सरदार जी retweeted
G में दम हो तो मोदी को हटा दो
तेरह पार्टियां लगी थी...फिर भी 8हजार भीड़ नहीं
जुटा पाए औकात हे नहीं इनकी ओर मोदी को हराएंगे
भारत को नेपाल बांग्लादेश बनाने चले हो ऐसा इलाज
होगा कि 7 पुश्ते याद रखेगी
इस बंदे ने कॉकरोचों को रगड़ कर रख दिया
सरदार जी retweeted
लिल्लाह !
पूरे विश्व में 54 मुस्लिम देश हैं और तुम मेरे ही देश में आकर मेरे कपड़ों, हैम और कुत्तों के बारे में शिकायत कर रहे हो??
भाड़ में जाओ !
मुल्ला इस महिला के कपड़े को "हराम" बता रहा था महिला ने मुल्ले को पूरा त्रिपाल ओढ़ा दिया !
🔥🔥🔥🔥
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ये संयोग नहीं, सिग्नेचर है।
एक ही सिग्नेचर - हर देश में एक साथ आग, और हर आग का एक ही पैटर्न।
रूस को यूक्रेन में उलझा दो, ताकि यूरोप की एनर्जी टूट जाए। इजराइल को तीन साल से युद्ध में फंसा दो, ताकि मिडिल ईस्ट कभी स्थिर न हो। ईरान को परमाणु की दहलीज पर खड़ा कर दो, अमेरिका को ईरान से भिड़ा दो, हूतियों से सऊदी को जलाओ, ताकि तेल का एक भी रास्ता सुरक्षित न बचे। वेनेजुएला पर कब्जा, ताकि लैटिन अमेरिका में भी कोई आवाज न उठे।
फिर यूरोप के अंदर दूसरा मोर्चा खोलो। फ्रांस को घुसपैठियों से जला दो - तुमने खुद देखा, गुच्ची के बाहर आग, 143 साल का टाउन हॉल राख, दुकानदार लड़की गिड़गिड़ा रही है और लुटेरे हंस रहे हैं। स्पेन को उसी भीड़ से घेरो, इटली को उसी भीड़ से फूंक दो, मिलान में ड्यूमो के सामने पुलिस से युद्ध। ताकि यूरोप का आम आदमी अपनी ही गली में डर कर जिए।
फिर हमारे घर के चारों तरफ दीवार गिरा दो। नेपाल में तख्तापलट, श्रीलंका में तख्तापलट, बांग्लादेश में तख्तापलट, पाकिस्तान को तोड़ने की कगार पर ला दो। ताकि भारत के चारों तरफ सिर्फ आग हो, और भारत को लगे कि वो अकेला है।
और फिर भारत में वही आग लगाने की कोशिश, हर छह महीने में एक नया चेहरा। कभी लंगर, कभी तिरपाल, कभी माइक, कभी जंतर-मंतर। मुद्दा कभी किसान, कभी जवान, कभी पहलवान, कभी संविधान। पर स्क्रिप्ट एक ही - सड़क जाम करो, देश बंद करो, दुनिया को दिखाओ भारत जल रहा है।
कुछ भी अपने आप नहीं हो रहा। महंगाई अपने आप नहीं बढ़ी, घुसपैठ अपने आप नहीं हुई, यूनिवर्सिटी में नारे अपने आप नहीं लगे, टाउन हॉल में आग अपने आप नहीं लगी। ये सब मैनेज्ड है।
क्यों? क्योंकि दुनिया को रीसेट करना है।
पुरानी दुनिया में देश थे, बॉर्डर थे, सेना थी, परिवार था, धर्म था, बाजार था। नई दुनिया में ये सब रोड़ा है। नई व्यवस्था को चाहिए - बिना बॉर्डर की दुनिया, बिना परिवार का समाज, बिना धर्म की भीड़, बिना राष्ट्र का बाजार। जहां एक ही सॉफ्टवेयर सबको चलाए।
और उस सॉफ्टवेयर के इंस्टॉल होने में सबसे बड़ा बग कौन है?
भारत।
भारत इसलिए नहीं क्योंकि उसके पास परमाणु बम है, इसलिए क्योंकि उसके पास एक ऐसा नेतृत्व है जो इस सिग्नेचर को पहचानता है। जो जानता है कि फ्रांस की आग और शाहीन बाग की आग अलग नहीं, जो जानता है कि बांग्लादेश का तख्तापलट और भारत में जाति जनगणना का शोर अलग नहीं।
फ्रांस झुक गया, इसलिए जल गया। इटली घिर गई, इसलिए सुलग रही है। नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश के पास कोई नहीं था जो भीड़ को चीर कर खड़ा हो सके, इसलिए टूट गए।
भारत के पास है।
इसीलिए भारत पर हमला सबसे ज्यादा है, और इसीलिए भारत अभी तक टूटा नहीं।
ये लड़ाई महंगाई की नहीं, व्यवस्था की है। और इस लड़ाई में पूरी दुनिया की नई व्यवस्था के रास्ते में अगर कोई एक आदमी सबसे बड़े पत्थर की तरह खड़ा है, तो वो तुम्हें पता है कौन है।
सरदार जी retweeted
आज हदीस पढ़ रहा था तो एक हदीस सुनन इब्ने माजा 4337 पर निगाह पड़ी
हज़रत अबू उमामा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया
“जन्नत में दाख़िल होने वालों में से हर मर्द को बहत्तर बीवियाँ मिलेंगी। उनमें से दो हूरें होंगी, जिनकी आँखों में गहरा सुरमा लगा होगा, और उन दोनों के सिवा सत्तर औरतें होंगी
उनमें से हर एक के साथ मर्द की शर्मगाह में प्रवेश करने के लिए ऐसी ताक़त होगी कि वह थकेगा नहीं, उनमें से हर औरत की शर्मगाह में ऐसी ख़ासियत होगी कि उसके अंदर की तंगी ख़त्म नहीं होगी। वह हमेशा जवान रहेगी
और उन हूरों के जिस्म (बदन) में ऐसा लुत्फ़ होगा कि मर्द उनके साथ रहने में कभी ऊब महसूस नहीं करेगा”
हालांकि ये हदीस जईफ है, लेकिन मिंबरो पर बैठकर दढ़ियल मौलाना बड़ी ऊंची और बुलंद आवाज में इस हदीस का बयान करते हैं, और मुसलमान माशा अल्लाह माशा अल्लाह शुभान अल्लाह करते हैं
ये पढ़ाया जाता है मदरसों में, जन्नत में मुसलमानों को कोई दूसरा काम नहीं होगा सिवा चुदाई के औरतें भी ऐसी होंगी जिनकी चूत में गर्मी यहां की औरतों से चालीस गुना होगा
अब सोचिए यहां अनगिनत मुसलमान बीमार हैं, अपनी बीबी की ले नहीं पाते चढ़ते ही झड़ जाते हैं
उनको कोई सिफा अल्लाह यहां नहीं दे पा रहा है
जन्नत में सब ठीक कर देगा
@shoaibJamei साहब ऐसा नहीं लगता आपको की कोई फिरकी ले रहा आज भी मुसलमानों से
सरदार जी retweeted
ओ अंकिल
आज जो निजी क्षेत्र के 3 सबसे बड़े बैंक हैं यानी ICICI बैंक एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक यह तीनों कभी सरकारी हुआ करते थे लेकिन पीवी नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह ने इन्हें बेच दिया
आई सी आई सी का पूरा नाम इंडस्ट्रियल क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया था ..यह भारत सरकार की ऐसी संस्था थी जो बड़े उद्योगों को लोन देती थी लेकिन एक झटके में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने इसका डिसइनवेस्टमेंट करके इसे प्राइवेट बना दिया और इसका नाम और आईसीआईसीआई बैंक हो गया
आज जो एचडीएफसी बैंक है उसका पूरा नाम हाउसिंग डेवलपमेंट कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया था यह भारत सरकार की एक ऐसी संस्था हुआ करती थी जो मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ते ब्याज पर होम लोन देने का काम करती थी
नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री रहे मनमोहन सिंह ने कहा सरकार का काम सिर्फ गवर्नेंस करना है होम लोन बेचना नही है
मनमोहन सिंह इसे जरूरी कदम बताते हैं और कहते हैं सरकार का काम सिर्फ सरकार चलाना है बैंक चलाना लोन देना नहीं
और एक झटके में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने एचडीएफसी बैंक को बेच दिया और यह निजी क्षेत्र का बैंक बन गया
इसी तरह की बेहद दिलचस्प कहानी एक्सिस बैंक की है
भारत सरकार की एक संस्था हुआ करती थी उसका नाम था यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया यह संस्था लघु बचत को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई थी यानी आप इसमें छोटे-छोटे रकम जमा कर सकते थे मनमोहन सरकार नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने कहा की सरकार का काम चिटफंड की स्कीम चलाना नहीं है और एक झटके में इसे बेच दिया गया पहले इसका नाम यूटीआई बैंक हुआ और बाद में इसका नाम एक्सिस बैंक हो गया
इसी तरह आज आईडीबीआई बैंक है जो एक प्राइवेट बैंक है एक समय में यह भारत सरकार की संस्था हुआ करती थी जिसका नाम था इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया इसका भी काम उद्योगों को लोन देना था लेकिन मनमोहन सिंह ने इसे भी 60% बेच दिया था
अपनी यादाश्त को कमजोर न होने दो कभी
डिसइनवेस्टमेंट पॉलिसी को भारत में कौन लाया था जरा सर्च कर लो जब *नरसिंगा राव के समय में मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे जब मनमोहन सिंह ने संसद में कहा था मैक्सिमम गवर्नमेंट लेस गवर्नेंस उन्होंने कहा था कि सरकार का काम धंधा करना नहीं सरकार का काम गवर्नेंस देना है* ऐसा माहौल देना है कि लोग यह सब काम करें.
मनमोहन सिंह ने ही *सबसे पहले टोल टैक्स पॉलिसी लाई थी* यानी निजी कंपनियों द्वारा सड़क बनाओ और उन कंपनियों को टोल टैक्स वसूलने का परमिशन दो.
मनमोहन सिंह ने *सबसे पहले एयरपोर्ट की निजी करण* की शुरुआत की थी और सबसे पहला दिल्ली का *इंदिरा गांधी एयरपोर्ट को जीएमआर ग्रुप को* दिया गया.
आज चम्पक उछल उछल कर नाच नाच कर बेसुर रागा गाता फिर रहा है, "मोदी ने दोस्तो को बेच दिया..
मनमोहन सिंह करें तो - विनिवेश
मोदी करें तो - देश को बेचा .. !!!
2009-10 में मनमोहन सिंह ने 5 कंपनियां बेचीं
NHPC Ltd.-
OIL - ऑयल इंडिया लिमिटेड
एनटीपीसी - नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन
आरईसी - ग्रामीण विद्युतीकरण निगम
एनएमडीसी - राष्ट्रीय खनिज विकास निगम
2010-11 में, मनमोहन सिंह ने 6 कंपनियाँ बेचीं!
एसजेवीएन - सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड
ईआईएल - इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड
CIL - कोल इंडिया लिमिटेड
पीजीसीआईएल - पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया
MOIL - मैंगनीज अयस्क इंडिया लिमिटेड
एससीआई - शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया।
2011-12 में मनमोहन सिंह ने 2 कंपनियाँ बेचीं
पीएफसी - पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन।
ओएनजीसी - तेल और प्राकृतिक गैस निगम
2012-13 में, मनमोहन सिंह ने बेचीं 8 कंपनियां-
सेल - भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड
नाल्को - नेशनल एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड
आरसीएफ - राष्ट्रीय रसायन और उर्वरक
एनटीपीसी - नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन
OIL - ऑयल इंडिया लिमिटेड
एनएमडीसी - राष्ट्रीय खनिज विकास निगम
HCL - हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड
एनबीसीसी
👉 2013-14 में मनमोहन सिंह ने 12 कंपनियां बेचीं
एनएचपीसी - नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन
भेल - भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड
ईआईएल - इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड
एनएमडीसी - राष्ट्रीय खनिज विकास निगम
सीपीएसई - सीपीएसई-एक्सचेंज ट्रेडेड फंड
PGCI - पावर ग्रिड कॉर्पोफ़ इंडिया लि।
एनएफएल - राष्ट्रीय उर्वरक लिमिटेड
MMTC - धातु और खनिज व्यापार निगम
HCL - हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड
आईटीडीसी - भारतीय पर्यटन विकास निगम
एसटीसी - स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन
एनएलसी - नेयली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन लिमिटेड
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बारह साल, बारह सवाल
1. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर बेचे क्यों जा रहे हैं?
2. बैंक मजबूत हुए हैं तो ग़रीब जनता के खाते से पैसे क्यों काटे जा रहे हैं?
3. बैंक मजबूत हुए हैं तो बार-बार केवाईसी के नाम पर जनता के पैसे देने से इंकार क्यों किया जा रहा है?
4. बैंक मजबूत हुए हैं तो उन लोगों को पकड़कर देश में लाकर सज़ा क्यों नहीं दी जा रही है, जो बैंको से खरबों का लोन लेकर भाग गये हैं?
5. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर ग्रामीण इलाकों में ब्रांच और ATM बंद करके जनता को कैश के लिए क्यों भटकाया जा रहा है?
6. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर किसानों, छात्रों और छोटे दुकानदारों को बिना बिचौलिये और बिना गारंटर के लोन क्यों नहीं मिल रहा है?
7. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर साइबर ठगी का शिकार हुए गरीब आदमी का पैसा तुरंत वापस क्यों नहीं होता, उसे थाने और बैंक के चक्कर क्यों कटवाए जाते हैं?
8. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर होम लोन और शिक्षा लोन पर ब्याज इतना ज़्यादा क्यों है कि आम आदमी की कमर टूट रही है?
9. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर डिजिटल ट्रांजेक्शन फेल होने पर जनता का पैसा कई-कई दिन तक होल्ड पर क्यों रखा जा रहा है?
10. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर CIBIL स्कोर में छोटी सी चूक पर नौजवानों को डिफॉल्टर बताकर उनका भविष्य क्यों खराब किया जा रहा है?
11. बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर बुजुर्गों और अनपढ़ लोगों को UPI और ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने के लिए हर ब्रांच में सहायता काउंटर क्यों नहीं है?
12. बैंक मजबूत हुए हैं तो बैंक कर्मियों की जायज़ माँगे क्यों नहीं मानी जा रही हैं और बैंकों में नई भर्ती क्यों नहीं हो रही और मौजूदा कर्मचारियों पर इतना दबाव क्यों है कि ग्राहक सेवा ही चौपट हो रही है?
सरदार जी retweeted
२००१ में मोदी को वाजपेयी सरकार द्वारा गुजरात का मुख्यमंत्री मनोनीत किया जाता है। २००२ में वे विधायक बनने के लिए राजकोट द्वितीय सीट से उपचुनाव लड़ते हैं और महज १४००० वोटों से जीतते हैं।
यह अप्रत्याशित था क्योंकि गुजरात भाजपा का गढ़ था और वहाँ मोदी से मुख्यमंत्री के रूप में बड़ी जीत की आशा थी।
मोदी समझ गए थे कि इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में जो अपना दिखता है, वह भी अपना होता नहीं है। साफ तौर पर भितरघात हुआ था।
फिर गोधरा कांड हुआ और दंगे हुए। लेकिन यह दन्गा देश के पूर्व दंगों से अलग इसलिए था क्योंकि इस बार हिंदू भारी पड़े थे।
इसका सीधा लाभ मोदी को मिला और फिर 2002 के ही आम विधानसभा चुनाव में भाजपा दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में लौटी। मोदी इस बार मणिनगर से लड़े और ७५ हजार से अधिक वोटों से जीते।
२००४ में देश में कांग्रेस गठबंधन की केंद्र में वापसी होती है। दंगों और फिर विधान सभा चुनावों के बाद मोदी कांग्रेस की नजर में चढ़े हुए थे। उनके खिलाफ कांग्रेस ने सारे हथकंडे अपनाये। केंद्रीय एजेंसियों ने दिन-दिन भर पूछताछ की । बंदे ने कभी उफ तक नहीं किया। लोकतंत्र की हत्या जैसा कोई बयान भी कभी नहीं दिया। यहाँ तक कि कांग्रेस की कृपा से उनको अमेरिका ने अपने यहाँ बैन तक कर दिया।
दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी ने गुजरात को अद्भुत तरक्की के रास्ते पर डाल दिया।
कांग्रेस चिल्लाती रह गई, एजेंसियों का भरपूर दुरूपयोग करती रह गयी, लेकिन मोदी २००७ और २०१२ में कांग्रेस की छाती पर चढ़कर उसी प्रचंड जनादेश के साथ जीते।
फिर आई केंद्र की बारी। न्यूज चैनल्स पर रोज उन्हें दंगाई, हत्यारा, सांप्रदायिक घोषित किया जाता रहा लेकिन २०१४ में जो हुआ वह इतिहास था, वैसा होने की किसी को उम्मीद भी नहीं थी।
भाजपा को पूर्ण बहुमत। भाजपा से अधिक मोदी के लिए जनादेश।
1984 के बाद पहली बार किसी दल को पूर्ण बहुमत मिला था।
अब तो मोदी के हाथ में बहुत कुछ है लेकिन जब सबकुछ कांग्रेस के हाथ में था तब भी वह इस आदमी का कुछ नहीं उखाड़ पायी।
आखिर कांग्रेस के शासन काल में भी प्रचंड बहुमत से तीन- तीन चुनाव जीतने वाले मोदी ने तब कैसे वोट चोरी कर ली थी?
मोदी से ugc और sc/st act को लेकर मेरी भी नाराजगी है, लेकिन इस मुद्दे पर जब सारे दल एक ही थाली के बैंगन हैं तो मोदी से नाराजगी तो व्यक्त कर सकते हैं लेकिन छोड़कर कांग्रेस के पास नहीं जा सकते।
मोदी को वोट देने के अब भी कई कारण मिल जायेंगे लेकिन वर्तमान कांग्रेस को पसंद करने का मेरे पास कोई कारण नहीं।
मुझे कांग्रेस और उसके वर्तमान नेतृत्व से हद दर्जे की घृणा है।
सरदार जी retweeted
एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है। वैसे ही एक आदमी ने सारे कॉमेडियन विपक्ष को बना दिया।
गज़ब 😂👌✌️
मोदी
और
मोहम्मद मोसादेग
ईरान 1951
और
भारत 2025 -
क्या कोई समानताएं हैं?
क्या आपने कभी सोचा है कि ईरानी अमेरिका को "शैतानों की धरती" क्यों कहते हैं?
एक समय था, जब ईरान की तेल इंडस्ट्री पर ब्रिटेन का पूरा कंट्रोल था; 84% प्रॉफिट इंग्लैंड को जाता था और सिर्फ़ 16% ईरान को।
1951 में, एक सच्चे देशभक्त, मोहम्मद मोसादेग, ईरान के प्राइम मिनिस्टर बने। वह नहीं चाहते थे कि विदेशी कंपनियां ईरान के तेल रिसोर्स पर कंट्रोल करें। 15 मार्च, 1951 को, मोसादेग ने तेल इंडस्ट्री को नेशनलाइज़ करने के लिए एक बिल पेश किया, जो भारी बहुमत से पास हुआ। टाइम मैगज़ीन ने उन्हें 1951 में "मैन ऑफ़ द ईयर" का नाम दिया!
लेकिन इस फ़ैसले से ब्रिटिश फ़ायदों को नुकसान हुआ। उसने रिश्वत, हत्या की कोशिश और मिलिट्री तख्तापलट के ज़रिए मोसादेग को हटाने की कोशिश की, लेकिन उसकी दूर की सोच और पॉपुलैरिटी ने उसकी सारी कोशिशें नाकाम कर दीं। जब ब्रिटेन नाकाम रहा, तो उसने मदद के लिए अमेरिका से संपर्क किया। CIA ने मोसादेग को सत्ता से हटाने के लिए $1 बिलियन डॉलर मंज़ूर किए।
इस प्लान में लोगों में नाराज़गी पैदा करना, मीडिया और धार्मिक नेताओं को खरीदना और आखिर में भ्रष्ट MPs के ज़रिए सरकार गिराना शामिल था।
जर्नल, एडिटर और मौलवियों को मोसादेग के ख़िलाफ़ माहौल बनाने के लिए $631 मिलियन दिए गए। हज़ारों लोगों को नकली विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के लिए पैसे दिए गए। ग्लोबल मीडिया ने भी अमेरिका का साथ देना शुरू कर दिया। कार्टून का इस्तेमाल मोसादेग पर पर्सनल हमले करने के लिए किया गया, ठीक वैसे ही जैसे आज मोदी की पर्सनल ज़िंदगी पर हमले हो रहे हैं।
मोसादेग को डिक्टेटर कहा गया। जब उसे एहसास हुआ कि उसकी सरकार पार्लियामेंट गिरा देगी, तो उसने पार्लियामेंट भंग कर दी। US ने शाह पर मोसादेग को हटाने का दबाव डाला और नकली विरोध प्रदर्शनों के बाद मोसादेग ने सरेंडर कर दिया। उन्हें जेल में डाल दिया गया और बाद में हाउस अरेस्ट कर लिया गया।
इसके बाद, ईरान का तेल US (40%), इंग्लैंड (40%), और दूसरे यूरोपियन देशों (20%) के बीच बंट गया।
कट्टरपंथी खोमैनी सत्ता में आए और आम ईरानियों की हालत खराब हो गई।
मोसादेग का गुनाह यह था कि वह चाहते थे कि ईरान के रिसोर्स पर विदेशियों के बजाय ईरान की अपनी कंपनियां कंट्रोल करें। अगर मोसादेग को सपोर्ट मिला होता, तो ईरान 1955 तक पूरी तरह से डेमोक्रेटिक देश बन सकता था। लेकिन पत्रकारों, एडिटर्स, MPs और प्रोटेस्टर्स ने पैसे के लिए अपने देश का भविष्य बेच दिया। इसीलिए अमेरिकियों को "शैतानों की धरती" कहा जाता है।
*अब, भारत भी ऐसे ही मोड़ पर है। नकली मुद्दे, नकली आंदोलन, नकली आंकड़े और लोगों को जाति और धर्म के आधार पर बांटना - यह सब भारत को फिर से विदेशी कंट्रोल में लाने की एक गहरी साज़िश का हिस्सा है।
अब समय आ गया है कि हम सावधान रहें और करप्ट मीडिया के प्रोपेगैंडा का शिकार न हों। हर देशभक्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। नहीं तो भारत का भविष्य भी ईरान जैसा हो सकता है।*
आज, कई ग्लोबल इंटेलिजेंस एजेंसियां मोदी सरकार को हटाने के लिए भारतीय नेताओं को अपने एजेंट के तौर पर भर्ती करने की कोशिश कर रही हैं। हमारा भविष्य हमारे हाथ में है। बस हमें समय रहते यह समझने की ज़रूरत है।
'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने मोसादेग को तानाशाह कहा था। आज, टाइम मैगज़ीन मोदी को "डिवाइडर-इन-चीफ" कहती है। क्या यह सिर्फ़ एक इत्तेफ़ाक है? नहीं, यह एक स्ट्रैटेजी है। सोचो, समझो और जागरूक बनो।
जय हिंद।
सरदार जी retweeted
आगरा से एक जरूरी मदद चाहिए।
नदीम भाई की गिरफ्तारी आगरा से हो चुकी है। आगरा में रहने वाले सभी भाइयों से गुजारिश है कि अगर किसी की जानकारी में कोई अच्छे वकील हों तो कृपया संपर्क करवाएं।
सरदार जी retweeted
Dhruv Rathee is currently in India I request everyone to visit their nearest police station and file an FIR
If you cannot file an FIR yourself please spread this tweet as widely as possible Someone else who can do it will take action 🙏🏼
सरदार जी retweeted
Ghor Kalyug😂
So-called Ma: "Usko Maat le jao"
Police: Aap beech me na aaye, main apni duty kar rahi hu
Ma: "Beti hai wo meri usko mat le jao"
Police: Chalo aap bhi chalo Guardian ban ke😂
Ma in full Nirupa Roy mode: "Nahiiiii...." 😂😂😂😂
सरदार जी retweeted
में यूपी से हूं अभी जिला पाली,रानी में रहता हूं राजस्थान हिंदुओं से निवेदन है मेरी मदद करें नहीं तो मैं मर जाऊंगा
मुल्ला शाहरुख हर रोज पानी पूरी फ्री में खाकर ऊपर
से मारने और मां बहन की गाली देता है
हिंदुओं आपका एक शेयर इस भाई की जान बचाएगा
@PaliPolice @PoliceRajasthan🚨
सरदार जी retweeted
Jantar Mantar पर Protest के दौरान रोज़ी नाम की एक लड़की ने खुद को पत्रकार कहते हुए ACP Vivek Bhagat पर ‘सेक्सुअल हैरेसमेंट’ के आरोप लगाए।
बाद में 'पत्रकार रोज़ी' ‘कॉकरोचों की कॉर्डिनेटर' निकली।
इस Video में देखिए कि कैसे ‘पत्रकार’ के नाम पर इकोसिस्टम की प्रोपेगेंडा मशीनरी के ‘छर्रे’ हंगामा करते दिखाई दे रहे हैं।
@Chaman_CM
सरदार जी retweeted
किसी ने कह दिया ABP न्यूज़ ने बिना तथ्य, तर्क समझे उससे छाप दिया। फलाहारी बाबा ने कहा कि विराट कोहली को 5 करोड़ में प्रेमानंद जी के आश्रम में बुलाया गया था, तब खबर छपने और डालने से पहले ABP न्यूज़ के मन में ये सवाल क्यों नहीं आए कि:-
- तो क्या 5-6 बार विराट-अनुष्का को 5 करोड़ में बुलाया जा बुलाया जा सकता है?
- विराट की ब्रांड वैल्यू इतनी कम है कि वो पैसे में जाएँगे तो 6-7 बार सिर्फ़ 5 करोड़ में?
- प्रेमानंद महाराज के सामने अनुष्का रो पड़ीं थीं, तो क्या इस भक्ति को इस आंसू को भी अलग से चार्ज किए गए थे?
- क्या विराट-अनुष्का की भक्ति-आस्था-श्रद्धा का मोल सिर्फ 5 करोड़ है?
- ABP न्यूज़ व्यूज के लिए कुछ भी मत छापिए।
























