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Member of Legislative Council U.P. | Gorakhpur - Maharajganj seat (सदस्य, विधानपरिषद / विधायक)

Gorakhpur | Lucknow
Joined March 2022
आभार माननीय मुख्यमंत्री @myogiadityanath महाराज जी 💐
मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी महाराज से आज लखनऊ में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के माननीय सदस्य श्री सी.पी. चन्द जी ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री श्री शतरुद्र प्रकाश जी एवं उत्तर प्रदेश विधान परिषद के पूर्व सदस्य श्री रमेश मिश्रा जी भी उपस्थित रहे। @CPChand10
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#HappyBirthday उत्तर प्रदेश की 63 जेवर (नोएडा, गौतमबुद्धनगर) विधानसभा सीट से सदस्य माननीय ठाकुर धीरेंद्र सिंह जी, आपको 60वें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 🎂🪷 बाबा गोरक्षनाथ जी से प्रार्थना है कि आप दीर्घायु हों और सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें 💐 @BJP4UP
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#सरदार_वल्लभभाई_पटेल 🇮🇳 #राष्ट्रीय_एकता_दिवस 31 अक्टूबर 1875 - 15 दिसंबर 1950 भारत की एकता, अखंडता और संकल्प के प्रतीक, आधुनिक भारत के शिल्पकार, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की 151 वीं जयंती पर सादर नमन 💐 उनकी अदम्य इच्छाशक्ति और दूरदर्शिता ने अनेक रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत का स्वप्न साकार किया । आइए, उनके आदर्शों से प्रेरित होकर एक सशक्त, एकजुट और समृद्ध भारत के निर्माण का संकल्प लें । सरदार वल्लभभाई पटेल (पूरा नाम: वल्लभभाई झावेरभाई पटेल) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता, स्वतंत्र भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे। उन्हें “भारत के लौह पुरुष” (Iron Man of India) के नाम से जाना जाता है *जीवन परिचय •जन्म: 31 अक्टूबर 1875, नडियाद (गुजरात) •मृत्यु: 15 दिसंबर 1950, मुंबई (75 वर्ष आयु) •पिता: झावेरभाई पटेल •माता: लाडबा पटेल •शिक्षा: लंदन के मिडिल टेम्पल से बैरिस्टर की डिग्री (1913 में भारत लौटे) •परिवार: पत्नी जावेरबाई (1909 में निधन), पुत्री मणिबेन और पुत्र दह्याभाई वे एक किसान परिवार से थे। शुरुआती जीवन में वकालत की और सफल वकील बने। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए *प्रमुख योगदान •बारडोली सत्याग्रह (1928): किसानों के कर-विरोधी आंदोलन का सफल नेतृत्व किया। इसी सफलता के कारण महिलाओं ने उन्हें “सरदार” (नेता) की उपाधि दी • स्वतंत्रता आंदोलन: खेड़ा सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका • रियासतों का एकीकरण: आजादी के बाद लगभग 560–565 देशी रियासतों को भारत संघ में मिलाने का ऐतिहासिक काम किया। उनके बिना भारत कई छोटे टुकड़ों में बँट सकता था। वी.पी. मेनन उनके सहयोगी थे। • प्रशासन: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1947 में वे प्रथम उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने *विरासत •स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: गुजरात के केवड़िया (एकता नगर) में नर्मदा नदी पर बनी दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा (182 मीटर)। 31 अक्टूबर 2018 को उद्घाटन हुआ। •भारत रत्न: 1991 में मरणोपरांत सम्मानित •राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas): हर साल 31 अक्टूबर को उनके जन्मदिन पर मनाया जाता है यह दिन भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के रूप में मनाया जाता है ।आज 31 अक्टूबर 2026 है — यह 151वीं जयंती का अवसर है *इतिहास भारत सरकार ने 2014 में 31 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से “राष्ट्रीय एकता दिवस” घोषित किया। इसका उद्देश्य सरदार पटेल के योगदान को सम्मान देना था, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद लगभग 560–565 देशी रियासतों को भारत संघ में मिलाकर देश को एकजुट किया । 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी दिन “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” (Ek Bharat Shreshtha Bharat) पहल की शुरुआत की, जो विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाती है *उद्देश्य और महत्व •देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को मजबूत करना •विविधता में एकता का संदेश फैलाना •सरदार पटेल की दूरदृष्टि और उनके “लौह पुरुष” वाले योगदान को याद करना •नागरिकों में राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना जगाना सरदार पटेल के बिना आज का एकीकृत भारत संभव नहीं था। वे केवल रियासतों को जोड़ने वाले नहीं थे, बल्कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की नींव मजबूत करने वाले भी थे। •राष्ट्रीय एकता की शपथ: सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और संस्थानों में ली जाती है। •रन फॉर यूनिटी (Run for Unity): देशभर में दौड़ का आयोजन •मुख्य समारोह एकता नगर (केवड़िया), गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा — 182 मीटर) के पास •सांस्कृतिक कार्यक्रम, परेड, और जागरूकता अभियान एकता शपथ (सारांश):
“मैं देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए स्वयं को समर्पित करता हूँ और इस संदेश को देशवासियों तक फैलाने का प्रयास करूँगा। यह शपथ सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदृष्टि से संभव हुई एकता की भावना से लेता हूँ।” *2026 कार्यक्रम इस साल मुख्य कार्यक्रम एकता नगर में हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और शाम को एकता परेड होनी है। इस बार नक्सल-मुक्त भारत, वंदे मातरम के 150 साल, और देशभर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों पर खास जोर है। देशभर में रन फॉर यूनिटी और शपथ कार्यक्रम चल रहे हैं राष्ट्रीय एकता दिवस सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि हर नागरिक को याद दिलाता है कि भारत की ताकत उसकी विविधता और एकजुटता में है 🇮🇳
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#HappyBirthday उत्तर प्रदेश की 88 आगरा (दक्षिण) विधानसभा सीट से सदस्य व प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री उच्च शिक्षा माननीय योगेंद्र उपाध्याय जी, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 🎂🪷 बाबा गोरक्षनाथ जी से प्रार्थना है कि आप दीर्घायु हों और सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें 💐 @YogendraUpadhy @BJP4UP
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#HappyBirthday उत्तर प्रदेश की विधान परिषद में साथी सदस्य एवं भाजपा प्रदेश मुख्यालय प्रभारी माननीय गोविंद नारायण शुक्ला जी, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 🎂🪷 बाबा गोरक्षनाथ जी से प्रार्थना है कि आप दीर्घायु हों और सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें 💐 @gnshuklabjp @BJP4UP
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#वाल्मीकि_जयंती आदिकवि, सत्य एवं मर्यादा के अमर महाकाव्य 'रामायण' के रचयिता महर्षि वाल्मीकि जी की पावन जयंती पर सादर नमन 💐 महर्षि वाल्मीकि केवल संस्कृत काव्य के प्रथम सर्जक ही नहीं, अपितु वे भारतीय संस्कृति, धर्म, करुणा और नैतिक मूल्यों के अमर ध्वजवाहक हैं। उनकी तेजस्वी लेखनी से जीवंत 'श्रीरामचरित' युगों-युगों से संपूर्ण मानवता को कर्तव्यपरायणता, भ्रातृप्रेम और आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देता आ रहा है। आज 26 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को महर्षि वाल्मीकि जयंती / प्रकट दिवस मनाया जा रहा है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास (अश्विन) की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर सुबह लगभग 11:55 बजे से शुरू हुई और 26 अक्टूबर सुबह लगभग 9:41 बजे तक रही। सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि होने के कारण जयंती 26 अक्टूबर को मनाई जा रही है (25 अक्टूबर की रात शरद पूर्णिमा के रूप में मनाई गई) महर्षि वाल्मीकि संस्कृत साहित्य के आदिकवि (प्रथम कवि) माने जाते हैं और रामायण (लगभग 24,000 श्लोकों वाले महाकाव्य) के रचयिता हैं। प्रचलित कथा के अनुसार, वे पहले रत्नाकर नाम के डाकू थे। नारद मुनि से मुलाकात के बाद उन्होंने अपना मार्ग बदल लिया। परिवार के सदस्यों से जब पता चला कि वे उनके पापों में भागीदार नहीं बनेंगे, तो पश्चाताप हुआ। नारद के निर्देश पर उन्होंने ‘राम’ नाम का जाप किया। लंबे तप के दौरान उनके शरीर पर दीमकों की बांबी (वल्मीक) बन गई, जिससे उन्हें वाल्मीकि नाम मिला। एक क्रौंच पक्षी के जोड़े के शोक से प्रेरित होकर उन्होंने प्रथम श्लोक की रचना की, जिसे काव्य का आरंभ माना जाता है। वे सीता जी के आश्रयदाता और लव-कुश के गुरु भी थे। #MaharishiValmikiJayanti
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#शरद_पूर्णिमा विश्व में भारत ही एकमात्र ऐसा राष्ट्र है , जहां छह ऋतुएं होती हैं - बसंत , ग्रीष्म , वर्षा , शरद , हेमंत एवं शिशिर ऋतु। दुनिया में साधारणत: चार मौसम ही पाए जाते हैं - ग्रीष्म ,वर्षा , शीत एवं बसन्त । आश्विन मास की पूर्णिमा ही एकमात्र ऐसी पूर्णिमा है , जो ऋतु के नाम पर जानी जाती है । यह शरद ऋतु के अंतर्गत आता है , इसलिए आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। पूर्णिमा पूर्णता का प्रतीक है। शरद ऋतु में मनाए जानेवाले नवरात्र को शारदीय नवरात्र कहते हैं आज, 25 अक्टूबर 2026 (रविवार) को शरद पूर्णिमा है इसे कोजागरी पूर्णिमा, आश्विन पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है *तिथि और समय • पूर्णिमा तिथि आरंभ: 25 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 11:55 बजे • पूर्णिमा तिथि समाप्ति: 26 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 9:41 बजे • मुख्य रात्रि अनुष्ठान और खीर रखने की परंपरा 25 अक्टूबर की रात को ही की जाती है, क्योंकि उस रात पूर्णिमा की चांदनी उपलब्ध होती है। • चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार अलग-अलग होता है (आमतौर पर शाम 5 बजे के आसपास) *महत्व इस रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि चंद्रमा की किरणें अमृत (अमृत वर्षा) बरसाती हैं। इसलिए इस दिन की चांदनी को स्वास्थ्यवर्धक और शुभ माना जाता है। • कोजागरी पूर्णिमा: मान्यता है कि माता लक्ष्मी इस रात पृथ्वी पर आकर पूछती हैं “को जागृति?” (कौन जाग रहा है?) और जो भक्त जागकर उनकी पूजा करते हैं, उन्हें धन-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। • भगवान श्रीकृष्ण की रास लीला (गोपियों के साथ) से भी जुड़ा है। • शरद ऋतु की शुरुआत और मानसून के अंत का प्रतीक भी है द्वापर युग में लीला-पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा को ही महा रास-लीला की थी। गोपियों ने पति (स्वामी) के रूप में श्रीकृष्ण की आराधना की थी। अतः भगवान ने उनका भाव पूर्ण करने के लिए अपने को असंख्य रूपों में प्रकट करके गोपियों के साथ क्रीड़ा की थी। वास्तव में सच्चिदानंदघन सर्वांतर्यामी प्रेमरस - स्वरूप , लीला-रसमय परमात्मा भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी ह्लादिनी शक्तिरूपा आनंद-चिन्मय रस प्रतिभाविता अपनी ही प्रतिमूर्ति से उत्पन्न अपनी प्रतिबिंब-स्वरूपा गोपियों से आत्म-क्रीड़ा की थी। पूर्णिमा की तिथि काफी पुण्यदायिनी व शक्तिवर्धक है। ऐसी मान्यता है की इस पूर्णिमा को चंद्रमा से अमृत-वर्षा होती है , जो पायस (खीर) को स्वादिष्ट एवं पौष्टिक ही नहीं वरन् अमृतमय बनाती है। इस रात्रि को चंद्रमा की स्निग्ध किरणें औषधियुक्त होकर खीर को पुष्टिकारक बना देती हैं। हिंदू समाज में इस दिन खीर पकाकर चांदनी प्रकाश में रखने की परंपरा है , तत्पश्चात् उसका सेवन किया जाता है। आपको शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं 🪷 *मुख्य रीति 1. खीर की परंपरा: शाम को दूध और चावल की खीर बनाकर उसे खुले आसमान के नीचे चांदनी में रखा जाता है (पतली कपड़े से ढककर) माना जाता है कि चंद्रमा की किरणें खीर में अमृत गुण भर देती हैं। अगले दिन सुबह इसे प्रसाद के रूप में खाया जाता है 2. लक्ष्मी पूजा: विशेष रूप से रात को (निशिता काल के आसपास) माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। घर को साफ-सुथरा रखकर दीप जलाए जाते हैं 3. चंद्र पूजा: चंद्रोदय के बाद चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है 4. जागरण: कई जगह रात भर जागकर भजन-कीर्तन किया जाता है 5. व्रत रखने और दान करने का भी विधान है #SharadPurnima2026 #KojagiriPurnima
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#विश्व_पोलियो_दिवस #PolioFreeWorld "पोलियो मुक्त भारत' की महत्वपूर्ण संकल्पना को साकार करने में अपना अमूल्य योगदान देने वाले समस्त स्वास्थ्यकर्मियों, चिकित्सकों एवं जागरूक नागरिकों को 'विश्व पोलियो दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएं 💐 विश्व पोलियो दिवस (World Polio Day) हर साल 24 अक्टूबर को मनाया जाता है। आज (24 अक्टूबर 2026) ये भारतवर्ष में मनाया जा रहा है। *इतिहास और महत्व यह दिवस Rotary International द्वारा डॉ. जोनास साल्क (Jonas Salk) के जन्मदिन की याद में शुरू किया गया था। साल्क ने 1955 में पहला सफल पोलियो वैक्सीन (Inactivated Polio Vaccine - IPV) विकसित किया था। बाद में अल्बर्ट सबिन ने ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) बनाया, जिसने उन्मूलन अभियान को गति दी। 1988 में Global Polio Eradication Initiative (GPEI) शुरू हुआ। तब दुनिया में हर साल लगभग 3.5 लाख पोलियो के मामले होते थे। तब से मामलों में 99% से अधिक कमी आई है। भारत 2014 में वाइल्ड पोलियो वायरस से मुक्त घोषित हो चुका है (पल्स पोलियो अभियान के कारण) *2026 थीम इस साल की थीम है: “One day, one focus: ending polio for good” (एक दिन, एक लक्ष्य: पोलियो का पूर्ण उन्मूलन) यह थीम हर बच्चे को टीका देने, वायरस की निगरानी और सामूहिक प्रयासों पर जोर देती है। वर्तमान स्थिति (2026) • वाइल्ड पोलियो वायरस अब सिर्फ अफगानिस्तान और पाकिस्तान में एंडेमिक है। • 2026 में इन दोनों देशों में मामले बढ़े हैं (अफगानिस्तान में ज्यादा) • अफ्रीका में कई देशों में variant polio के outbreaks बंद हुए हैं, लेकिन कुछ जगहों पर चुनौतियां बनी हुई हैं। • पोलियो का कोई इलाज नहीं है, लेकिन वैक्सीन से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। मुख्य रूप से 5 साल से कम उम्र के बच्चों को खतरा होता है। *भारत में स्थिति - *पोलियो मुक्त घोषणा* : 27 मार्च 2014 को भारत को WHO द्वारा “पोलियो मुक्त” घोषित किया गया। - *पल्स पोलियो कार्यक्रम* : 1995 से चल रहा है, जिसमें 0–5 साल के बच्चों को ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) दी जाती है “एक बूंद जीवन बचाती है। पोलियो मुक्त दुनिया, हमारा सपना” आज ही अपने आस-पास के बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित करें💧💉 #WorldPolioDay #EndPolio
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#HappyBirthday गुजरात प्रदेश की 06 गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र से सांसद , @BJP4India के पूर्व अध्यक्ष व केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री माननीय श्री अमित शाह जी को जन्मदिवस पर हार्दिक बधाई एवं अनंत मंगलकामनाएँ 🎂🪷 राष्ट्र के प्रति आपका परिश्रम, समर्पण और संगठन कुशलता हम सभी भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है। देश के गृहमंत्री के रूप में राष्ट्रीय और आंतरिक सुरक्षा में आपका उल्लेखनीय योगदान अविस्मरणीय है। बाबा गोरक्षनाथ जी से आपके उत्तम स्वास्थ्य, सुदीर्घ व यशस्वी जीवन की कामना है 💐 Warm birthday greetings to Union Home Minister Shri @AmitShah Ji 🎂 Your strength, vision and leadership inspire millions. From shaping key policies like the abrogation of Article 370 to ensuring the nation's security, your leadership has lifted Bharat to new heights 🇮🇳 @AmitShah @AmitShahOffice
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#पुलिस_स्मृति_दिवस #PoliceCommemorationDay राष्ट्र की सुरक्षा, संप्रभुता एवं एकता की अक्षुण्णता के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले वीर पुलिसकर्मियों का त्याग, साहस और कर्तव्यनिष्ठा सदैव राष्ट्र की स्मृतियों में अमिट रहेंगे । पुलिस स्मृति दिवस पर उन सभी अमर बलिदानियों को विनम्र श्रद्धांजलि तथा देशभर में निष्ठापूर्वक सेवारत समस्त पुलिसकर्मियों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता एवं सादर अभिवादन 💐 पुलिस स्मृति दिवस (Police Commemoration Day / Police Memorial Day) हर साल 21 अक्टूबर को पूरे भारत में मनाया जाता है । यह उन पुलिसकर्मियों की शहादत और बलिदान को याद करने का दिन है, जिन्होंने देश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया *इतिहास 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स (Aksai Chin क्षेत्र, भारत-तिब्बत सीमा) में चीनी सेना ने भारतीय पुलिस गश्ती दल पर घात लगाकर हमला किया। सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों की टुकड़ी (सब-इंस्पेक्टर करम सिंह के नेतृत्व में) नियमित गश्त पर थी, जब भारी हथियारों से लैस चीनी सैनिकों ने बिना चेतावनी हमला कर दिया। इस हमले में 10 पुलिसकर्मी शहीद हुए, कई घायल हुए और कुछ को बंदी बना लिया गया। उनके शव चीनी पक्ष ने लगभग तीन सप्ताह बाद (13 नवंबर 1959) लौटाए, जिनका हॉट स्प्रिंग्स में पूरे पुलिस सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया । जनवरी 1960 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों के वार्षिक सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि हर साल 21 अक्टूबर को इन शहीदों और कर्तव्य के दौरान शहीद होने वाले सभी पुलिसकर्मियों की स्मृति में पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाएगा *महत्व यह दिवस राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs जैसे CRPF, BSF, CISF, ITBP आदि) के उन वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर है, जो सीमा सुरक्षा, आतंकवाद, अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था और आपदाओं के दौरान जान गंवाते हैं। देशभर में पुलिस मुख्यालयों, स्मारकों और थानों में परेड, श्रद्धांजलि कार्यक्रम और नाम पठन के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक (National Police Memorial) की 21 अक्टूबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था। इसमें 30 फीट ऊंची ग्रेनाइट मूर्ति, ‘वॉल ऑफ वैलर’ (शहीदों के नाम) और संग्रहालय शामिल हैं *2026 आयोजन आज (21 अक्टूबर 2026) केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। CAPFs और दिल्ली पुलिस की संयुक्त परेड होगी। ‘नशा मुक्त भारत’ थीम पर मोटरसाइकिल रैली भी निकाली जाएगी। देशभर के पुलिस प्रतिष्ठानों में भी कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। इस दिन पुलिसकर्मियों के साहस, त्याग और समर्पण को नमन किया जाता है। “सेवा ही लक्ष्य” के साथ वे देश की रक्षा करते हैं 🇮🇳 @Uppolice @dgpup @uppstf @Rajeevkrishna69 @AmitabhYash #PoliceCommemorationDay2026
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#HappyBirthday पूर्व मुख्यमंत्री एवं उत्तर प्रदेश की 60 डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) लोकसभा सीट से सदस्य माननीय जगदंबिका सिंह पाल जी को जन्म दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ 🎂🪷 बाबा गोरक्षनाथ जी से आपके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और यशस्वी जीवन की कामना करता हूँ 💐 @jagdambikapalmp @BJP4UP
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#विजयादशमी #दशहरा विजयादशमी (दशहरा) की हार्दिक शुभकामनाएं 💐 यह त्योहार बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। इसमें भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय दोनों मनाई जाती हैं। त्याग, सद्मार्ग, संस्कार, सदाचार और सनातन मूल्यों की शाश्वत विजय के पावन प्रतीक महापर्व विजयादशमी की आप सभी को मंगल कामनाएँ 🪷 आसुरी शक्तियों को पराजित करने हेतु प्रभु श्री राम की कृपा हम सब पर बनी रहे । मुख्य रस्में • शमी पूजा और अपराजिता पूजा (अपराह्न काल में) • शस्त्र पूजा / आयुध पूजा (हथियारों, औजारों, वाहनों आदि की पूजा) • रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन (आमतौर पर शाम को) • नए काम शुरू करने, विद्या आरंभ आदि के लिए शुभ दिन माना जाता है शमी श्लोक का एक प्रसिद्ध रूप है: शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी। अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥ आप और आपके परिवार को यह पर्व नई ऊर्जा, सफलता और सकारात्मकता लेकर आए। जय श्रीराम! जय माता दी! 🪔 #Dussehra
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#राष्ट्रीय_स्वयंसेवक_संघ #RSS “संघे शक्ति कलियुगे, सुधा है धर्म के लिए” माँ भारती के प्रति समर्पण, अनुशासन, चरित्र निर्माण एवं सामाजिक समरसता जैसे गुणों का विकास करने वाले विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' के 101 वें स्थापना दिवस की आत्मीय शुभकामनाएं 🪷 अनुशासन और देशभक्ति के अद्वितीय प्रतीक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी स्वयंसेवकों को स्थापना दिवस की हार्दिक मंगलकामनाएँ 💐 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस या संघ) भारत का प्रमुख स्वयंसेवी, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, जिसकी स्थापना 27 सितंबर 1925 को विजयादशमी के दिन नागपुर (महाराष्ट्र) में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार (डॉक्टरजी) ने की थी । यह विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक माना जाता है और संघ परिवार का मूल संगठन है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित शिक्षा, सेवा, श्रम आदि क्षेत्रों के कई संबद्ध संगठन शामिल हैं । *मुख्य उद्देश्य और विचारधारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ,एक सांस्कृतिक संगठन है, जिसका लक्ष्य हिंदू समाज को संगठित कर चरित्र निर्माण, अनुशासन, एकता और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को मजबूत करना है। इसका ध्येय “भारत का परम वैभव” (supreme glory of Bharat) है। आधिकारिक दृष्टि में हिंदुत्व (हिंदू सांस्कृतिक/सभ्यतागत पहचान) पर आधारित राष्ट्रवाद है। संस्थापक डॉ. हेडगेवार का मानना था कि संगठित और शक्तिशाली हिंदू समाज ही देश की रक्षा और उन्नति कर सकता है। बाहरी विश्लेषणों में इसे हिंदू राष्ट्रवादी/हिंदुत्ववादी संगठन के रूप में देखा जाता है, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक रूप से “हिंदू राष्ट्र” की कल्पना से जुड़ा रहा है। संगठन संरचना • शाखा (Shakha): संघ की बुनियादी इकाई। रोज या साप्ताहिक एक घंटे का कार्यक्रम होता है, जिसमें शारीरिक व्यायाम/खेल, योग, वंदना, बौद्धिक चर्चा और संघ प्रार्थना शामिल होती है। • नेतृत्व: सर्वोच्च पद सरसंघचालक (वर्तमान में डॉ. मोहन भागवत, 2009 से) और सरकार्यवाह (दत्तात्रेय होसबाले) है। पदनाम मनोनयन आधारित है। • विस्तार: 2026 की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) के आंकड़ों के अनुसार लगभग 88,949 दैनिक शाखाएं 55,683 स्थानों पर चल रही हैं, साथ में साप्ताहिक मिलन और मंडलियां मिलाकर कुल 1.34 लाख से अधिक इकाइयां। शताब्दी वर्ष (2025) के दौरान विस्तार गतिमान हुआ । मुख्यालय नागपुर में है। आधिकारिक वेबसाइट: rss.org प्रमुख गतिविधियां शाखा के अलावा व्यापक सेवा कार्य (शिक्षा – विद्या भारती, स्वास्थ्य, आपदा राहत, ग्रामीण विकास, सामाजिक समरसता आदि) करता है। कोरोना जैसे संकटों में स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका रही। विभिन्न क्षेत्रों में 40+ संबद्ध संगठन काम करते हैं। *इतिहास स्थापना के बाद स्वतंत्रता आंदोलन से सक्रिय रहा। स्वतंत्रता के बाद तीन बार प्रतिबंध का सामना किया (1948 – गांधी हत्या के बाद, 1975-77 आपातकाल, 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद)। 1940 में माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) ने नेतृत्व संभाला और विचारधारा को मजबूत किया। बाद में बालासाहेब देवरस, रज्जु भैया, के.एस. सुदर्शन और अब मोहन भागवत सरसंघचालक रहे। 2025 में इसकी शताब्दी पूरी हुई। संघ को अक्सर भाजपा का “अभिभावक” संगठन कहा जाता है। इसके समर्थक इसे राष्ट्र निर्माण, अनुशासन और सेवा का प्रतीक मानते हैं, जबकि आलोचक इसे हिंदू श्रेष्ठतावाद या अल्पसंख्यकों के प्रति असहिष्णुता से जोड़ते हैं। दोनों दृष्टियों का अस्तित्व है । @RSSorg अपनी स्थापना से ही भारतीय संस्कृति की रक्षा व युवाओं को संगठित कर उनमें राष्ट्रभक्ति के विचारों को सींचने का उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। एक ओर RSS समाज सेवा के कार्यों को गति देकर हर वर्ग को सशक्त बना रहा है, तो दूसरी ओर शैक्षणिक प्रयासों से देशहित के प्रति समर्पित देशभक्तों का निर्माण कर रहा है #rashtriyaswayamsevaksangh
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#महानवमी #शारदीय_नवरात्र "मां आदिशक्ति" का नौवां स्वरूप माता सिद्धिदात्री के रूप में माना जाता है । नवरात्रि के नौवें दिन इनकी पूजा किए जाने का विधान है ।जिससे सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व जब अपने अंतिम चरण में होता है यानी कि दशहरा से एक दिन पहले तो माता के नौवें स्वरूप की आराधना की जाती है । देवीपुराण के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही सिद्धियों की प्राप्ति की थी । साथ ही मां के इसी स्वरूप से ही भगवान शिव को आधा शरीर देवी का प्राप्त हुआ था जिसे अर्द्धनारीश्वर कहा जाता है । माना जाता है कि, जो भी व्यक्ति सच्चे मन और पूरी श्रद्धा से माता के इस स्वरूप की पूजा करता है तो उसे सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। साथ ही उसके सभी बिगड़े हुए काम बन जाते हैं और धन की कमी भी नहीं रहती । इन नामों से भी जाना जाता है :- मां सिद्धिदात्री को और भी कई सारे नामों से जाना जाता है. इनमें अणिमा, महिमा, ईशित्व, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य,वाशित्व, परकायप्रवेशन, वाक्‌सिद्धि, सर्वकामावसायिता, सर्वज्ञत्व, दूरश्रवण, कल्पवृक्षत्व, सृष्टि, संहारकरणसामर्थ्य, अमरत्व, सर्वन्यायकत्व, भावना और सिद्धि शामिल हैं. माता का स्वरूप :- मां सिद्धिदात्री कमल पुष्प पर विराजमान हैं और इनका वाहन भी सिंह ही है । उनकी चार भुजाएं हैं, माता के दाहिनी ओर के नीचे वाले हाथ में चक्र है वहीं ऊपर वाले हाथ में गदा है । जबकि बाईं ओर के नीचे वाले हाथ में कमल का फूल और ऊपर वाले हाथ में शंख है । जैसा कि माता के नाम से ही पता चलता है कि वे सिद्धियां प्रदान करने वाली हैं । उनके पास अणिमा, महिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, गरिमा, लघिमा, ईशित्व और वशित्व यह 8 सिद्धियां हैं । पूजा विधि :- माता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें और फिर उसके आसपास गंगाजल का छिड़काव करें. इसके बाद माता को फूल, अक्षत, कुमकुम आदि आर्पित करें. माता को भोग लगाएं और घी का दीप जलाएं. इस दिन जातक को हवन अवश्य करना चाहिए और सभी देवी देवताओं के नाम की आहुति देना चाहिए. विधिवत पूजा के दौरान मंत्रों का जाप भी करें और आखिर में मां की आरती करें और माता के जयकारे लगाएं. मां दुर्गा का नौवां स्वरूप मां सिद्धिदात्री है. नवे दिन की पूजा में माता सिद्धिदात्री को पुरी, चने और हलवे का भोग लगाया जाता है और यह भोग कन्याओं को भी दिया जाता है. इस दिन कन्या पूजन किया जाता है, इसे करने से ही मां के नौ दिनों की पूजा पूरी होती है. मां सिद्धिदात्री का पूजा मंत्र :- ओम देवी सिद्धिदात्र्यै नमः.🙏 #navratri
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#शारदीय_नवरात्र #महागौरी नवरात्र अष्ठम देवी महागौरी :- नवरात्र का आठवां दिन देवी महागौरी की पूजा का दिन होता है। यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस दिन देवी महागौरी की आराधना विशेष फलदायक मानी जाती है। देवी महागौरी को आठवीं शक्ति के रूप में पूजा जाता है और इनकी कृपा से साधक को धन, ऐश्वर्य, सुख, और शांति प्राप्त होती है। देवी महागौरी का स्वरूप : रूप: देवी महागौरी का रंग अत्यंत गोरा है, इसीलिए उन्हें "महागौरी" कहा जाता है। इनका वर्ण चंद्रमा के समान उज्ज्वल है। वस्त्र: देवी श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और सफेद फूलों की माला धारण करती हैं। सवारी: देवी महागौरी की सवारी वृषभ (बैल) है, इसीलिए उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। हाथों में अस्त्र: देवी के चार हाथ होते हैं। उनके एक हाथ में त्रिशूल होता है और दूसरे हाथ में डमरू। अन्य दो हाथों से वह अभय मुद्रा और वर मुद्रा में रहती हैं। देवी महागौरी की कथा : पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव को पाने के लिए देवी पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। इस तपस्या के दौरान उनका शरीर कालिख से काला हो गया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनके शरीर को गंगाजल से धोया, जिससे उनका रंग अत्यंत गोरा हो गया और तब से उन्हें महागौरी के नाम से जाना गया। देवी के मंत्रों का जाप करें। विशेषकर यह मंत्र: मंत्र : श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥ महागौरी की कृपा : महागौरी की पूजा से जीवन के सभी दुखों का नाश होता है और मनुष्य को सभी प्रकार के सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यह दिन विशेष रूप से कन्याओं की पूजा का भी होता है, जहां उन्हें भोजन कराकर देवी का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है #navratri
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#नवरात्रि #कालरात्रि नवरात्र सप्तम “देवी कालरात्रि” 1. देवी कालरात्रि का परिचय: देवी कालरात्रि को अंधकार और नकारात्मकता को नष्ट करने वाली देवी के रूप में जाना जाता है। इनका स्वरूप बहुत ही भयंकर और भयावह है, लेकिन ये भक्तों के लिए शुभ फल देने वाली मानी जाती हैं। उन्हें "काल" का अंत करने वाली कहा जाता है, यानी मृत्यु और समय पर विजय प्राप्त करने वाली। 2. देवी कालरात्रि का स्वरूप: इनका रंग काला होता है, और इनके बाल बिखरे होते हैं। ये चार हाथों वाली होती हैं। एक हाथ में तलवार, दूसरे हाथ में कांटा, तीसरा वरद मुद्रा में और चौथा अभय मुद्रा में होता है। देवी का वाहन गधा है। इनके तीन नेत्र होते हैं, जिनसे अग्नि की लपटें निकलती हैं। 3. पूजन विधि: नवरात्र के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा इस प्रकार की जाती है: सुबह स्नान कर पूजा स्थल को साफ करें, देवी की प्रतिमा या चित्र को फूलों से सजाएं, दीपक जलाकर देवी की आरती करें, नीले या काले वस्त्र पहनकर पूजा करें, क्योंकि ये देवी का प्रिय रंग है, उन्हें गुड़ का भोग अर्पित करें। इससे शत्रुओं पर विजय मिलती है, अंत में दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और देवी की कथा सुनें। 4. देवी कालरात्रि के महत्व : देवी कालरात्रि की पूजा से सभी प्रकार के भय, शत्रु और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं। ऐसा माना जाता है कि उनके आशीर्वाद से साधक को मोक्ष प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। इनकी कृपा से सभी पापों का नाश होता है और साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। 5. भोग और प्रसाद : देवी को गुड़ और अन्य मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। प्रसाद में गुड़ देने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस दिन गुड़ के सेवन से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। 6. मंत्र : या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। 7. आध्यात्मिक संदेश : देवी कालरात्रि हमें यह सिखाती हैं कि जीवन में चाहे कितना भी अंधकार हो, अगर आत्मविश्वास और शक्ति के साथ सामना किया जाए, तो हर कठिनाई को पार किया जा सकता है। उनका रूप भयावह है, लेकिन उनका आशीर्वाद सौम्य और कल्याणकारी होता है। सातवें दिन की पूजा और उपासना का उद्देश्य आत्मा को शुद्ध करना और भक्त को भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ाना होता है #शारदीय_नवरात्र #navratri
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#नवरात्रोत्सव 🚩 #कात्यायनी_माता नवरात्र छठा माँ कात्यायनी छठा नवरात्र माँ दुर्गा के नौ दिनों के पर्व का छठा दिन होता है, जिसे विशेष रूप से माँ कात्यायनी की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है। माँ कात्यायनी दुर्गा का छठा रूप हैं, जिन्हें अत्यंत शक्तिशाली और शत्रुनाशिनी देवी के रूप में पूजा जाता है। इस दिन की पूजा, व्रत और साधना का विशेष महत्व है, जो साधकों और भक्तों के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। *माँ कात्यायनी की पौराणिक कथा माँ कात्यायनी का जन्म ऋषि कात्यायन की तपस्या के फलस्वरूप हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि देवताओं और ऋषियों ने महिषासुर के अत्याचार से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा से प्रार्थना की। तब त्रिदेवों ने अपनी शक्ति से एक देवी को उत्पन्न किया, जो महिषासुर का वध करने के लिए कात्यायन ऋषि के घर में जन्मीं। इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा माँ कात्यायनी को शत्रुओं का नाश करने वाली और भक्तों की रक्षक माना जाता है। उन्होंने महिषासुर का वध कर देवताओं को अत्याचार से मुक्त किया था, इसलिए उन्हें महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है। माँ कात्यायनी का स्वरूप : माँ कात्यायनी का रूप अत्यंत दिव्य और सौम्य है। इनके चार हाथ होते हैं : एक हाथ में कमल का फूल होता है, दूसरे हाथ में खड्ग (तलवार), अन्य दो हाथों से वे अभय मुद्रा और वर मुद्रा में रहती हैं। माँ कात्यायनी का वाहन सिंह है, जो उनकी शक्ति और साहस का प्रतीक है। छठे नवरात्र का महत्व : माँ कात्यायनी की पूजा शत्रुनाश और रोगमुक्ति के लिए की जाती है। वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए अविवाहित लड़कियां माँ कात्यायनी की विशेष रूप से पूजा करती हैं, क्योंकि उन्हें यह आशीर्वाद प्राप्त होता है कि वे योग्य वर को प्राप्त करें। इस दिन साधक और भक्त आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने के लिए तपस्या और साधना करते हैं। माँ कात्यायनी की पूजा करने से धन, ऐश्वर्य, और समृद्धि का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूजा के दौरान कात्यायनी मंत्र का जाप किया जाता है: या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ व्रत और अनुष्ठान : कई भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और केवल फलाहार या सात्विक भोजन करते हैं। व्रत करने से साधक को आत्मिक शक्ति और शुद्धि प्राप्त होती है। माँ कात्यायनी का मंत्र: ॐ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ कात्यायन्यै नमः॥ विशेष फल : छठे नवरात्र को माँ कात्यायनी की उपासना करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। देवी का आशीर्वाद जीवन में आने वाली समस्याओं और बाधाओं को दूर करता है। अविवाहित कन्याओं को इस दिन विशेष रूप से माँ कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए, ताकि उन्हें अच्छे जीवनसाथी का आशीर्वाद प्राप्त हो। इस प्रकार, छठा नवरात्र माँ कात्यायनी की पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उनकी कृपा से भक्तों को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है, और उनका जीवन कष्टों से मुक्त होता है #शारदीय_नवरात्र #navratri
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#राष्ट्रीय_सुरक्षा_गार्ड 🇮🇳 #NSGRaisingDay राष्ट्र की एकता और सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के जवानों और उनके परिवारजनों को एनएसजी के 42 वें स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं 💐 *ध्येय : सर्वत्र, सर्वोत्तम, सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (National Security Guard, NSG) भारत का एक विशेष बल है, जो आतंकवाद विरोधी और विशेष अभियानों के लिए गठित किया गया है। इसे 1984 में स्थापित किया गया था और यह गृह मंत्रालय के तहत कार्य करता है। NSG को "ब्लैक कैट्स" के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसके कमांडो काले वर्दी पहनते हैं - *उद्देश्य* : आतंकवादी हमलों, बंधक संकट, और अन्य उच्च जोखिम वाले सुरक्षा खतरों से निपटना - *प्रशिक्षण* : NSG कमांडो को अत्यधिक कठिन प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें निशानेबाजी, विस्फोटक प्रबंधन, और नजदीकी युद्ध (CQB) शामिल हैं - *संरचना* : इसमें दो मुख्य इकाइयाँ हैं - विशेष कार्रवाई समूह (SAG) और विशेष रेंजर समूह (SRG)। SAG में भारतीय सेना के जवान शामिल होते हैं, जबकि SRG में अर्धसैनिक बलों के जवान होते हैं - *प्रमुख ऑपरेशन* : 2008 मुंबई हमले (ऑपरेशन ब्लैक टॉरनेडो), पठानकोट हमला (2016), और अक्षरधाम मंदिर हमला (2002) जैसे अभियानों में NSG की महत्वपूर्ण भूमिका रही है - *मुख्यालय* : नई दिल्ली, इसके अतिरिक्त मानेसर (हरियाणा) में प्रशिक्षण केंद्र है । राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड में भर्ती प्रत्यक्ष नहीं होती। केवल सेना, CAPF और राज्य पुलिस से प्रतिनियुक्ति पर चयन होता है। चयन बेहद कठोर शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक परीक्षणों के बाद होता है। *क्षेत्रीय हब (Hub-and-Spoke मॉडल) 26/11 मुंबई हमले के बाद NSG ने क्षेत्रीय हब बनाए हैं, ताकि प्रतिक्रिया समय कम हो। वर्तमान में हब मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, अहमदाबाद और जम्मू में हैं । अयोध्या ,उत्तर प्रदेश में नया हब बनाने की घोषणा की गई है । NSG - राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड , देश की सुरक्षा के लिए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है और इसे भारत के सबसे सशक्त बलों में से एक माना जाता है @nsgblackcats 🇮🇳
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#नवरात्रि #स्कंदमाता 🚩 नवरात्र पंचम “मां स्कंदमाता” नवरात्र का पाँचवा दिन माँ स्कंदमाता को समर्पित होता है। स्कंदमाता माँ दुर्गा का पाँचवां स्वरूप हैं और इन्हें स्कंद (भगवान कार्तिकेय) की माता के रूप में पूजा जाता है । यह दिन भक्तों के लिए विशेष महत्त्व रखता है क्योंकि माँ स्कंदमाता अपने भक्तों को शांति, सुख, और समृद्धि प्रदान करती हैं स्कंदमाता का स्वरूप : माँ स्कंदमाता की चार भुजाएँ होती हैं एक हाथ में भगवान स्कंद (कार्तिकेय) को गोद में लिए हुए होती हैं दूसरे हाथ में कमल का फूल होता है माँ की सवारी सिंह होती है, और इन्हें कमल पर विराजमान भी दिखाया जाता है, इसलिए इन्हें "पद्मासना देवी" भी कहा जाता है मंत्र जाप : माँ स्कंदमाता के विशेष मंत्र का जाप करें ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः प्रसाद : माँ को केले, मिठाई और अन्य प्रसाद अर्पित करें और बाद में ये प्रसाद भक्तों में बांटें *महत्त्व माँ स्कंदमाता की पूजा से व्यक्ति को ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होती है । ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से माँ की आराधना करते हैं, उनकी सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं और जीवन में सफलता मिलती है । उनके आशीर्वाद से भक्त को अपने परिवार और संतान से जुड़ी समस्याओं से मुक्ति मिलती है #navratri
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#HappyBirthday उत्तर प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष व अनवरत आठवीं बार विधायक, प्रदेश की 217 महाराजपुर (कानपुर) विधानसभा सीट से वर्तमान सदस्य माननीय सतीश महाना जी, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 🎂🪷 बाबा गोरक्षनाथ जी से प्रार्थना है कि आप दीर्घायु हों और सदैव स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें 💐 @Satishmahanaup @karanmahana @saurabh100g
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