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Replying to @PMOIndia @narendramodi
फिर भी पांच दिन बैंकिंग नहीं लागू कर रहे श्रीमानजी।
#5DaysBanking
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Fir bhi #5DaysBanking dene me jor aa rha hai
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Replying to @PMOIndia @narendramodi
Ab to 5 days banking ka file clear kar dijiye pm jee
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तो 5 दिवसीय बैंकिंग देने में क्या समस्या है!
#5DaysBanking
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Replying to @Kuldeepkumar497 @grok
मै तो देखना ही बन्द कर दिया जब से इन लोगों का ये हाट स्टार सोनी लिव की चोचलेबाजी आयी है और सब को मना भी करता हूं कि मत देखा करो ये सबसे बड़ा घोटाला है आम जनता का समय भी बर्बाद करो पैसा भी...इससे अच्छा गांव के मैच देख लिया करो फेसबुक पर बेचारे लाईव दिखाया करते हैं..
प्रेमानंद जी महाराज की रील मैंने भी खूब देखी हैं, उनके ज्ञान के लिए उनका सम्मान भी हृदय तल की गहराइयों से करता हूं, लेकिन @shubhankrmishra के सवाल और भाषा अपनी जगह बिल्कुल जायज और उचित हैं, मैं ऐसा मानता हूं 🙏🙏🙏
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मेरे प्यारे बैंक,
आज जब मैनेजमेंट और सरकार मुझ पर तोहमतें लगा रही हैं, मुझे सरेआम बदनाम कर रही हैं, तब मेरा दिल छलनी हो रहा है। पर तुम तो मेरे सबसे बड़े साक्षी हो न! मेरी वफादारी और मेरी मेहनत का हर एक कतरा तुम्हारी चौखट पर बिखरा है। तुम्हें तो सब याद ही होगा...
* तुम्हें याद है न जब मैं रात भर तुम्हारे फाइलों के ढेर में जागा रहा और सुबह 4 बजे घर लौटा था? मेरी आँखों में एक पल की नींद नहीं थी। मेरी पत्नी जग रही थी, उसने सूखे चेहरे से पूछा था—"क्या बैंक का काम परिवार से भी बढ़कर है?" मैंने मुस्कराकर कहा था—"यह सिर्फ नौकरी नहीं, मेरा अपना बैंक है।"
* मैंने कभी शाम 5 बजे घर जाने की जल्दी नहीं की। हर दिन 2-3 घंटे ज्यादा दिए ताकि तुम्हारे ग्राहकों का काम न रुके। पर इस चक्कर में मेरे छोटे बेटे का वह स्कूल एनुअल डे छूट गया, जहाँ वह स्टेज पर खड़ा होकर दरवाजे पर मुझे ढूँढता रहा था।
* ऑडिट वाले दिनों में जब 10-10 बजे तक बैठकर मैं एक-एक हिसाब मिलाता था, तब घर पर मेरी माँ ठंडे होते खाने को ढँककर मेरा इंतज़ार करती रहती थी। अपनी सेहत बिगाड़कर क्या मैंने कोई स्वार्थ साधा था।
* जब भी डे-एंड (Day End) में देरी हुई, मैंने कभी झल्लाहट नहीं दिखाई। संयम से बैठकर अतिरिक्त काम निपटाया। घर से मेरी बेटी का फोन आता था—"पापा, आप कब आओगे? मुझे होमवर्क में आपकी मदद चाहिए।" और मैं भारी दिल से कह देता था—"बेटा, बस डे-एंड होने दो, फिर आता हूँ।"
* याद है न जन-धन खातों का वह दौर? हमने पूरे जोश से देश के कोने-कोने तक बैंकिंग पहुँचाने का संकल्प लिया था। रेगुलर काम खत्म करने के बाद, अपनी थकान भुलाकर हम देर रात तक खाते खोलते थे।
* याद है ना नोटबंदी की वे लंबी-लंबी कतारें और घबराए हुए चेहरे... पूरे देश का कैश हमारे हाथों से गिना जाकर RBI की करेंसी चेस्ट पहुँचा था। मेरे हाथ काले पड़ गए थे, पीठ दर्द से टूट रही थी, पर देशहित और तुम्हारे सम्मान के लिए मैंने उफ़ तक नहीं की।
* कोरोना में जब पूरी दुनिया घरों में बंद थी, तब मैं अपनी जान जोखिम में डालकर चौखट पर खड़ा था। मेरे पिता जी रोज़ चिंतित होकर मुझे कहते थे—"बेटा, अपना ख्याल रखना।" मेरे कई सहकर्मियों ने कोरोना में दम तोड़ दिया, फिर भी तुम्हारे दरवाजे बंद नहीं होने दिए।
* जब-जब बैंक को मेरी ज़रूरत पड़ी, मैंने अपनी छुट्टियों की बलि चढ़ाई। कितनी ही बार पत्नी और बच्चों के साथ बाहर जाने के वादे तोड़े हैं। तुम तो साक्षी हो, मेरी हर छुट्टी तुम्हारी ड्यूटी में तब्दील हुई है।
* रविवार और छुट्टियों के दिन जब लोग अपने परिवारों के साथ पार्क और सिनेमाघरों में थे, तब मैं लोक अदालत के कैंपों में एनपीए (NPA) रिकवरी के लिए पसीना बहा रहा था।
* तुम्हारे डिजिटल फुटप्रिंट गवाह हैं कि जब-जब कनेक्टिविटी फेल हुई, सिस्टम क्रैश हुआ, मैंने अपनी रातें काली करके क्राइसिस मैनेज किया है। अपनी नींद खोकर तुम्हारे सिस्टम को चालू रखा।
* HRMS का रिकॉर्ड उठाकर देख लो, कितनी बार ऐसा हुआ है कि अप्रूव्ड लीव (स्वीकृत छुट्टी) बीच में छोड़कर मुझे वापस लौटना पड़ा। मेरी पत्नी के इलाज के लिए ली गई छुट्टी हो या परिवार के साथ बिताने के पल, मैंने हर चीज़ से ऊपर तुम्हें रखा।
यह सब बातें मुझे कहनी नहीं चाहिए थीं, पर आज जब मेरी ही वफादारी, मेरे चरित्र और मेरे ईमान पर सवाल उठाया जा रहा है, तो मेरा कलेजा मुँह को आता है।
अगर बैंक मैनेजमेंट और सरकार में तिनका भर भी नैतिकता और शर्म बाकी है, तो अपने ही कर्मचारियों को नीचा दिखाने और बदनाम करने वाले ये घटिया विज्ञापन तुरंत बंद करे और पूरे देश के सामने सार्वजनिक माफीनामा जारी करे।
*बैंक मैनेजमेंट, शर्म करो!*
अपने बैंक के लिए अपना खून-पसीना बहाने वाला,
🙏एक समर्पित बैंककर्मी🙏
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इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने से लेकर सरकारी योजनाएं ग्राहक को टिकाने तक,
आज की डेट में बैंक कर्मचारियों पर इतना काम लादा हुआ है कि उनपर हुए सर्वे में ज्यादातर “हाई स्ट्रेस” में होने की बात बता रहे हैं।
जिन्हें काम देने में दो मिनट नहीं लगता उन्हें दो छुट्टी देने में धरती फट जा रही है
एक साथ .. आठ लाख लोग हड़ताल पर!!
देश में मचेगा हड़कंप… क्या करेगी सरकार!!
#ChakraView में जानिये #BankStrike का अपडेट! @TNNavbharat
8 लाख अधिकारी-कर्मचारी हड़ताल पर! 28 से 30 सितंबर तक बैंकों पर क्यों रहेगी 'तालाबंदी' ?
@awasthis के साथ देखिए, 'चक्रView'
#ChakraViewWithSumitAwasthi #ChakraView #5DayBankingNow #AIBOC #5Dayworking #BankEmployees
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बैंक की एतिहासिक महा-हड़ताल ! 5-डे बैंकिंग पर क्यों अड़े बैंक कर्मी ?
@awasthis के साथ देखिए, 'चक्रView'
#ChakraViewWithSumitAwasthi #ChakraView #5DayBankingNow #AIBOC #5Dayworking #BankEmployees
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Replying to @PIB_India @FinMinIndia
Dear Sir,
We waited for 1010 Days after IBA agreed and signed for 5 Days Work week in 12th BPS.
Always done positive dialogues, but No Notification came in Our favour, So we appeal our Bank Executives to Participate in Our Strike.
Or Help Us to get 5 Days Work Week.
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After reading today's letter by DFS to PSU and RRB Bankers I am unable to find a single positive development and active consideration by the gov or DFS on the topic #5DaysBanking
It's now or never.
#5daybanking should be implemented with immediate effect.
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Govt appealing for Dialogues rather than Strikes but same Govt failed to address the demands through dialogues since 1000+ days. Irony 🤡
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Talking about Appeal on Public Domain and issuing letters of filing FIR on Bank staffs.The Government of India has really learnt the game well from the Pre independence British Government, "Divide and Rule" and "2 Faced Government".
#BankStrike
@ANI @PTI_News @ABPNews @BBCWorld
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Govt appealing Clerks , Scale 1 - 3 Officers to not participate in Strike, But never thought once about them while distributing 10 times more PLI to their Bosses. Irony 🤓
5 Days Banking is not just a demand—it is a long-pending need. INBOC stands firmly for 5 Days Banking in the banking sector. Modern banking, digital services and changing work practices make this reform both relevant and necessary. 5 Days Banking — A step towards better work-life balance and a more modern banking system
#5DayBankingNow
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