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हिंदी के 25 उपन्यासों का मेरा चयन : अवश्य पढ़ना चाहिए।
1 गोदान
2 त्यागपत्र
3 झूठा सच
4 शेखर एक जीवनी
5 मैला आँचल
6 राग दरबारी
7 बूँद और समुद्र
8 आधा गांव
9 गली आगे मुड़ती है
10 काला जल
11 चित्रलेखा
12 मृगनयनी
13 तमस
14 महाभोज
15 कसप
16 झीनी झीनी बीनी चदरिया
17 सूखा बरगद
18 मुझे चांद चाहिए
19 छिन्नमस्ता
20 पाहीघर
21 काशी का अस्सी/उपसंहार
22 सूरज का सातवां घोड़ा
23 सूत्रधार
24 आखिरी कलाम
25 महाब्राह्मण
आम आदमी पार्टी, उसके एक नेता, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सीधा नाम लेकर किया गया आघात है। भगवंत मान सुबह सुबह शराब पी लेते हैं! उनके मुंह से बू आती थी!
राहुल गांधी का करारा प्रहार हुआ है। जो लोग कहते हैं कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस की बी पार्टी है, वह लोग देखें! इस तरह धज्जियाँ उड़ाई जाती हैं। राहुल गांधी ने आम आदमी पार्टी के परखच्चे उड़ा दिए। अरविन्द केजरीवाल को निरुत्तर कर दिया है।
#aamadamiparty
डॉ रमाकान्त राय retweeted
आजकल टीवी स्टूडियो में बहस नहीं होती, कई बार बहस का विस्फोट डिजाइन किया जाता है। एंकर बारूद बिछाते हैं, मेहमान चिंगारी बनते हैं और टीआरपी उस आग का कारोबार करती है। दुर्भाग्य यह है कि धुआँ स्टूडियो से बाहर निकलकर समाज की आँखों में भरता है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि बहस में आग लगाने वाले स्टूडियो में सुरक्षित रहते हैं, लेकिन उस आग की लपटें अक्सर समाज, विश्वविद्यालयों और सड़कों तक पहुँच जाती हैं।
टीआरपी के लिए पैदा किया गया उन्माद जब वास्तविक जीवन में वैमनस्य और हिंसा में बदलने लगे, तब एंकरों की जवाबदेही पर भी सवाल उठने चाहिए।
पत्रकारिता का काम समाज को सोचने के लिए विवश करना है, एक-दूसरे से भिड़ने के लिए उकसाना नहीं।
याद रखिए, माइक की ताकत से माहौल बनाया जा सकता है, लेकिन उस माहौल के सामाजिक परिणामों से हमेशा पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता।
@RamaKRoy
बैलेट पेपर से चुनाव हुए तो अमरीका में प्रेसिडेंट @realDonaldTrump की पार्टी की बुरी तरह हार हुई। वहां डेमोक्रेटिक पार्टी की अच्छी जीत हुई है। बैलेट पेपर से चुनाव मतलब वोट चोरी असंभव।
राहुल गांधी @RahulGandhi जी यही मांग कर रहे हैं। इस देश में सबसे बड़ी दिक्कत वोट चोरी है।
अमेरिका में नहीं होती क्योंकि वहां ज्ञानेश कुमार नहीं हैं। वहां SIR नहीं होता।
आत्ममुग्धता में लालू यादव के सुपुत्र तेज प्रताप यादव @TejYadav14 कई स्वनामधन्य युग पुरुषों से आगे निकल चुके हैं। जब से वह रियलिटी शो से लौटे हैं, उनकी लोकप्रियता में भारी वृद्धि हुई है। ऐसा उन्होंने स्वयं ही कहा है।
असल बात है कि आज भी देश में तमाशा देखने के लिए लोग स्वतः ही उमड़ पड़ते हैं। कभी इस देश में बुलडोजर चलता देखने के लिए लोगों की भीड़ हो जाती थी। जब से उत्तर प्रदेश सरकार ने बुलडोजर को आम कर दिया, तब से लोगों की दिलचस्पी उसे देखने में भी नहीं रही।
अब नया दृश्य तेज प्रताप यादव को लेकर बना है। वह नई सनसनी हैं। बिहार में वैसे भी वह बहुत लोकप्रिय हैं। शो से लौटने के बाद उनकी सुरक्षा को भी खतरा हो गया है।
उन्होंने जो लिखा है, वह आप +alt में पढ़ सकते हैं।
अमरीका में मध्यावधि चुनाव हो गए हैं! परिणाम चाहे जो आए, डोनाल्ड ट्रंप पर कोई असर नहीं होगा। उनकी ताकत घटने वाली नहीं है।
मैं चाहता हूं कि भारत में भी इसी तरह मध्यावधि चुनाव हो। बल्कि ऐसी व्यवस्था हो कि चार साल जीते हुए दल का प्रधानमंत्री रहे और एक साल विपक्ष के नेता को बनाया जाए।
इस तरह से राहुल गांधी जी प्रधानमंत्री बन जायेंगे। और कांग्रेस हमेशा विपक्ष में रहती रहेगी।
साँप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी। Evm सही काम करने लगेगा। चुनाव आयोग ठीक रहेगा और वोट चोरी भी नहीं होगी।
फिर राहुल गांधी की हवा चल रही है।
राहुल गांधी की आंधी चल रही है।
राहुल गांधी की सुनामी चल रही है।
भी ठीक लगने लगेगा।
लोकतंत्र के वर्तमान स्वरूप में बदलाव होना चाहिए।
डॉ रमाकान्त राय retweeted
एक बार फिर साहित्यिक उपलब्धियों के पटल पर जुलाई सितंबर 2026 की कथा श्रेणी की सूची में महामना के बगिया के लाल अनुज @AuthorAtul एवं आदरणीय गुरुजी @manojrajant जी की कृतियों ने विशेष स्थान बनाया है।
यह केवल पुस्तकों की सूची में स्थान पाने की उपलब्धि नहीं, बल्कि सृजनशीलता, साहित्यिक साधना और पाठकों से बने आत्मीय जुड़ाव का परिचायक है।
शब्द जब अनुभवों से समृद्ध होते हैं और लेखनी जब संवेदना को स्वर देती है, तब साहित्य अपनी अलग पहचान स्वयं गढ़ता है।
अनुज अतुल राय एवं आदरणीय गुरुजी मनोज राजन त्रिपाठी जी को इस उल्लेखनीय साहित्यिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।
साहित्य की यह यात्रा निरंतर नए शिखर छुए और आपकी लेखनी पाठकों के हृदय में अपनी जगह बनाती रहे। हर हर महादेव, जय हो महामना।
@ramakroy
भगवान श्रीकृष्ण के तथाकथित तौहीन को केंद्रित करके उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने जिस तरीके से आक्रामक टिप्पणियां की हैं, वह सिद्ध करती हैं कि वह अब श्रीकृष्ण को आधार बनाकर अपनी हिन्दू छवि गढ़ रहे हैं। वह यदुवंशी हैं और यह कर रहे हैं तो स्वाभाविक माना जाना चाहिए।
वह और उनका वृहत्तर परिवार भगवान श्रीकृष्ण में आस्था रखता रहा है और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, भैयादूज और गोधन पूजा को बहुत उल्लास और आस्था से मनाता रहा है। इधर वोक बनने के चक्कर में और पश्चिमी सभ्यता की चकाचौंध में पल गए लड़कों के प्रभाव में आ कर वह हिन्दू मार्ग से विरत हो गए थे। यहां तक कि उन्होंने मुलायम सिंह यादव का त्रयोदशाह नहीं किया। कुंभ नहाने नहीं गए और राम मंदिर का दर्शन भी नहीं किया।
अब उम्मीद की जानी चाहिए कि वह अयोध्या जी जायेंगे और वह सारे कर्मकांड करेंगे जो शास्त्रोचित हैं।
धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री इस घटना से और लोकप्रिय हुए हैं। उन्होंने अखिलेश जी को सुमार्ग पर लाने का उपक्रम किया है!
#AkhileshYadav
डॉ रमाकान्त राय retweeted
Replying to @RamaKRoy
🙏🕉️🙏
भईया जी,
एक सवाल है...
'ईशनिंदा' शब्द को सनातन धर्म के संदर्भ में किस आधार पर और किस अर्थ में इस्तेमाल किया जा रहा है?
सनातन धर्म में तो प्रश्न करने, तर्क करने, शास्त्रार्थ करने और विभिन्न दार्शनिक मत रखने की समृद्ध परंपरा रही है।
हमारे यहां भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम से माखन चोर और छलिया कहा जाता है, लेकिन उसमें अपमान नहीं, भक्ति और आत्मीयता है।
इसलिए यह समझना जरूरी है कि धार्मिक आलोचना और जानबूझकर धार्मिक अपमान दो अलग-अलग बातें हैं।
हम न किसी धर्म के अपमान का समर्थन करते हैं और न किसी धर्म की आलोचना पर अनुचित प्रतिबंध का।
हमारा प्रश्न केवल इतना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक सम्मान के लिए एक ही मापदंड क्यों नहीं?
सनातन की उदारता को कमजोरी न समझा जाए और धार्मिक भावनाओं के सम्मान को किसी एक धर्म की बपौती भी न बनाया जाए।
जय श्री राम! 🙏
आ नो भद्रा क्रतवो यंतु विश्वतः!
सद्विचार जहां से आएं, लेना चाहिए। कब तक जाहिल बने रहोगे। कब तक मूढ़ता को गले लगाये रहोगे।
अनपढ़ और जाहिल लोग। जाकर मेरा टाइमलाइन देख आ। वहां हमने Blasphemy पर चर्चा की है। पढ़ लोगे तो थोड़ी सी समझ बढ़ेगी। फिर भी मोटी बुद्धि में कुछ न जाए तो भैंस चराना।
मैं सदा से चाहता रहा हूं कि अखिलेश यादव जी इतने ही धर्मपरायण दिखें। वह अपनी भक्ति भावना का साक्षात प्रकटीकरण करें। सबको बता दें कि वह यदुवंशी हैं और भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम के अनन्य भक्त हैं।
वह कुछ मुट्ठी भर वाचाल और अनपढ़ लोगों के बहकावे में आकर अपने देवताओं, भगवान, उनसे संबंधित आख्यान आदि का मखौल न करें।
धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने यह सद्कर्म उनसे करवाया है। अब अखिलेश यादव जी असली और सही हिंदू बनेंगे। वह धार्मिक वृत्ति के सदाचरण करने वाले नेता बनें और पौंड्रकों, नमूनों, फर्जी क्रांतिकारियों को अपने दल से निकालें।
मैं तो चाहता हूं कि वह मुलायम सिंह यादव जी का विधिवत अंतिम संस्कार करें। त्रयोदशाह का भोज करें और केवल ब्राह्मणों को ही नहीं, क्षेत्र के भाई भयवद को खिलायें। उनका जूठन उठाएं। संभव हो तो आठ दिन गरुड़ पुराण का श्रवण करें।
ये सनातन विरोधी किसके कहने पर सक्रिय है। पहले भगवान कृष्ण के बारे में विवादित वीडियो आया अब भगवान राम के पिता के बारे अभद्रता की बात प्रसारित हो रही है। इसके राजनीतिक आकाओं को ये सब मंजूर होगा, हमें अंश मात्र भी स्वीकार्य नहीं है।
सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के अपराध में इसके सभी कार्यक्रम रद्द किये जाएं। अब सच्चे सनातनी इनकी पर्ची लिखेंगे।
अनपढ़ और जाहिल लोग! कूर्म पुराण होता है, कुर्मा पुराण नहीं। कूर्म का अर्थ कच्छप है, कछुआ। यह भगवान विष्णु के दशावतार में से एक है।
इधर उधर से टीप टाप पर चिपकाने से ही प्रयोजन है तुम्हारा। तुमको उसके अर्थ से कोई लेना देना नहीं।
यह भांडपने की पहचान है।
वैसे भी, कूर्म पुराण में यही लिखा है कि कर्मों का फल मिलेगा। वह फल है रौरव नरक में पड़ने का।
इसका Blasphemy से कोई साम्य नहीं है!
कुर्मा पुराण के अनुसार
निन्दां च देवतानां च वेदानां च विशेषतः ।
वर्जयेन्मतिमान् लोके नास्ति तस्मात् परं त्वघम् ॥
गुरोर्देवस्य वेदस्य यः करोति मुधा नटः ।
रौरवे पच्यते सोऽपि कल्पकोटिशतानि च ॥ (कूर्म पुराण, उत्तर भाग 16.38-40)
अर्थात् बुद्धिमान मनुष्य को देवताओं और विशेष रूप से वेदों की निंदा से सर्वथा दूर रहना चाहिए, क्योंकि इससे बड़ा कोई पाप नहीं है। जो मूर्ख व्यक्ति बिना किसी कारण के गुरु, देवता और वेदों की निंदा या उपहास करता है, वह सैकड़ों करोड़ कल्पों तक 'रौरव' नामक भयानक नरक में कष्ट भोगता है।
ईशनिन्दा अंग्रेजी के शब्द Blasphemy के लिए गढ़ा गया हिन्दी शब्द है। भारत में ईशनिन्दा जैसी कोई गतिविधि नहीं मानी जाती। यहां पौंड्रक, हिरण्यकश्यप, शिशुपाल, जरासंध, रावण जैसे नमूने हो गए जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण, विष्णु और शिव तक की नकल की, निन्दा की और जहां तहां बुराई करते फिरे। भारत में बहुत से संप्रदाय हो गए जिसके अनुयायियों ने ईश्वर के अस्तित्व को नकार दिया। कबीर दास की कविता पढ़ो तो पता चलेगा कि वह कितने आक्रामक हैं। आधुनिक काल में बहुतेरे ऐसे नास्तिक और विध्वंसक लोग हो गए हैं जिन्होंने ईश्वर, अवतार आदि को गाली दी। अस्तित्व तक नहीं माना। कांग्रेस की सरकार सर्वोच्च न्यायालय में इसी हलफनामे के साथ थी कि राम नहीं हैं। कोई रामसेतु नहीं है।
यह जो Blasphemy है, उसे उर्दू में कुफ़्र कहते हैं। यह तौहीन का पर्याय है। यह उस देवदूत, उनके संदेशवाहक, किताब आदि की अवमानना से होता है। सामी समाज में यह धारणा प्रचलित है और सब इसके बारे में जानते हैं। वहां इससे संबंधित कानून है और मृत्युदंड तक की सजा भी दी जाती है। सुकरात को जहर का प्याला दिया गया था तो उसपर भी यही आरोप था। न्यूटन और पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है, ऐसा बताने वाले व्यक्ति को भी मौत की सजा दी गई थी। वह अखबार वाला, जिसने कार्टून छाप दिया था, वह भी इसमें आ गया था। सलमान रशदी इससे प्रभावित हैं।
अखिलेश यादव जी @yadavakhilesh ने ईशनिंदा शब्द का जो प्रयोग किया है, वह अनुचित तो है ही भाव का सही प्रकटीकरण नहीं है। उन्हें इतना अंतर तो नहीं मालूम होगा, लेकिन इस तरह का विमर्श करना उनके लिए ठीक नहीं है। यह आपका क्षेत्र नहीं है।
ईशनिंदा? हिंदू धर्म में ईशनिंदा नहीं है। कृष्ण को टेढ़ा कहना ईशनिंदा है?
असली सांप्रदायिक बन गए हैं आप।
मानवीय भूलों के लिए तो क्षमा किया जा सकता है, ‘ईशनिंदा’ के लिए कभी नहीं। ऐसे दुष्मुखी लोगों पर आजीवन प्रतिबंध लगाना ही समाज के लिए श्रेयस्कर है। पूरे देश में इनके सभी कार्यक्रम रद्द किये जाएं, नई अनुमति नहीं दी जाए और सार्वजनिक जीवन में हर सच्चा सनातनी इनका पूर्ण बहिष्कार करे, यही इनके अक्षम्य पाप का दंड होना चाहिए, नहीं तो वो भी ईशनिंदा के पाप का भागी बनकर अपना लोक-परलोक बिगाड़ लेगा।
अगर दुर्भावना से भरा ऐसा व्यक्ति जीवन भर भी एकांतवास करके अपने किये का पश्चाताप और प्रायश्चित करेगा तो भी कोई भी धर्म प्रधान आस्थावान उसे माफ़ नहीं करेगा। मनुष्य का दंभ इतना भी नहीं होना चाहिए कि वो अपने को ईश्वर से ऊपर समझने लगे।
वैधानिक कार्रवाई हो।









