بیت المقدس صلیبی اقتدار سے آزاد ہوا۔ جنگِ حطین کی فیصلہ کن فتح کے بعد ہونے والے محاصرے کے نتیجے میں بیت المقدس نے صلح اور امان کی شرائط کے تحت سپردگی اختیار کی اور مسجدِ اقصیٰ کو دوبارہ اسلامی عبادت کے لیے بحال کیا گیا۔"*
اس لیے میری ناقص گزارش یہ ہے کہ تصویر میں بیان کردہ بنیادی تاریخی واقعہ درست ہے، البتہ اس کے تاریخی پس منظر میں جنگِ حطین، محاصرۂ بیت المقدس اور صلح کے ذریعے شہر کی سپردگی کا اضافہ کر دیا جائے تو عبارت مزید مستند، جامع اور تحقیقی ہو جائے گی۔
*حضرت علامہ صاحب!*
یہ محض ایک طالب علمانہ اور ادباً پیش کی گئی تحقیقی گزارش ہے۔ واقعۂ فتحِ بیت المقدس کی عظمت، حضور سید المجاہدین، حضرت سلطان صلاح الدین ایوبی کی جدوجہد اور تاریخِ اسلام میں اس فتح کی غیر معمولی اہمیت اپنی جگہ مسلم و معروف ہے۔
والسلام، باادب
*سیف اللہ قادری*
چیئرمین: غوثِ اعظم فاؤنڈیشن
Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳 retweeted
हमारी जाहिल आवाम के खिलाफ ए शरआ काम को कुछ अल्पसंख्यक दो बंदी फिरके के लोग इसे इमाम ए अहले सुन्नत का दीन बता रहे हैं
पूरी दो बंदीयत को चैलेंज है मेरे इमाम की क़ुतुब से अगर ऐसे फेल को जायज़ करार दे दो पूरी ज़िन्दगी गुलामी करूंगा
आला हज़रत का दीन ओ मज़हब
Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳 retweeted
दीन-ए-मुहम्मदी (किसी के अक़ीदे पर कोई सवाल नहीं है)
इस्लाम को तारीख़ के हवाले से बहुत ग़लत देखा और समझा गया है।
इस्लाम कोई ऐसा दीन नहीं है जिसे पैगम्बर मुहम्मद ने 1400 साल पहले अमल में लाया, यह तो हज़रत आदम के वक़्त से चला आ रहा दीन है। पैगम्बर ने एक तहरीक़ शुरूअ की जिसे सही लफ़्ज़ में दिन-ए-मुहम्मदी कहा जाना चाहिए।
वक़्त के साथ नए बदलाव और नए क़ानून हुज़ूर ने लाए, इसे ठीक ऐसे समझिए कि सनातन तो शुरूअ से था ही, आदि शंकराचार्य ने एक नूतन व्याख्या दी वेदांत के स्वरूप में और वर्षों से चली आ रही कुरीतियों को नकारा, विरोधाभास वाले उपनिषदों को ख़ारिज किया और एक नवीन सूरत में सनातन को प्रस्तुत किया( हालाँकि शंकर का अद्वैत मूल स्वरूप में नागार्जुन के शून्यवाद का वैदिक अनुवाद ही है)।
जहालत का दौर अरब का वह काला पन्ना है जिस पर तमाम इंसानियत शर्मसार होनी चाहिए। यहीं से पैगम्बर प्रासंगिक हो जाते हैं। वे उस जहालत से अरब को निकालने की कोशिश करते हैं। ज़िना (अवैध संबंध), तिफ्ल कुशी(कन्या हत्या), आबरू रेज़ी(बालात्कार), बेवाओं की बदहाली, ग़रीबों की ला-हुक़ूक़ी और न जाने कितनी कुरीतियों में घिरा अरब जब पैगम्बर के सामने आता है तो एक धड़कता हुआ मुहब्बत भरा दिल उस को कैसे बर्दाश्त कर पाता? नबुवत का दावा उस इंक़लाब की पहल थी। ख़ुद को मुस्तनद किए जाने के लिए उन्होंने बहुत से रिवाजों को क़ुबूल किया और चलने दिया ताकि उनकी बात तो पहले सुनी जाए, और फिर बाद में उनमें से बहुत सी बातों को अपने आख़िरी दौर में ख़त्म करने का निर्देश भी दिया। मैं कुछ मिसाल दे कर अपनी बात साफ़ करना चाहूँगा -
जानवर की क़ुर्बानी:
बकरा ईद पर होने वाली क़ुर्बानी अस्ल सूरत में सुन्नत-ए-मुहम्मदी नहीं है वह सुन्नत-ए-इब्राहीमी है। तारीख़ और इस्लाम भी गवाह हैं अल्लाह ने कोई क़ुर्बानी हज़रत इब्राहीम से कभी क़ुबूल ही नहीं की, बल्कि उस दिन भी कोई क़ुर्बानी हज़रत इब्राहीम से हुई ही नहीं थी, दुंबा को ज़िबाह अल्लाह की छुरी ने किया था, हज़रत इब्राहीम की छुरी ने नहीं। पैगम्बर ने सदियों से चले आ रही उस चलन को चलने दिया लेकिन एक रहम से भरा दिल यह जनता था इस क़ुर्बानी से अल्लाह राज़ी नहीं होता, ये ज़रूरत है इस रेगिस्तान के भूख की, इसलिए पैगम्बर के हवाले से इमाम 'अली फ़रमाते हैं -
अपने पेट को जानवरों का क़ब्रिस्तान मत बनाओ।
( स्रोत: शर्ह नहजुल बलाग़ा)
अपनी विदाई हज (हज्जतुल विदा) के मशहूर ख़ुतबे में, जो सहीह मुस्लिम (हदीस नंबर 1218) और सुनन अबी दाऊद में विस्तार से दर्ज है।
"أَلَا كُلُّ شَيْءٍ مِنْ أَمْرِ الْجَاهِلِيَّةِ تَحْتَ قَدَمَيَّ مَوْضُوع"
(अल्ला कुल्लु शय-इन मिन अम्रिल जाहिलिय्यति तह्-त क़-दमय्य मौज़ूअतुन)
पूरा हिंदी अनुवादः
"सुन लो ! जाहिलियत (अज्ञानता के दौर) की हर चीज़ (रस्में, नियम और क़ानून) मेरे इन दोनों कदमों (पैरों) के नीचे ख़त्म (यानी मंसूख/रद्द) कर दी गई हैं।"
निकाह:
बीते नबियों के दौर में निकाह को लेकर बहुत से पुराने क़ानून चले आ रहे थे जिसमें भटकाव और जहालत थी। पैगम्बर ने उन सबको मंसूख किया। अरब में औरत को जागीर में हक़, निकाह में मेहर, बेवाओं के साथ निकाह, निकाह के जायज़ रिश्ते ऐसे बहुत से सुधार अरब में दिन-ए-मुहम्मदी के हैं। तलाक़ और खुला जैसी शरायत आज की तारीख़ में मैरिज एक्ट की नींव बन जाती हैं।
विलायत:
बहुत से फ़िरक़े इस बात पर मुतमइन हैं कि वालियों की कोई ज़रूरत नहीं, जबकि नबी ने जब इमाम 'अली का हाथ थाम कर कहा -
मन कुंतो मौला, फ़-हाज़ा 'अलीयुन मौला
वहीं से नबुवत ख़त्म और विलायत शुरूअ हो जाती है। अम्बिया अल्लाह के ज़रिए या'नी साधन होते हैं दीन को अवाम तक पहुंचाने के लिए, क्योंकि अवाम अल्लाह को नहीं समझ सकती। अब सवाल उठता है मुहम्मद साहब आख़िरी नबी क्यों हैं? क्योंकि अब अल्लाह के पास कोई नया इल्म नहीं है उतारने को, जो बात लन तरानी पर रुक गई थी वह नबी के मेराज़ के सफ़र पर ख़त्म हो गई, अल्लाह को देख और जान लिया गया अब नबी की ज़रूरत नहीं बचती है।
लेकिन अवाम को साधन अभी भी चाहिए उस इल्म पर चलने के लिए वही साधन है विलायत। वली क़ुरआन को पढ़ कर अस्ल जान चुके मुहम्मदी हैं, उनसे अवाम को रास्ता और उस पर चलने की रहबरी मिलती है बदलते वक़्त के बदलाव में। वली न तो अल्लाह हैं न ही नबी हैं वो भी ज़रिया हैं अल्लाह के।
विलायत नबी की सुन्नत भी कही जा सकती है, इसका सुबूत है-
نَادِ عَلِيّاً مَظْهَرَ الْعَجائِبِ
تَجِدْهُ عَوْناً لَكَ فِي النَّوائِبِ
كُلُّ هَمٍّ وَغَمٍّ سَيَنْجَلِي
بِعَظَمَتِكَ يَا اَللهُ، بِنُبُوَّتِكَ يَا مُحَمَّدُ، بِوِلَايَتِكَ يَا عَلِيُّ يَا عَلِيُّ يَا عَلِيُّ
१/२
Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳 retweeted
*झोटवाड़ा क़ब्रिस्तान | एक बदला हुआ मंज़र*
*जिन लोगों ने वार्ड नंबर 19 स्थित "झोटवाड़ा क़ब्रिस्तान" को 19 जुलाई 2026 से पहले देखा था, वे अब एक बार फिर वहां जाएं और अपनी आंखों से इसकी साफ़-सफ़ाई और बदला हुआ स्वरूप ज़रूर देखें।*
*माशा अल्लाह! यह बदलाव "ग़ौसे आज़म फाउंडेशन" की लगातार मेहनत का नतीजा है। इस नेक काम से जुड़े तमाम सदस्यों के लिए दिल से दुआएं करें।*
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इस जाहिल ख़बीस वकील कुरान का तर्जुमा लिख रहा है वो भी गलत और इस तर्जुमे में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की गुस्ताखी है
कहार पालकी उठाने वाले और पानी की डोल को कांधे पर रखने वाले को कहते हैं
जबकि असल लफ्ज़ है अल्लाह वाहिद ओ क़ह्हार
इन खबीस लोगों को कोई मतलब नहीं कि अल्लाह की
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हज़रत औरंगज़ेब बरेलवी साहब क़िब्ला के बाद शाह अब्दुल कादिर बदायूंनी के बाद क़ाज़ी उल क़ुज़्ज़ात फ़िल हिंद का मनसब
खानदान ए आला हज़रत में रहा है
जलो और जलो अल्पसंख्यक फिरके के लोगों
Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳 retweeted
अगर ईद मिलादुन्नबी ﷺ का जुलूस सिर्फ़ इसलिए बिदअत है कि उसका सबूत पहली सदियों में नहीं मिलता, तो फिर “जुलूस-ए-मद्ह-ए-सहाबा”, “दिफ़ा-ए-मुआविया” और दूसरे नामों से निकाले जाने वाले देवबंदियों के जुलूसों की गुंजाइश शरीअत में कहाँ से आ गई?
सवाल जुलूस निकालने या न निकालने का नहीं,
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*झोटवाड़ा क़ब्रिस्तान स्वच्छता अभियान का दुसरा चरण, ग़ौसे आज़म फाउंडेशन द्वारा संपन्न*
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*क़ौम की मां बहनों/ बेटे बेटियों और परिवार के लोगों को, सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी का पैग़ाम*
*वीडियो देखें और पांच परिवार तक शेयर भी करें।♥️*
#Ummat
#Islam
#Muslim
#GhauseAzamFoundation
#SufiSaifullahQadri
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🔥 आज की डिबेट का संदेश 🔥
Part (1)
"वतन की शान पर आंच आए, यह मंज़ूर नहीं होगा,
सरहद से जो टकराएगा, वह चकनाचूर होगा।"
आप इस वीडियो को पूरा देखें और यदि आपको यह बात राष्ट्रहित में उचित लगे तो अपने मित्रों, शुभचिंतकों और सभी भारतीय भाइयों तक अवश्य पहुंचाएं।
सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी
राष्ट्रीय अध्यक्ष, ग़ौसे आज़म फाउंडेशन
*🇮🇳 राष्ट्र पहले, राजनीति बाद में 🇮🇳*
आज INDIA NEWS NATIONAL की लाइव डिबेट में मैंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की सीमाओं की सुरक्षा किसी दल, जाति या धर्म का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का विषय है।
अवैध घुसपैठ, तस्करी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। जो भारत का नागरिक है, उसके संवैधानिक अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहने चाहिए और जो अवैध रूप से देश में प्रवेश करता है, उसके विरुद्ध क़ानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
मैंने डिबेट में यह भी कहा कि भारतीय मुसलमान इस देश की अखंडता, एकता और संप्रभुता के साथ मजबूती से खड़े हैं। भारत हम सबका वतन है और उसकी सुरक्षा, सम्मान तथा संविधान की रक्षा हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है।
*🔥 आज की डिबेट का संदेश 🔥*
"वतन की शान पर आंच आए, यह मंज़ूर नहीं होगा,
सरहद से जो टकराएगा, वह चकनाचूर होगा।"
आप इस वीडियो को पूरा देखें और यदि आपको यह बात राष्ट्रहित में उचित लगे तो अपने मित्रों, शुभचिंतकों और सभी भारतीय भाइयों तक अवश्य पहुंचाएं।
*— सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी*
राष्ट्रीय अध्यक्ष, ग़ौसे आज़म फाउंडेशन
Hello @reliancejio I'm sorry to leave you not because of any network issue or internet issue. We even facing that issues from yesterday. However I'm not here to complain about that.
I wanna leave because I'm fed up with your calls when any of 6 numbers's plan is just expired.
Replying to @ImranGifted @reliancejio
@airtelindia send me your MNP sales agent I've 6 numbers to port from @reliancejio
Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳 retweeted
Mera 28 May ko subah 8 baje BA Final Year ka exam hai, jabki usi din Eid al-Adha bhi hai.
Eid ke din students ke liye exam attend karna kaafi mushkil hoga.
so @mjpruofficial @BareillyCollege se guzarish hai ki 28 May ka paper postpone kiya jaye.
#PostponeBAExam #EidUlAdha
Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳 retweeted
मैं तो सहमत हूं क्या आप भी सहमत हैं जो भी गाय का अपमान करे उसका सामूहिक वहिष्कार किया जाए
Mohammad Imran Raza Qadri 🇮🇳 retweeted
❤️ المــدینـة المنـــوره ❤️
❤️ Al Madinatul Munawwara ❤️
#madina #Madina #almadina #ILoveMuhammad #ilovemuhammad @NaeemiFazi @MRNoori5 @ImranGifted @MuhammadTariq_Q @jamshedsaadi @j_mariya2 @Inamdar_07 @Rizvana_Raza @Allah_Ki_Talwar – at Al Madinah Al Munawwarah, Kingdom of Saudi Arabia




















