Arvind Pandey(भारतीय संविधान के अनुसार खरबपति) retweeted
एक समय था जब लोग कहते थे कांग्रेस सबसे ज्यादा आरक्षण की राजनीति करती है।
आज हालत ये है कि बीजेपी उस मामले में भी आगे निकल गई है।
अमित शाह जी साफ कह रहे हैं और पार्टी का रुख भी साफ है।
यूपी में तीसरी बार सरकार बनी तो आरक्षण बढ़ाने का काम और तेजी से होगा।
ये बात सवर्ण समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचनी चाहिए।
आंखें बंद करके वोट देने का नतीजा सामने है।
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किसी और नेता में ऐसा कहने का क़ुब्बत है ?
शाबाश @priyankac19 जी 💪❤️
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ये बात सवर्ण समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचनी चाहिए।
आंखें बंद करके वोट देने का नतीजा सामने है।
#UGCRollBack
#general_act
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अब जब कमेटी बनाने का निर्णय लिया गया है तो रविशंकर ढ़ोल पीट रहे हैं, बेशर्म.
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एससी एसटी एक्ट को लोग #मोदी_एक्ट क्यों कह रहे हैं पढ़िए तथ्यों के साथ
1. SC/ST अधिनियम 11 सितंबर 1989 को राजीव गांधी सरकार द्वारा पारित किया गया था।
2. इसे 29 जनवरी 1990 को वी.पी. सिंह सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया था, जिसे भाजपा का समर्थन प्राप्त था।
3. 2014–2016 के दौरान भाजपा के कार्यकाल में SC/ST अधिनियम में बड़े बदलाव किए गए:
- राहत राशि बढ़ाकर 8.5 लाख रुपये तक की गई।
- भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाया गया।
- भुगतान को अधिक तेज किया गया।
- अपराधों की संख्या 22 से बढ़ाकर 47 कर दी गई।
- दोषी होने की धारणा को और कठोर बनाया गया।
- अनिवार्य एवं विशेष रूप से निर्धारित विशेष न्यायालयों का प्रावधान किया गया।
4. 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस कानून का दुरुपयोग ब्लैकमेल करने के लिए किया जा रहा है और काशीनाथ महाजन मामले में तीन सुरक्षा उपाय बताए।
लेकिन भाजपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को निष्प्रभावी करने के लिए संशोधन पारित किया और धारा 18A जोड़ी। इसमें निम्न प्रावधान किए गए:
- प्रारंभिक जाँच की आवश्यकता नहीं।
- अग्रिम जमानत पर रोक।
- सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं।
5. कई हाईकोर्ट के फैसलों, पुलिस रिपोर्टों और NCRB की रिपोर्टों में इस कानून के दुरुपयोग की बात सामने आई है, विशेष रूप से आर्थिक मुआवजे के लिए।
लेकिन दुरुपयोग रोकने के बजाय भाजपा सरकार क्या कर रही है?
- मुआवजे की राशि में 40% तक वृद्धि करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे यह 12 लाख रुपये तक हो सकती है।
निष्कर्ष?
- अगर भाजपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी नहीं किया होता, तो वो लोग सुरक्षित होते जिन्हों कोई अपराध ही नहीं किया लेकिन भाजपा द्वारा जोड़ी गई धारा 18A के कारण उनकी जमानत खारिज हो जाती है
- अगर भाजपा ने मुआवजे की राशि नहीं बढ़ाई होती या बिना पर्याप्त जाँच के भुगतान को आसान और तेज नहीं किया होता, तो कानून के दुरुपयोग को काफी हद तक रोका जा सकता था।
- अगर भाजपा ने जमानत पर रोक और प्रारंभिक जाँच की आवश्यकता समाप्त करने वाले प्रावधान नहीं जोड़े होते—यानी धारा 18A नहीं जोड़ी होती—तो यह कानून इतना कठोर नहीं बनता और लोगों को ब्लैकमेल करने के लिए इसका इस्तेमाल करना कठिन होता।
- दुरुपयोग बड़े पैमाने पर होने की जानकारी होने के बावजूद, और यह जानते हुए कि आर्थिक लाभ एक प्रमुख कारण है, यदि आप मुआवजे की राशि बढ़ाते हैं तथा दुरुपयोग रोकने के उपाय नहीं करते, तो इसका अर्थ यही है कि आप दुरुपयोग को बढ़ावा देना चाहते हैं।
इसलिए इसे उचित रूप से “मोदी एक्ट” कहा जाता है।
नहीं तो इसका श्रेय किसे दें?
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माता-पिता के वेतन या आय से तय नहीं होगी ओबीसी क्रीमी लेयर : सुप्रीम कोर्ट
मतलब अब क्रीमी लेयर का कोई मतलब ही नहीं?
इस देश में सामाजिक न्याय के नाम पर अब सिर्फ़ वोटबैंक की राजनीति चल रही है!!
माता-पिता के वेतन या आय से तय नहीं होगी ओबीसी क्रीमी लेयर : सुप्रीम कोर्ट
पहले से तय हो चुकी वरिष्ठता व पदोन्नतियों को फिर से नहीं खोला जाएगा
अर्थात् :
1. EWS में वेतन से आय 8 लाख से ऊपर तो EWS नहीं
2. ओबीसी में वेतन से आय गिनी नहीं जाएगी??
#CREAMYLAYER
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केशव मौर्या जी का जलवा 12-12 नर्से घर पर ड्यूटी में। लिखित आदेश से मामला संज्ञान मे आ गया वैसे तो सब अंडरस्टूड है।
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यदि आपको संगठित हिन्दू समाज एवं सर्वजन की सुरक्षा तथा विकास चाहिए तो हमसे जुड़िये.
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अभी जीत की ख़ुशी मत मनाओ।
केवल पुनर्विचार..........
IT सेल के झांसे में मत आना।
विरोध जारी है....
#UGCRollBack
#general_act
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हर जगह आरक्षण दे दो
फिर इसी तरह भारत विश्व गुरु बन जायेगा 😁
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आने वाले चुनाव में वोट किसे दिया जाये, इसके लिए एक कमेटी बनाऊगा, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर वोट देने का फैसला किया जायेगा.
नोट: कमेटी की रिपोर्ट चुनाव के बाद ही आयेगी.
#हालात
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सन 1689 ई में छत्रपति सम्भूजी महाराज की मृत्यु के बाद औरंगजेब की सेना ने रायगढ़ के किले पर आक्रमण किया और सम्भूजी महाराज की पत्नी यशुबाई, उनके पुत्र शाहूजी महाराज, शाहूजी की पत्नी सावित्री बाई, और शाहूजी के सौतेले भाई मदन सिंह कैद कर लिए। इस समय शाहूजी की आयु सात वर्ष थी।
इधर शिवाजी महाराज के दूसरे बेटे राजाराम को छत्रपति बनाया गया। उनके लिए राजमुकुट कांटो का ताज ही रहा, वे लगातार मुगलों से संघर्ष करते रहे। उन्होंने अपने बड़े भाई संभाजी की क्रूरतापूर्ण हत्या का प्रतिशोध लेने और भतीजे शाहूजी को मुक्त कराने का प्रण लिया था, और वे सदैव इस कार्य में लगे रहे। सन्ताजी घोड़पडे जैसे योद्धाओं के बल पर उन्होंने मुगलों को भयानक चोट दी, पर शाहूजी को मुक्त कराना सम्भव नहीं हुआ। 1700 ई. में उनकी भी मृत्यु हो गयी। उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र शिवाजी द्वितीय छत्रपति बने, और उन्होंने भी मुगलों से संघर्ष जारी रखा...
सन 1707 में जब औरंगजेब की मृत्यु हुई, तब उसके उत्तराधिकारी बहादुरशाह प्रथम ने शाहूजी को रिहा कर दिया। क्यों? इसलिए, ताकि शाहूजी जब लौट कर सतारा पहुँचे तो उत्तराधिकार के लिए मराठे आपस में ही लड़ पड़ें।
शाहूजी सतारा आये, छत्रपति की गद्दी पर बैठे शिवाजी द्वितीय से हल्का विवाद भी हुआ, लेकिन अंततः पांचवे छत्रपति के रूप में उनका राज्याभिषेक हुआ। शिवाजी द्वितीय सतारा से अलग कोल्हापुर चले गए और वहाँ एक अलग राज्य स्थापित किया। पर यशुबाई? सावित्रीबाई? वे अब भी मुगलों की कैद में थीं। बहादुरशाह ने उन्हें बंधक रखा था, ताकि मुगल कैद से रिहा हुए शाहूजी संधि के नियमों का उलंघन न करें...
मराठा साम्राज्य में यहाँ एक बड़ा परिवर्तन हुआ। पेशवाई आई बालाजी विश्वनाथ के हाथों में, और उन्होंने तय किया कि अब से छत्रपति युद्ध में भाग नहीं लेंगे। उनके लिए युद्ध पेशवा लड़ेंगे, रक्त पेशवा बहाएंगे, छत्रपति को किसी युद्ध में जाने की आवश्यकता नहीं...
1713 में बालाजी विश्वनाथ पेशवा बने तब उनके सामने दो चुनौतियां थीं। एक तो मुगल, और दूसरा कोल्हापुर का मराठा राज्य! इन दोनों मोर्चों पर एक साथ कूटनीतिक तरीके से लड़ता और विजयी होता वह चित्तपावन अपने पुत्र बाजीराव के साथ 1718 में पहुँचा दिल्ली!
कुछ मराठों की मार और कुछ आपसी तकरार के कारण डगमग चल रही मुगल सत्ता का गिरेबान पकड़ कर पेशवा ने अपनी शर्तें मनवाई। दक्षिण के मुगल प्रान्तों से चौथ और सरदेशमुखी(टैक्स) वसूलने का अधिकार! इतना ही नहीं, गुजरात भी। और मुगल दरबार द्वारा शाहूजी को छत्रपति के रूप में स्विकार्यता... और? और पुत्रवधु समेत राजमाता यशुबाई की मुक्ति...
लगभग 30 साल तक मुगल कैद में रहने के बाद यशुबाई मुक्त हुईं, और उन्हें मुक्ति दिलाने वाले थे पेशवा बालाजी विश्वनाथ! बाजीराव बल्लाळ!
छावा की कहानी यहाँ पूरी होती है।
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जिस मंथन से देवता अमृत खोज रहे थे, उसी से प्रकट हुए आयुर्वेद के आदि आचार्य।
ऋषि दुर्वासा के श्राप से देवता श्रीहीन हो गए। भगवान विष्णु के बताए उपाय से देवों और असुरों ने मंदराचल को मथानी और नागराज वासुकि को रस्सी बनाकर क्षीरसागर का मंथन किया। हलाहल को भगवान शिव ने कंठ में धारण किया, फिर एक-एक कर रत्न निकले, और सबसे अंत में अमृत कलश लिए प्रकट हुए धन्वंतरि।
सुश्रुत संहिता के अनुसार, काशिराज दिवोदास के रूप में उन्होंने ही सुश्रुत को शल्य विद्या सिखाई। इसीलिए धनतेरस पर धन्वंतरि का पूजन होता है।
"धन्वन्तरिरिति ख्यात आयुर्वेददृगिज्यभाक्।"
अर्थात, धन्वंतरि आयुर्वेद के द्रष्टा हैं। आयुर्वेद किसी एक मनुष्य की खोज नहीं, द्रष्टा का दर्शन है।
#आयुर्वेद #धन्वंतरि #समुद्रमंथन #धनतेरस #आयुर्वेदकेपुरोधा #भारतीयज्ञान #Ayurveda #Dhanvantari #IndianHistory #DesiAlchemist
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कितना भी अंतर जातीय विवाह कर लो
जाति नहीं बदलेगी 🤣
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महाभारत की एक ऐसी माँ, जिसने अपने बेटे घटोत्कच को अकेले पाला…
लेकिन जब युद्धभूमि में उसकी मृत्यु हुई, तो वह रोई नहीं! 😮
आखिर बेटे की लाश देखकर हिडिम्बा की आँखों में आँसू की जगह गर्व क्यों था?
कर्ण का दिव्य अस्त्र, घटोत्कच का अद्भुत बलिदान और माँ की अनोखी सीख—
इस रहस्य से जुड़ी पूरी कथा जानिए।
🙏 जय श्रीकृष्ण!
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लगता है सुप्रीम कोर्ट भी समझ गया है की बीजेपी अब नहीं आएगी
झटके पर झटका दे रही है
आज " OBC क्रीम की लेयर " पर भी पोंछा लगा दिया
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बता दें कि रविशंकर प्रसाद खुद उस parliamentary committee के सदस्य थे, जिसने UGC guidelines पर साइन किया था 👇
मतलब पहले खुद ही रायता फैलाओ, और फिर उसको समेटने का नाटक भी करो?
बढ़िया है 😂👏
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष UGC नियमावली को लेकर केंद्र सरकार द्वारा रखा गया सुझाव अत्यंत स्वागतयोग्य है। हमें पूर्ण विश्वास है कि समीक्षा के बाद ऐसा संतुलित निर्णय आएगा, जिससे सभी वर्गों को संतोष होगा और सबके हितों की रक्षा सुनिश्चित होगी।
'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' — यही मूलमंत्र हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है और हर निर्णय में यही भावना झलकती है।
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एक तरफ पुलिस वाले रेप कर रहे है दूसरी तरफ न्यायालय को न्याय देने में 11 साल लग जा रहे है।
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कमीनो UGC Regulations के नाम पर इतने महीनों से तुम लोग कमिटी-कमिटी का खेल खेल रहे हो। न कोई स्पष्ट जवाब, न कोई फैसला, बस तारीख पर तारीख और ऊपर से इसे भी मास्टरस्ट्रोक बताकर अपनी पीठ थपथपा रहे हो।
और शर्म तो तुम्हें इस बात पर भी नहीं आती कि तुम्हारे पोस्ट में सामान्य वर्ग (General Category) लिखने तक की हिम्मत नहीं है। इतनी नफरत, इतना भेदभाव और इतनी उपेक्षा कि देश की एक बड़ी आबादी का नाम लेने में भी तुम्हारी फटती है। आखिर किस बात का डर है तुम्हें?
और एक बात कान खोलकर सुन लो, अब सामान्य वर्ग तुम्हारी इन चालाकियों और खोखले आश्वासनों में आने वाला नहीं है।
और चुनाव के वक्त वोट मांगने के लिए हमारी सोसायटी के आसपास भी दिखाई मत देना, कमीनों। आए तो वहीं सबके सामने तुम्हारी नीतियों का ऐसा हिसाब मांगेंगे कि दोबारा वोट मांगने आने से पहले सौ बार सोचोगे।
हाथ जोड़कर वोट मांगने आओगे और जनता के सवालों का जवाब दिए बिना नहीं बच पाओगे।
बहुत हो गया तुम्हारा कमिटी-कमिटी और मास्टरस्ट्रोक का खेल।
अब हिसाब होगा तुम्हारा।
दॉगले साले 🤬































