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21 interesting ideas to make productive use of Lockdown extended. Things you can do to enjoy quarantine
youtu.be/wIf49pqNZ8c
#IndiaFightsCorona #IndiaLockdown #modispeech #Lockdown2 #Lockdownextention
Harish Suwalka retweeted
आज तक सिर्फ एक पार्षद का चुनाव जीत पाए दुष्यन्त कुमार गौतम भाजपा के लिए इतने महत्वपूर्ण कैसे बन गए कि दौरान सीबीआई जांच और जब अंकिता भंडारी के मां बाप खुद उस पर आरोप लगा रहे, तब उसे राज्यपाल कैसे बना दिया गया?
क्या लॉजिक है?
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Dear @theicai,
Communication with the previous auditor should happen through a dedicated ICAI portal instead of emails or physical post.
The incoming auditor should be able to initiate the NOC/communication request using the previous auditor’s Membership Number. The previous auditor can then respond directly through the ICAI portal, with the entire communication digitally recorded and traceable.
This would make the process faster, transparent and much easier for members, while also reducing unnecessary paperwork.
ICAI should use technology to simplify the auditor-change process.
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कुछ पाखंडी पत्रकारों ने अपने लिए सेफ़ ज़ोन बना रखा है।
उनका पैटर्न समझिए
बीजेपी के ख़िलाफ़ आग उगलेंगे -ठीक है
कभी कभार कांग्रेस की भी आलोचना कर देंगे -ठीक है
लेकिन केजरीवाल या उनकी पार्टी के ख़िलाफ़ कभी कुछ नहीं बोलेंगे -ठीक नहीं है
और ग़ौर कीजिएगा
किसी हिंदूवादी संगठन की करतूतों पर खूब बोलेंगे -अच्छी बात है
लेकिन कठमुल्लापन की किसी वारदात पर चुप रहेंगे -अच्छी बात नहीं है
दलितों के हक़ों की आवाज़ उठाएंगे -बहुत अच्छी बात है
सवर्णों के साथ किसी अन्याय पर चुप रहेंगे - बहुतअच्छी बात नहीं है
इन पैटर्न को नोट कर लीजिए। और फिर नोटबुक के आधार पर तय कीजिए। पाखंडियों को ख़ुद पहचान जाएंगे।
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CAs who built teams are facing less stress today than who decided to cut costs.
One should take less profits home but build team to face such hard times.
#Extend_Tax_Audit_Due_Dates #TaxAudit
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“The deadline that was broken before it began”
Every year the same story: Tax Audit deadline extension demanded, government delays, then grants it at the last minute. This isn't a one-off ask, it's a structural problem. Here's why it happens EVERY year.
Income-tax utilities and audit forms are frequently notified or revised late, sometimes mid-season. Audits can't be finalized against forms that are still changing, every delay in utility release shrinks the real working window, regardless of how efficiently the work is done.
The same period also carries GST annual returns and TDS/TCS filings. These aren't competing tasks piled on one profession, they're statutory deadlines that were independently set without accounting for their overlap with the audit timeline.
The real fix isn't asking anyone to do more faster, it's fixing the sequencing at the source: move upstream deadlines (ITR filing, utility release) earlier, or formally recognize 31 October as the realistic audit date going forward.
@nsitharaman @FinMinIndia, Section 119 exists precisely for cases like this. Extend the deadline now, and fix the sequencing for good.
#TaxAuditExtension #Sec119
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The blunt reply to levying MDR charges on merchants
Somebody has to do this and @Ashneer_Grover ji like always…
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मेरे हाथ पैर टूटे पड़े हैं और मेरे बीवी बच्चे और बीवी का भाई मेरी जिस तरह से सेवा कर रहे हैं।उसके बाद मैं आपको विश्वास दिला सकता हूँ कि शादी इंसानी जिंदगी की सबसे अच्छी और खुशनुमा चीजों में से एक है।
बाकी लोगों को कॉलोनी में कीड़े पड़ के अकेले मरते भी इन्हीं आंखों से देख रखा है।
Remove marriage from the equation of your life, and you will realize that you don’t have any career pressure, pressure to buy a home at 30, or pressure to buy a car at 30. You will have your whole life to do whatever you want to do. It’s just marriage that puts us in a situation where we feel pressured to achieve all these things at an early age. That’s because we have been conditioned by society to believe that you need to achieve these things if you’re going to get married.
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डोटासरा साहब ,
एक पुरानी कहावत है
'सूप बोले तो बोले, छलनी भी बोले जिसमें बहत्तर छेद'
राजस्थान में 2018 से 2023 तक पांच साल आपकी सरकार थी . आप खुद भी तीन साल तक शायद शिक्षा मंत्री रहे .
राजस्थान के स्कूलों का बुरा हाल तो तब भी रहा होगा . ऐसा तो है नहीं कि आपकी सरकार ने सारे स्कूलों को चकाचक कर दिया था और बीजेपी की सरकार आते ही ये स्कूल जर्जर हो गए या छात्रों के लिए सुविधाएं खत्म हो गईं.
हर पांच साल पर राजस्थान में सरकारें बदलती रही लेकिन स्कूलों की दशा नहीं सुधरी .
अच्छी बात है कि विपक्ष में रहते आपको ये खामियां दिख रही है , सत्ता में रहते आप लोगों ने संकल्प लिया होता तो आज कुछ बेहतर स्थिति होती .
हमाम में सब नंगे हैं
भाजपा सरकार ने सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के बजाय अपनी नाकामी को ढकने और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली छिपाने का रास्ता खोजा है।
शिक्षा विभाग ने पारदर्शिता की बजाय स्कूल परिसर में प्रवेश, फोटो व वीडियो पर रोक, और सवाल पूछने वालों पर पहरा लगा दिया है।
सवाल ये है कि अगर स्कूलों में सब कुछ ठीक है तो डर कैसा? टूटे भवन, जर्जर कमरों, शिक्षकों की कमी, बच्चों की समस्याओं और सरकारी व्यवस्था की नाकामियों की तस्वीरें सामने आने से आखिर सरकार को इतनी बेचैनी क्यों है?
विद्यालय जनता के हैं, भाजपा की निजी संपत्ति नहीं हैं जो मनमाने आदेश थोपे जा रहे हैं। स्कूल प्रबंधन एवं विकास से जुड़े तंत्र में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और समाज की निगरानी को कमजोर करने वाला कोई भी निर्णय शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के खिलाफ है।
नाकामियों पर पर्दा डालने से तस्वीर नहीं बदलेगी!
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Dear @IncomeTaxIndia
As LTCG allowed in ITR 1 upto 1,25000
In the same manner allowe Taxpayers to show STCG Upto a nominal amount (Like 10k 25k 50k) who has 1,2 IPO listing Gain or Nominal redemption From sip
Because People afraid to file ITR 2
@PMOIndia @nsitharaman @narendramodi
#itr #itr2 – at Ramban, Jammu & Kashmir
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Respected Thulle , no one has free time to contest chutiya challans in Kothas.
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मोदी सरकार को अलोकप्रिय बनाने में 4 बड़े फैक्टर :
1.सरकार की कार्यशैली, निर्णय थोपने की प्रवृत्ति, एकतरफा ढंग से बिना भागीदारी के निर्णय
2.अमित मालवीय की IT सेल जिसने मास स्केल पर फेक न्यूज फैलाई और समर्थकों तक को गालियां दिलवाई, बदनामी का सबब बनी
3.गोदी मीडिया और उसके मालिक,संपादक,एंकर जो More Loyal than King बन गए और माध्यम की विश्वसनीयता ही खत्म हो गई
4.सत्ता के लिए पुराने सिद्धांतों की तिलांजलि, वाशिंग मशीन, जातिवाद की राजनीति और मंडल जैसे सलाहकार
छवि में सुधार इन बिंदुओं से शुरू करना होगा। इंस्टाग्राम पर रील से इमेज सुधारने की कोशिश एक तरह की जुमलेबाजी है और ढोंग से ही तो चिढ़ी हुई है जेन Z
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अर्जेंटीना और इजिप्ट का यह मुकाबला बताता है कि क्यों लाइव स्पोर्ट्स से ज्यादा एक्साइटिंग चीज पूरी दुनिया में और कुछ क्यों नहीं है।
मैच को सिर्फ 11 मिनट बचे थे, अर्जेंटीना 0-2 से पीछे थी, वर्ल्ड चैंपियन लगभग बाहर होने वाला था लेकिन अगले 13 मिनट में अर्जेंटीना ने तीन गोल करके मैच को 3-2 से अपने नाम कर लिया।
मतलब एक मेसी समर्थक होने के नाते मुझे इतनी खुशी हो रही है, तो मैं अंदाजा लगा सकता हूं कि अर्जेंटीना में जो फुटबॉल के फैंस हैं इस वक्त उनकी खुशी का क्या आलम होगा।
सच में फुटबॉल और लाइव स्पोर्ट्स से बेहतर चीज दुनिया में शायद ही और कुछ नहीं है। यही रियल ड्रामा है, यही रियल एक्शन है और यही शायद रियल लाइफ भी है। बहुत खूब।
#Argentina #messi
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प्रतापगढ़ की भदरी तालुकदारी 96 गाँव की जागीर थी लेकिन आप कुंवर रघुराज प्रताप सिंह का रुतबा देखिये। बृजभूषण शरण सिंह तो
किसी जागीर से भी सम्बंधित नहीं बल्कि एक बड़े किसान के बेटे हैं लेकिन ठसक देखिये ।
और एक हमारे राजकुमार लक्ष्यराज सिंह हैं जो देश की सबसे बड़ी रियासतों में से एक, देश के सबसे प्राचीन राजवंश मेवाड़ से सम्बंधित हैं, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के सीधे वंशज हैं लेकिन हर ऐरे गैरे नत्थूखैरे को महल बुलाकर बग्गी में घुमाते हैं फिर उसे मीट पकाकर खिलाते हैं।
विनम्रता अच्छी बात है लेकिन विनम्रता का अर्थ हल्कापन नहीं है। लक्ष्यराज की बातो और व्यक्तित्व में हल्कापन है जो क्षत्रिय की पहचान नहीं।
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Indian groups going abroad for vacations should undergo a week-long civic sense course before being allowed to travel.
Nearly every tourist-friendly destination has developed hostility towards all Indians because of the uncouth and loutish behaviour of many of them.
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जेपी से लेकर वीपी तक,लोहिया से केजरीवाल तक,अन्ना से मोदी तक देश ने जब भी किसी इंसान में मसीहा खोजा है, हर बार बुरा धोखा खाया है। और आप चाहते हैं हम कॉकरोच पर भरोसा कर लें। जाओ भाई, नए लड़कों तो टहलाओ, तुम्हारे पैदा होने से पहले से धोखे खाते आ रहे हैं हम, अब कोई नया नहीं चाहिए।🙏
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मोदी जी, आपने प्लेटो को सही साबित कर दिया
मुझे हैरानी है कि प्रधानमंत्री के 12 साल तक प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने को कैसे डिफेंड किया जा सकता है। इसका बचाव करने वाले अक्सर तर्क देते हैं कि लोकतंत्र में प्रधानमंत्री की जवाबदेही जनता के प्रति होती है। मीडिया का एक सेक्शन तो वैसे भी दुर्भावना से काम करता है। पीएम नहीं बोलते तो क्या हुआ, बाकी मंत्री तो मीडिया से बात करते ही हैं। अब ये सारे तर्क बहुत ही पिलपिले हैं।
पहली बात तो ये कि प्रधानमंत्री या किसी सरकार की जवाबदेही जनता के प्रति नहीं, सवालों के प्रति होती है। जनता तो दो हज़ार मुफ्त मिलने पर वोट दे देती है, अपनी जाति का आदमी देखकर वोट दे देती है, उसके अवैध कब्ज़े को पक्का करने के आश्वासन पर वोट दे देती है। चुनावी जीत इस बात का कतई प्रमाण नहीं कि आप हर सवाल से परे हैं।
सरकारों से सवाल पूछना एक पेशेवर काम है। और किसी भी लोकतंत्र में सबसे बेहतर काम मीडिया ही कर सकती है। अगर किसी Highway बनाने में घोटाला हुआ है, कुछ खास लोगों को सरकारी योजनाओं में फायदा पहुंचाया जा रहा है, तो बात मीडिया को ज़्यादा अच्छे से पता होगी न। क्योंकि उनका काम है ऐसी विसंगतियों पर नज़र रखना।
एक सामान्य आदमी सरसरी तौर पर चीज़ों को जज कर सकता है, लेकिन बिना उचित तैयारी के वो ऐसी ठोस और मज़बूत बात सरकार से नहीं पूछ सकता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में इसीलिए राष्ट्र प्रमुख मीडिया से बात करते हैं, ताकि उनकी शंकाओं और सवालों का जवाब दे पाएं।
अब मैं ही सरकार से पूछना चाहता हूं कि किसी लोकतंत्र में नेता Private School, College और Hospital कैसे चला सकते हैं? पिछले 12 सालों में 93 हज़ार सरकारी स्कूल बंद कैसे हो गए? Private School में मध्यम वर्ग के लिए पढ़ाना ही बड़ी चुनौती है, तो उस 80 करोड़ को तो भूल ही जाओ जो सरकार से मुफ्त राशन लेकर गुज़ारा कर रही है। ये लोकतंत्र की हत्या है, राजनीतिक अपराध है। मैं जानना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री ये अपराध क्यों होने दे रहे हैं?
IQAIR की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के दस सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के छह शहर हैं। Global Liveability Index में मुंबई और दिल्ली 141वें नंबर पर हैं। दुनिया के सबसे गर्म शहर भारत के हैं। राजधानी दिल्ली दुनिया की Rape Capital है।
NCRB के अनुसार अकेले दिल्ली शहर में 2024 में 25 हज़ार लोग गायब हो गए। क्या आप कल्पना भी कर सकते हैं कि दुनिया के किसी और देश की राजधानी में एक साल में 25 हज़ार लोग गायब हो जाएं? हर रोज़ 70 से 80 लोग... उनमें भी ज़्यादातर बच्चे और लड़कियां... बावजूद इसके इस पर कोई Discussion न हो... ये कोई मुद्दा न हो।
और इसी दिल्ली शहर में 2019 में प्रधानमंत्री की भतीजी का पर्स चोरी हुआ था। तब दिल्ली पुलिस की Crime Branch से लेकर Special Cell तक को चोरों को ढूंढने में लगा दिया गया। सैकड़ों CCTV Footage खंगाले गए और सिर्फ 24 घंटे में दोनों चोरों को पकड़ लिया गया।
अब क्या किसी PC में प्रधानमंत्री से ये सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए कि जब आपकी भतीजी के पर्स चोर को 24 घंटे में ढूंढा जा सकता है, उसके लिए Crime Branch और Special Cell को काम में लगाया जा सकता है, तो जो हज़ारों बच्चियां हर साल राजधानी से गायब हो रही हैं, उनके लिए ऐसी Urgency नहीं दिखाई जा सकती?
अगर नहीं दिखाई जा रही, तो इसका मतलब है कि पीएम की भतीजी का पर्स आम आदमी की बच्ची की जान से भी ज़्यादा कीमती है।
लेकिन ये सारे सवाल इसलिए बेमानी हो जाते हैं क्योंकि आपको लगता है कि आप लगातार चुनाव जीत रहे हैं? लेकिन चुनावी जीत क्या जवाबदेही से मुक्ति दिला देती है?
2024 के चुनावों में 57 फीसदी लोग ऐसे थे जिन्होंने NDA को वोट नहीं दिया। अब इन लोगों की कुछ तो असहमति होगी, कुछ तो शिकायत होगी। अगर मीडिया का एक वर्ग उसी शिकायत पर प्रधानमंत्री से सवाल पूछना चाहता है, तो क्या प्रधानमंत्री का फ़र्ज़ नहीं है कि उन शिकायतों का निवारण करें?
भगवान राम ने एक धोबी के कहने पर जब माता सीता को छोड़ा, तो इसका ये मतलब थोड़ा था कि उन्हें सीता जी पर शक था। इसका संदेश यही था कि अगर किसी समाज में एक धोबी जैसा साधारण व्यक्ति भी कोई संदेह व्यक्त करता है, सवाल पूछता है, तो राजा का फ़र्ज़ है कि वो उसे भी संबोधित करे।
दूसरा, ये कहना कि मीडिया का एक वर्ग तो बुरी नीयत से पूछता है, इसलिए पीएम बात नहीं करते। अरे, ये क्या बात हुई? पीएम एक Statesman होता है। सारे विभाग उसके अंतर्गत आते हैं। उसकी एक आवाज़ पर लोग सांसद बन सकते हैं। क्या वो शख्स इतनी योग्यता या संप्रेषण क्षमता नहीं रखता कि कोई उसे बहलाने की कोशिश करे, तो बड़ी विनम्रता से वहीं उसके झूठ का पर्दाफाश कर सके?
प्रधानमंत्री को अगर लगता है कि मीडिया विश्वास करने योग्य नहीं है, उससे बात नहीं की जा सकती, तो कल को जनता कह दे कि हमने देखा है कि High Court के जज के घर से 15 करोड़ मिले थे। हमें पता है जज बिकाऊ हैं, हम आज से अदालत के किसी फैसले को नहीं मानते?
बच्चे कह दें कि हमने देखा है कि चार सालों से NEET के पेपर लीक हो रहे हैं। अब से हम पेपर नहीं देंगे, सीधे हमें 12वीं के नंबर के आधार पर Doctor बनाओ, तो आप क्या जवाब देंगे?
और Middle Class ये कह दे कि नेताओं ने आज तक हमारा भला नहीं किया। न हम सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाते हैं, न सरकारी अस्पतालों में इलाज कराते हैं, न हम मुफ्त राशन लेते हैं। जाओ, आज से हम Tax नहीं देते, तो सरकार क्या करेगी? अगर इस तरह का वर्ग मिलकर एक अवज्ञा आंदोलन चला दे, तो सरकार कैसे Deal करेगी? क्या देशभर में अराजकता नहीं फैल जाएगी?
दाग तो हर संस्था पर है। लेकिन ये कह देना कि पूरा मीडिया ही मेरा दुश्मन है — वो भी तब, जब आप 12 साल से सरकार में हैं — इसलिए मैं कोई PC नहीं करूंगा, Direct कोई सवाल नहीं लूंगा, ये बताता है कि आपको अपनी बौद्धिक योग्यता और पेशेवर सत्यनिष्ठा पर भरोसा नहीं है। और यही भारतीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।
प्लेटो ने आज से ढाई हज़ार साल पहले (380 BCE में) अपनी किताब The Republic में कहा था कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी खामी ये है कि यहां सबसे लोकप्रिय आदमी चुनाव जीतता है, सबसे सही नहीं। उन्होंने कहा कि अगर एक हलवाई और Doctor चुनाव में खड़े हैं, तो हलवाई कह सकता है कि तुम Doctor को वोट क्यों दे रहे हो? ये तो हमेशा तुम्हें अच्छी चीज़ें खाने से रोकता है, ये तुम्हें कड़वी दवाई भी देता है, दस तरह की टोका-टोकी करता है। तुम मुझे जिताओ, मैं तुम्हें हर रोज़ मिठाई खिलाऊंगा। कभी कुछ भी खाने से नहीं रोकूंगा।
अब ये ऐसी बात है जिससे आम आदमी को बहलाया जा सकता है। और यही लोकतंत्र के साथ हो रहा है। मुफ्तखोरी के नाम पर, जातिवाद के नाम पर हमारी राजनीतिक व्यवस्था सालों से जनता को मिठाई खिला रही है। Doctor डर के मारे बंकरों में छिप गए हैं। हलवाइयों ने देश पर राज कर लिया है। देश 80 साल से हलवाइयों के हवाले है।
अब हलवाई समोसा तो बना सकता है, आपको रबड़ी वाला दूध भी पिला सकता है, लेकिन वो Fighter Jet का इंजन नहीं बना सकता। न वो AI की दौड़ में कहीं है, वो दुनिया से 15 साल बाद Semiconductor बनाना शुरू करता है।
वो ऐसा पुल नहीं बना सकता जो उद्घाटन से पहले टूट न जाए। वो लोगों को ऐसी सब्जियां नहीं दे सकता जिनमें मिलावट न हो। वो ऐसी कानून व्यवस्था सुनिश्चित नहीं कर सकता जहां पांच-पांच करोड़ Case Pending न हों। वो ऐसी सड़कें नहीं दे सकता जहां हर साल 5 लाख लोग सड़क हादसों में मारे न जाएं। वो अपनी नदियां नहीं साफ कर सकता, वो साफ हवा नहीं दे सकता और छोड़ो, खुद को धार्मिक बताने वाला यही हलवाई अपने धार्मिक स्थलों को कूड़ेदान बनने से नहीं रोक सकता। उसे उगाही और लूट का अड्डा बनने से नहीं रोक सकता।
वो झूठे नारे गढ़ता है, झूठे दावे करता है, Headline Manage करता है और हर दीवार पर कील ठोकता है ताकि उस पर अपनी तस्वीर टांग सके।
वो हर बुराई को तिरपाल के नीचे ढककर आपको सब कुछ सुंदर दिखाना चाहता है... और कोई पूछ न ले कि तिरपाल के नीचे क्या है, इसलिए वो कभी Press Conference नहीं करता!
-Neeraj Badhwar
#Modi #Melodi #norway
ऐसे गंवार तो पत्रकार बन बैठे हैं
ग्राफ को उल्टा पढ़ रहे है, और उस के आधार पर लंबे लेख लिख रहें हैं ।
भाई इजरायली शेकेल लगातार गिरा है। तुमने शेकेल की जगह डॉलर का ग्राफ लगाया है ।
अगर समझ आ जाए तो डिलीट कर देना, गलती किसी से भी हो सकती है😎
Harish Suwalka retweeted
People who are averse to having kids and live a DINK life. It’s perfectly fine. But they are missing on one key thing in life:
The purest form of love in the world is what a parent has for their kid. Their own blood. It may not be vice versa. Relationships, marriages often devolve into transactional setups. Love between a couple diminishes with time & becomes a most optimal peaceful settlement. But the affection for your kid is pure.
If you are okay with not experiencing it, it’s totally fine. :)



























